लखनऊ विश्वविद्यालय में सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी का एक ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया. इस दौरान उन्होंने नई शिक्षा नीति के बारे में बताया. इसके साथ ही नए संस्थान 'इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मोलेकुलर जेनेटिक्स एंड इन्फेक्शियस डिसीजेस' के लैब के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की.
लखनऊ: देश में लागू हुई नई शिक्षा नीति पर एलयू में डॉक्टर सुधांशु त्रिवेदी का एक ऑनलाइन व्याख्यान का आयोजन किया. इसमें विवि के कुलपति प्रो. आलोक कुमार राय ने सांसद का स्वागत किया. कुलपति ने सुधांशु त्रिवेदी को लखनऊ विश्वविद्यालय के पिछले कुछ महीनों के कार्यों और कोरोना महामारी के दौरान उठाए गए एकेडमिक सामाजिक गतिविधियों से अवगत करवाया. इस दौरान डॉ. त्रिवेदी ने विश्वविद्यालय के साथ अपने संबंधों को याद किया.
सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि एनईपी 2020 पूरे देश के प्रतिनिधियों के परामर्श और सुझावों के एक बड़े पैमाने पर ड्राइव का परिणाम है. इसमें 676 जिले, 6600 ब्लॉक और लगभग 2.5 लाख गांव शामिल हैं. इसका उद्देश्य बेहतर शोध के साथ-साथ ग्रास-रूट लेवल में बच्चों को अध्ययन में रुचि के प्रति प्रेरित करना है.
NEP 2020 का मूल्य उद्देश्य छात्रों का व्यक्तित्व विकास है, जो 5 + 3 + 3 + 4 मॉडल के पहले पांच वर्षों के दौरान परीक्षाओं में उत्तीर्ण होने या असफल होने के डर से रहित है. उन्होंने कहा कि पहली बार इस पहले चरण में आदिवासी स्कूलों, आंगनबाड़ी स्कूलों और अन्य छोटे पैमाने के स्कूलों को एक छत के नीचे एकीकृत किया जाएगा. अगले दो (3+3) चरणों में छात्र अपने कौशल को निखारेंगे. वहीं दुनिया में विकसित होने वाली नई तकनीकों और पर्यावरणीय जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता का विकास करेंगे.
उन्होंने अंतिम चरण के महत्व के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करता है कि छात्र को 'फ्लेक्सिबिलिटी' दी जा रही है कि वह अपनी जीवन और अपने कैरियर की जरूरतों के हिसाब से इस चरण पर एक प्रमाण पत्र, डिप्लोमा या एक डिग्री प्राप्त कर सकते हैं.
यूनिवर्सिटी लखनऊ मीडिया प्रभारी दुर्गेश ने जानकारी देते बताया कि डॉक्टर त्रिवेदी ने आयोजन में संबोधित करते हुए बताया कि कैसे NEP-2020 विभिन्न धाराओं के बीच मौजूदा विभाजन को हटा रहा है और एक धारा से दूसरी धारा में स्विच करने के स्कोप को बढ़ा रहा है. उन्होंने हर साल बेहतर प्रदर्शन करने वाले संस्थानों को "क्रमिक स्वायत्तता" देने की बात कही और संस्थानों के भीतर शिक्षकों की भर्ती से संबंधित नियमों का मानकीकरण को भी एनईपी 2020 का भाग बताया. उन्होंने कहा कि NEP-2020 दुनिया के सबसे अच्छे विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर काम करने का भारत के विश्वविद्यालयों के लिए अवसर लाता है.
डॉ. त्रिवेदी ने सेवानिवृत्त और अनुभवी शिक्षकों को नए और उभरते शिक्षा संस्थानों के मार्गदर्शक के रूप में कार्यरत करने की योजना की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि प्रिंसटन विश्वविद्यालय की तरह नई शिक्षा नीति एक “आइडिया बैंक” के विकास की दिशा में काम करेगी. जहां ऐसे विद्वानों के आदर्श उत्पादन को संग्रहीत किया जा सकेगा. उन्होंने NEP 2020 के भारत की अनेक मातृभाषाओं के वक्ताओं में इनके प्रति गर्व की भावना विकसित करने और क्षेत्रीय भाषाओं को दिए जाने वाले महत्व पर भी प्रकाश डाला. अंत में डॉ. त्रिवेदी ने सांसद निधि के तहत एक नए संस्थान 'इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड मोलेकुलर जेनेटिक्स एंड इन्फेक्शियस डिसीजेस' के लैब के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की.

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