जय बाजपेयी को पीछे से कोई पॉलिटिकल सपोर्ट
कानपुर। बीते 2 जुलाई को विकरू गांव में विकास दुबे द्वारा 8 पुलिस वालों की हत्या कर दी गई थी तथा मुठभेड़ में छह अन्य पुलिस वाले घायल हो गए थे पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए 3 जुलाई को सुबह दो बदमाशों को मुठभेड़ में मार गिराया था उसके बाद विकास दुबे को भी मुठभेड़ में मार गिराया गया छानबीन करने पर पता चला कि ब्रह्म नगर निवासी जय बाजपेई पुत्र लक्ष्मीकांत बाजपेई ने विकास दुबे को घटना कारित करने में पैसे और कारतूस देकर मदद की इसके अलावा अपनी लग्जरी गाड़ियों से विकास दुबे व अन्य को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में मदद की पुष्टि कारक साक्ष्य उपलब्ध होने पर जय बाजपेई तथा प्रशांत शुक्ला उर्फ़ डब्लू को अंतर्गत धारा 147 /148/ 149 302/ 307/ 395/ 412/ भारतीय दंड विधान व सेवेन सी एल ए एक्ट संगठित धारा 120 बी के तहत गिरफ्तार किया गया तथा जय बाजपेई द्वारा विकास दुबे गैंग को लाइसेंसी कारतूस उपलब्ध कराने के फलस्वरूप जय बाजपाई के विरुद्ध आर्म्स एक्ट 29/ 30 का अभियोग पंजीकृत किया गया।
जय बाजपेयी को पुलिस ने छोड़ दिया है। जबकि ईडी और टैक्सेशन विभाग की जांचें उस पर चल रही हैं। विकास दुबे जैसे हार्डकोर क्रिमिनल की अकूत काली कमाई को इन्वेस्ट करने और करोड़ों की मनी-लॉन्ड्रींग के आरोप उस पर लग चुके हैं। इसके बावजूद शहर पुलिस अपराधी विकास दुबे के इस खजांची को बाइज्जत उसके घर छोड़ कर आई है। चर्चा है कि पाप की कमाई को खपाने में एक्सपर्ट हो चुके जय बाजपेयी को पीछे से कोई पॉलिटिकल सपोर्ट मिल रहा है। बिल्कुल वैसी ही पॉलिटिक्स जिसने विकास दुबे जैसे राक्षस को पैदा किया। खुलेआम फिर से वैसी डर्टी पॉलिटिक्स से जनता हैरान है। कहा जा रहा है कि पुलिस ने उसको क्लीनचिट दे दी है।
पुलिस के सबसे बड़े अपराधी के फण्ड मैनेजर को यो ससम्मान घर तक छोड़ कर आने पर बागी तेवरों के लिए प्रसिद्ध, पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने भी घोर आश्चर्य प्रकट किया है।

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