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29/08/2020

कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्रों ने निभाई अहम भूमिका



  • उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने बताया कि प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा स्थानीय तकनीकी एवं उन्नत बीजों की उपलब्धता उपलब्ध कराई जा रही है


कानपुर। रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी के शैक्षणिक और प्रशासनिक भवन के ऑनलाइन उद्घाटन अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि कोरोना महामारी काल में भी कृषि विश्वविद्यालय एवं कृषि विज्ञान केंद्रों ने अहम भूमिका निभाई है। जिसके फलस्वरूप विगत वर्ष की अपेक्षा खरीफ 2020 में 13 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में अधिक बुआई संपन्न हुई है उन्होंने बताया कि दस हजार कृषक उत्पादन संगठन समूह के माध्यम से किसानों के उत्पादन एवं विपणन की समस्याओं का समाधान हो सकेगा। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी ने बताया कि प्रदेश के कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा स्थानीय तकनीकी एवं उन्नत बीजों की उपलब्धता उपलब्ध कराई जा रही है प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में अब तक 2 लाख 20 हजार हेक्टेयर से अधिक सिंचन क्षमता पैदा की गई है गो आधारित कृषि/ जैविक खेती को भी बढ़ावा देने का कार्य कृषि विज्ञान केंद्रों के द्वारा किया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना पूरे उत्तर प्रदेश में पूरी तरह अंगीकृत किया जाएगा। माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा रानी लक्ष्मी बाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय झांसी को राष्ट्र के नाम समर्पित किया गया। इस अवसर पर माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा बीएससी (कृषि) एवं एमएससी कृषि के विभिन्न 22 प्रदेशों के छात्र-छात्राओं से वार्ता भी की गई। और बताया कि आत्म निर्भर भारत  के अंतर्गत एक लाख करोड़ के विशेष फंड से बीज से बाजार तक की व्यवस्था कृषक उत्पादन संगठन समूह एवं स्टार्टअप के माध्यम से साकार होगी। 2014 के पूर्व तक पूरे भारत में एक केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना हुई थी। जो कि वर्तमान में तीन केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय स्थापित हो चुके हैं। प्रधानमंत्री जी ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों को बधाई दी कि टिड्डी दल के हमले से किसानों की फसलों के बचाव में वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही है। इस कार्यक्रम में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर डी.आर. सिंह सहित विश्वविद्यालय के सभी शिक्षक/ वैज्ञानिक एवं अधिकारियों ने भाग लिया।  जबकि विश्वविद्यालय के अधीन सभी कृषि विज्ञान केंद्रों में 293 प्रगतिशील किसानों को भी जोड़ा गया सभी 13 कृषि विज्ञान केंद्रों पर 15 से 20 प्रगतिशील किसानों के समूह को कार्यक्रम का सजीव प्रसारण दिखाया गया।

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