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15/07/2020

सिख नर संहार 1984 के मामले पर गंभीर नहीं-राज्य सरकार



नपुर। अखिल भारतीय दंगा पीड़ित राहत कमेटी 1984 की   आयोजित हुई वर्चुअल मीटिंग में SIT कानपुर और प्रशासनिक ढुलमुल रवैया को लेकर रोष व्यक्त किया गया और कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुलदीप सिंह भोगलऔर राष्ट्रीय महासचिव  "सुरजीत सिंह ओबराय"ने साझा बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार नवम्बर 1984 के सिख नरसंहार के मामले को गंभीरता से नही ले रही है और न ही स्टेटस रिपोर्ट को माननीय सुप्रीम कोर्ट में भेज रही है जिसको लेकर सिख समाज मे रोष है मीटिंग में तय किया गया कि जिस प्रकार दिल्ली में सड़कों से लेकर संसद तक संघर्ष किया गया और  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में दिल्ली के दोषियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजा गया उसी प्रकार कानपुर में भी सिख नरसंहार को 35 साल बीत गए इंसाफ मांगते हुए और पिछले एक वर्ष में कानपुर SIT ने भी कुछ नही किया लेकिन अब 15 दिनों के अंदर ही कोरोना की परिस्थितियों को मद्देनजर रखते हुए शान्ति मय तरीके से धरना दिया जाएगा और राज्य सरकार की आंख कान खोले जाएंगे

हम 35 लोग 35 साल का हिसाब मांगेंगे इसके साथ ही कमेटी ने अपने कार्यो में तेजी लाने के लिये शकुलवन्त सिंह खालसा  को   सर्व सम्मति से कमेटी  का मुख्य सलाहकार मनोनीत किया गया है

 उनकी सलाह अनुरूप ही कमेटी के सदस्य जल्द ही मुख्यमंत्री याेगी आदित्य नाथ से मुलाकात करेंगे और अपनी चिंताओं की उनके समक्ष रखेंगे 

 कमेटी के रास्ट्रीय अध्यक्ष  कुलदीप सिंह भोगल ने बताया कि कमेटी ने केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाहसे मिलने का टाइम मांगा है जो अभी नही मिल पाया है लेकिन  आशा है जल्द ही उनसे मिल कर सारी स्थितियों से अवगत कराया जाएगा!! इसके साथ ही कमेटी ने समस्त गुरु घर नाम लेवा सिंह सभाओं और जत्थेबंदियों से अपील किया  कि अपने सारे आपसी मतभेद भुला कर साथ मे सामने आए और दोषियों को सलाखों के पीछे भिजवाए साथ ही गवाहों से भी अपील की है कि जो कानपुर में है या अन्य राज्यों में है वो भी सामने आए उन्हें कानपुर प्रशासन द्वारा पूरी सुरक्षा प्रदान की जाएगी । इसके साथ सभी धर्मों से अपील की गई कि हमारे जिन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को अग्नि भेंट किया गया उसमे सभी धर्मों के भक्तों की वाणी है साथ ही नवम्बर 1984 में हमारी माताओं और बहनों को भी जिन्होंने जिन्दा जलाया उन दोषियों को जेल की सलाखों में पीछे भेजना हमारा फर्ज बनता है।


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