​कानपुर: काकादेव पुरानी बस्ती में 'नरक' जैसी जिंदगी! 2 साल पहले सीवर लाइन के लिए खोदी गई गली आज तक नहीं बनी; बदहाली पर फूटा जनता का गुस्सा - NINE ONE TIMES

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03/06/2026

​कानपुर: काकादेव पुरानी बस्ती में 'नरक' जैसी जिंदगी! 2 साल पहले सीवर लाइन के लिए खोदी गई गली आज तक नहीं बनी; बदहाली पर फूटा जनता का गुस्सा

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गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र का हाल: चुनावी मौसम में वोट मांगने वाले नेता जीत के बाद हुए गायब; जलभराव, कीचड़ और गड्ढों के बीच रहने को मजबूर बुजुर्ग और मासूम बच्चे

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ग्राउंड रियलिटी मुख्य बिंदु:

  • 2 साल से बदहाली: सीवर लाइन बिछाने के लिए खोदी गई सड़क को ठेकेदार ने लावारिस छोड़ा।
  • तालाब बनी गली: हल्की बारिश में भी पूरी गली में जलभराव और सीवर का गंदा पानी जमा होता है।
  • हादसों को दावत: उखड़ी इंटरलॉकिंग टाइल्स और मलबे के कारण बुजुर्गों व बच्चों का निकलना दूभर।
  • नेताओं की बेरुखी: चुनाव के समय वोट मांगने आने वाले विधायक और पार्षद जीत के बाद गायब।
  • जनता की मांग: मानसून से पहले सड़क का पुनर्निर्माण कराया जाए, वरना बड़े आंदोलन की चेतावनी।
कानपुर। स्मार्ट सिटी कानपुर के दावों की हवा निकालती एक बेहद ही शर्मनाक तस्वीर गोविंद नगर विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले काकादेव पुरानी बस्ती से सामने आई है। यहाँ की एक प्रमुख गली पिछले दो साल से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि विकास कार्य और सीवर लाइन बिछाने के नाम पर प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरी गली को खोद डाला था। सीवर लाइन डालने का काम तो जैसे-तैसे पूरा हो गया, लेकिन उसके बाद सड़क को दोबारा बनाने की सुध किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने नहीं ली। नतीजा यह है कि पिछले दो वर्षों से यहाँ के लोग कीचड़, मलबे और जलभराव के बीच किसी तरह जीवन काटने को मजबूर हैं।

सीवर लाइन बिछी, सड़क गायब: नगर निगम की बड़ी लापरवाही

​काकादेव पुरानी बस्ती के स्थानीय लोगों का कहना है कि नगर निगम और संबंधित जलकल विभाग ने करीब दो साल पहले यहाँ सीवर पाइपलाइन डालने के लिए खुदाई की थी। जनता को उम्मीद थी कि इस काम के बाद उनके इलाके की जल निकासी व्यवस्था बेहतर होगी और नई सड़क बनेगी। लेकिन ठेकेदार और अधिकारियों के बीच के कथित तालमेल की कमी का खामियाजा यहाँ की भोली-भाली जनता भुगत रही है।

​पाइपलाइन डालने के बाद गड्ढों को ठीक से भरा नहीं गया और न ही इंटरलोकिंग टाइल्स को दोबारा व्यवस्थित तरीके से लगाया गया। पूरी गली में जगह-जगह टाइल्स के टुकड़े, मलबे का ढेर और खुले हुए मैनहोल दुर्घटनाओं को दावत दे रहे हैं। दो साल के लंबे अंतराल में इस गली ने कई मौसम और कई भीषण बरसातें देख ली हैं, लेकिन इस उखड़ी हुई सड़क की तकदीर नहीं बदल सकी।

बारिश आते ही बन जाता है 'तालाब', घरों में घुसता है गंदा पानी

​मानसून की आहट से पहले जहाँ नगर निगम कागजों पर नालों की सफाई और सड़कों को दुरुस्त करने के करोड़ों के दावे कर रहा है, वहीं काकादेव की इस गली की हकीकत कुछ और ही बयां करती है। थोड़ी सी भी बारिश होते ही यह गली पूरी तरह तालाब में तब्दील हो जाती है। सड़क पर जलभराव इस कदर हो जाता है कि नालियों और सीवर का गंदा पानी लोगों के घरों की देहलीज पार कर अंदर तक समा जाता है।

​कीचड़ और मलबे के कारण पूरी गली में फिसलन हो जाती है, जिससे यहाँ रहने वाले मासूम बच्चों और बुजुर्गों का पैदल चलना भी दूभर हो चुका है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, आए दिन यहाँ दुपहिया वाहन चालक और बुजुर्ग मलबे में फिसलकर चोटिल हो रहे हैं, लेकिन प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।

वोट बैंक की राजनीति: 'चुनाव खत्म, तो वादे भी खत्म'

​वीडियो रिपोर्ट में जनता का सबसे बड़ा दर्द जनप्रतिनिधियों के रवैये को लेकर फूटा है। स्थानीय लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भी चुनाव आते हैं—चाहे वह विधानसभा चुनाव हो या नगर निगम के पार्षद का चुनाव—नेता जी और उनके कार्यकर्ता चमचमाती गाड़ियों से उतरकर इसी कीचड़ और मलबे वाली गली में पैर रखते हैं। हाथ जोड़कर बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं कि चुनाव जीतते ही सबसे पहले इस गली का कायाकल्प होगा। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं और नतीजे आ जाते हैं, वही जनप्रतिनिधि और अधिकारी जनता की यादों से पूरी तरह ओझल हो जाते हैं। वादे फाइलों और भाषणों के ढेरों में कहीं दबकर रह जाते हैं।

9वन टाइम्स का बड़ा सवाल: आखिर कौन लेगा इस बदहाली की सुध?

​जनता का कहना है कि उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों से लेकर स्थानीय पार्षदों तक कई बार लिखित और मौखिक शिकायतें कीं, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही मिला। अब 9वन टाइम्स न्यूज़ पोर्टल प्रशासन और गोविंद नगर के जिम्मेदार अधिकारियों से यह सीधा सवाल पूछता है कि जब विकास के नाम पर सड़कें खोदी जाती हैं, तो उन्हें पूर्ववत स्थिति में लाने की जिम्मेदारी किसकी है? क्या टैक्स भरने वाली कानपुर की जनता इसी तरह बुनियादी सुविधाओं के लिए तरसती रहेगी या नगर आयुक्त इस मामले का संज्ञान लेकर काकादेव की इस बस्ती को इस नरकीय स्थिति से निजात दिलाएंगे?



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