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21/07/2020

संजीत यादव अपहरण फिरौती देते वक्त भी रहा था पुलिस का रवैया ढुलमुल


कप्तान का सख्त रुख विभागीय जांच कर कार्यवाही होगी

 

कानपुर। पैथोलॉजी कर्मी संजीत यादव के अपहरण के मामले में जिस दिन फिरौती की रकम दी गई, उस वक्त भी पुलिस का रवैया ढुलमुल ही रहा। इस चर्चित मामले में एक नई जानकारी सामने आई है कि जब गुजैनी पुल से फिरौती की रकम का बैग नीचे फेंका गया तो पुल पर एक डीसीएम खड़ी थी, जिसके अंदर तीन आदमी बैठे थे। बैग फेंके जाने के बाद तीनों गायब हो गए। मौके पर ही एक बाइक लावारिस हालत मिली थी। मामला संदिग्ध मान संजीत के पिता चमन के साथ मौजूद पुलिसकर्मी जांच कर रहे थे। इस बीच दूर अपनी कार में बैठे बर्रा  का फोन चमन के मोबाइल पर आया। एक पुलिसकर्मी ने उन्हें जब मामले की जानकारी दी तो बोले-चमन को लेकर वापस आ जाओ। परिवार ने बातचीत की रिकार्डिंग मीडिया से साझा कर रणजीत राय पर मिलीभगत का आरोप लगाया है।

रिकॉर्डिंग सुनकर पता चलता है, किरकिरी के बाद निलंबित किए गए बर्रा थाना प्रभारी रणजीत राय फिरौती पहुंचाने के वक्त सक्रिय होने के उलट दूर अपनी कार में बैठे रहे। फोन पर दिशा-निर्देश देते रहे। अपहर्ताओं ने रकम का बैग पुल से नीचे गिरवा लिया तो भी जाकर देखने की जहमत नहीं उठाई। न आसपास के इलाके में कोई नाकाबंदी कराई। संजीत का अपहरण 22 जून को हुआ था। 13 जुलाई को रकम का बैग अपहर्ताओं के कहने पर पुल से नीचे फेंका गया था। 

मोबाइल रिकार्डिंग में बातचीत के अंश

रणजीत राय - हेलो, हां कहां हो चमन? चमन - जहां यह डीसीएम खड़ी है पुल के इधर, सब लोग खड़े हैं। रणजीत - तुम उधर से वापस आओ न, तुम क्या कर रहे हो वहां खड़े होकर। चमन - तो क्या हम अकेले आएं सर? रणजीत - तुम कहां खड़े हो? चमन - सब लोग हैं साहब। रणजीत- किसी से बात कराओ। पुलिसकर्मी - सर, अनिल बोल रहा हूं, बताएं। रणजीत- हां अनिल कहां हो? अनिल - सर, हम जहां पुल से बैग गिराए, वहां डीसीएम खड़ी थी सस्पेक्टेड, जब हम पहले निकले थे तो तीन आदमी उसमें बैठे थे, अब उसमें एक भी आदमी नहीं है। मोटरसाइकिल खड़ी है। इस चक्कर में उसके पास रुककर देख रहे थे कि कौन है? किसकी है? चमन वापस आए, यहीं खड़े हैं। रणजीत- चमन को ले लो और वापस आओ। रघुवंशी साहब हैं, इनके साथ जा रहा हूं। बाद में फोन करूंगा।

 पुलिस बर्रा बाईपास से कर्रही रोड और सचान चौराहे से किदवईनगर रोड पर सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखने पहुंची तो पता लगा कि डीवीआर में 15 दिन की ही रिकार्डिंग सुरक्षित होती है। एसएसपी दिनेश कुमार पी ने बताया कि अपहरण में लग रहे आरोपों के चलते रणजीत राय को निलंबित किया गया था। उनके खिलाफ विभागीय जांच चल रही है उनके खिलाफ जो भी नए तथ्य सामने आएंगे वह जांच में शामिल कर लिए जाएंगे।

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