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21/07/2020

श्रावण सोमवती अमावस्या श्रद्धालुओं के स्नान, ध्यान के साथ बोल-बम के जयघोष


कानपुर। श्रावण मास के पावन पर्व सोमवती अमावस्या पर भाेर पहर से ही श्रद्धालुओं ने गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। बिठूर स्थित ब्रह्मावर्त घाट के साथ जाजमऊ, गंगा बैराज, मैस्कर घाट व परमट घाट पर श्रद्धालुओं ने स्नान, ध्यान के साथ बोल-बम के जयघोष से आकाश गूंजायमान किया। संक्रमण काल के चलते श्रावण मास में पहली बार शहर के शिवालयों में सन्नाटा पसरा रहा। मंदिरों में प्रतिदिन की भांति आरती, श्रृंगार व भोग पूजन करके पट बंद किए गए।

सावन माह के तीसरे सोमवार को विशेष सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग बना है। श्रद्धालुओं ने घरों व गंगा घाटों पर पार्थिव शिवलिंग बनाकर बेल पत्र व धतूरा चढ़ाकर भगवान शिव का अभिषेक किया। शहर के शिवालयों में बाबा के मंत्रोच्चार गूंजते रहे। बिठूर स्थित ब्रह्मावर्त घाट पर भोर पहर चार बजे से ही श्रद्धालुओं ने मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाई। स्नान करके घाटों पर बने शिवालयों में जलाभिषेक कर पूजन किया। आस्था का ऐसा ही नजारा पत्थर घाट पर भी देखने को मिला, यहां कोरोना के भय को दरकिनार कर आस्था की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालु पहुंचते रहे।

घाटों पर बढ़ती संख्या से पुलिस प्रशासन बेखबर रहा, बाद में सुबह आठ बजे कुछ पुलिस कर्मी सख्ती दिखाते नजर आएं। शहर में परमट, जाजमऊ, सरसैया घाट, गंगा बैराज और शुक्लागंज में हजारों श्रद्धालुओं ने स्नान कर पूजन किया। हालांकि बिठूर सहित शहर के प्रमुख शिवालयों में श्रावण मास के तीसरे सोमवार को आरती, श्रृंगार व पूजन अर्चन विधि-विधान से किया गया। दर्शन की आस लेकर पहुुंचे श्रद्धालुओं को पुलिसकर्मियों ने मुख्य गेट से लौटा दिया।

पौराणिक कथा के अनुसार सोमवती अमावस्या पर मां गंगा का स्नान व भगवान शिव का अभिषेक करने से समस्त इच्छाएं पूर्ण होती है। धूनी ध्यान केंद्र के आचार्य डॉ. अमरेश मिश्र के मुताबिक इस बार सावन के तीसरे सोमवार को सोमवती अमावस्या और हरियाली अमावस्या की तिथि भी है, शिवभक्तों के लिए ये शुभ संयोग है। शिवलिंग पूजन व प्रकृति पूजा का करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए दान व स्नान करना शुभ माना जाता है। भगवान शिव के चित्र या शिवलिंग पर बेल पत्र चढ़ाने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

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