ज्वाइंट मजिस्ट्रेट पर अभद्रता और जलालत के गंभीर आरोप; उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ का अनिश्चितकालीन धरना शुरू, हड़ताल से मचा प्रशासनिक हड़कंप
तथ्य
टेंशन के मुख्य कारण:
- गंभीर आरोप: लेखपाल आशुतोष कुशवाहा से एसडीएम कार्यालय में चाय-पानी कराने का आरोप।
- अभद्र व्यवहार: लेखपाल संघ का दावा— वार्ता के दौरान एसडीएम अनुभव सिंह ने दी धमकी।
- कामकाज ठप: मांग पूरी होने तक लेखपालों का अनिश्चितकालीन धरना और कार्य बहिष्कार शुरू।
- बड़ी चेतावनी: समाधान न होने पर आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाने का अल्टीमेटम।
- बड़ा सवाल: क्या बातचीत से सुलझेगा विवाद या पूरे यूपी में ठप होगा राजस्व का काम?
तथ्य टेंशन के मुख्य कारण:
- गंभीर आरोप: लेखपाल आशुतोष कुशवाहा से एसडीएम कार्यालय में चाय-पानी कराने का आरोप।
- अभद्र व्यवहार: लेखपाल संघ का दावा— वार्ता के दौरान एसडीएम अनुभव सिंह ने दी धमकी।
- कामकाज ठप: मांग पूरी होने तक लेखपालों का अनिश्चितकालीन धरना और कार्य बहिष्कार शुरू।
- बड़ी चेतावनी: समाधान न होने पर आंदोलन को प्रदेश स्तर पर ले जाने का अल्टीमेटम।
- बड़ा सवाल: क्या बातचीत से सुलझेगा विवाद या पूरे यूपी में ठप होगा राजस्व का काम?
कानपुर नगर। कानपुर की सदर तहसील इस समय प्रशासनिक बगावत का अखाड़ा बन चुकी है। तहसील सदर में तैनात लेखपालों और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम सदर अनुभव सिंह के बीच का विवाद अब पूरी तरह से आर-पार की जंग में तब्दील हो गया है। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ (तहसील सदर इकाई) के बैनर तले सभी लेखपाल एसडीएम के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं। लेखपालों का सीधा आरोप है कि ज्वाइंट मजिस्ट्रेट उनके साथ लगातार अभद्र, अमर्यादित और असम्मानजनक व्यवहार कर रहे हैं, जिससे पूरे संवर्ग के आत्मसम्मान को ठेस पहुँची है। कर्मचारियों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक एसडीएम अनुभव सिंह को पद से हटाया या स्थानांतरित नहीं किया जाता, तब तक तहसील का सारा कामकाज पूरी तरह ठप रहेगा।
विवाद की मुख्य वजह: 'राजस्व कर्मचारी से कराया चाय-पानी का काम'
उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ द्वारा जारी आधिकारिक मांग पत्र में एसडीएम सदर पर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए गए हैं। संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि लेखपाल साथी आशुतोष कुशवाहा को एसडीएम कार्यालय से संबद्ध (अटैच) किया गया था। लेकिन, उनसे उनके मूल राजस्व और प्रशासनिक दायित्वों को कराने के बजाय, एसडीएम कार्यालय में चाय-पानी की व्यवस्था देखने और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों वाले कार्य कराए गए।
संघ का दावा है कि एक सम्मानित राजस्व कर्मचारी से इस तरह का काम कराना सेवा नियमावली और उनके पद की गरिमा के खिलाफ है। इस घटना की जानकारी जैसे ही अन्य लेखपालों को हुई, तहसील परिसर में आक्रोश की चिंगारी भड़क उठी। लेखपालों का कहना है कि यह एक कर्मचारी का नहीं बल्कि पूरे लेखपाल संवर्ग की जलालत और अपमान है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वार्ता के दौरान धमकी और अभद्र भाषा का आरोप
धरने पर बैठे लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि विवाद को सुलझाने के लिए जब पूर्व में वार्ता की कोशिश की गई, तो ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/एसडीएम अनुभव सिंह ने प्रशासनिक हनक दिखाते हुए बेहद अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया। आरोप है कि लेखपालों की बात सुनने के बजाय उन्हें सस्पेंशन और कानूनी कार्रवाई की धमकियां देकर दबाने का प्रयास किया गया। संघ का कहना है कि उच्चाधिकारियों का ऐसा तानाशाही रवैया कार्य वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रहा है, जिसके कारण मानसिक तनाव में काम करना नामुमकिन हो गया है। हालांकि, लेखपालों के इन गंभीर आरोपों पर प्रशासनिक अमले या खुद एसडीएम की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
इमरजेंसी मीटिंग में फैसला: 'आर-पार का आंदोलन, प्रदेश स्तर तक जाएगी लड़ाई'
विवाद बढ़ता देख लेखपाल संघ की एक आपातकालीन (Emergency) बैठक बुलाई गई, जिसमें सर्वсоеди से निर्णय लिया गया कि अब बिना प्रशासनिक कार्रवाई के धरना समाप्त नहीं होगा। लेखपालों ने तहसील परिसर में ही दरी बिछाकर अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार और धरना शुरू कर दिया है।
संघ के अध्यक्ष और सचिव ने मीडिया से बात करते हुए चेतावनी दी है कि सम्मान के साथ कार्य करना उनका संवैधानिक अधिकार है। यदि शासन और जिला प्रशासन ने उनकी जायज मांगों पर जल्द विचार नहीं किया और एसडीएम अनुभव सिंह के खिलाफ हटाने की कार्रवाई नहीं की, तो इस आंदोलन को कानपुर नगर से उठाकर पूरे उत्तर प्रदेश के स्तर पर ले जाया जाएगा। यदि ऐसा होता है, तो पूरे प्रदेश का राजस्व कार्य, जाति-आय-निवास प्रमाण पत्र और जमीनी पैमाइश जैसे महत्वपूर्ण काम पूरी तरह ठप हो जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।


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