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25/08/2020

विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया शुभारंभ



  • ऑनलाइन के माध्यम से कार्यक्रम के में 312 शोध छात्रों शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा भाग लिया गया।


कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कानपुर द्वारा कास्ट -एनसी परियोजना अंतर्गत "संरक्षित ढांचो में सब्जी फसलों का गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन" विषय पर पांच दिवसीय (24 से 28 अगस्त) ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम में विख्यात वक्ता डॉ बलराज सिंह पूर्व कुलपति जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय राजस्थान द्वारा सब्जी फसलों में परागण प्रबंधन पर अपना व्याख्यान देते हुए कहा कि मधुमक्खियों के द्वारा लगभग 70% तक परागण की क्रिया निष्पादित होती है। तथा मधुमक्खिया परागण के उपरांत विभिन्न फसलों में 33% से लेकर 234 % तक उत्पादन में वृद्धि रिपोर्ट की गई है। डॉक्टर सिंह द्वारा कहा गया की संरक्षित ढांचों में परागण क्रिया एक अत्यंत महत्वपूर्ण क्रिया है। जिसके द्वारा बहुत सी सब्जी फसलों में गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन संभव हो पाता है उन्होंने यह भी बताया कि अनुवांशिक शुद्धता के लिए सभी संभव प्रयासो का समन्वित प्रयोग किया जाना चाहिए। कार्यक्रम में डॉ बीएस तोमर अध्यक्ष सब्जी अनुभाग भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली द्वारा लता वर्गी फसलों में प्रजाति एवं संकर बीज उत्पादन विषय पर अपना व्याख्यान दिया। डॉक्टर तोमर द्वारा कहा गया कि अच्छा बीज प्राप्त करने के लिए स्वस्थ नर्सरी तैयार करना उचित संरक्षित ढांचों का चयन, पृथक्करण, जल एवं पोषक तत्व प्रबंधन, कैनोपी प्रबंधन, अनुवांशिक शुद्धता आदि बिंदुओं पर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि लता वर्गीय फसलों से जायद तथा खरीफ दोनों मौसम में बीज उत्पादन का कार्यक्रम सफल रूप से किया जा सकता है। डॉ तोमर द्वारा यह भी बताया गया कि लता वर्गीय जैसे लौकी, तरोई, करेला, कद्दू आदि का बीज उत्पादन लो टनल तकनीकी के साथ- साथ कीट औरोधी नेट हाउस, प्राकृतिक वायु समवाहित, पाली हाउस मे भी गुणवत्ता युक्त बीच कार्यक्रम किया जा सकता है। यदि किसान भाई खुले खेत में लता वर्गी फसलों का बीज उत्पादन कर रहे हैं। तो बरसात के मौसम में मचान अथवा बावर सिस्टम को अवश्य अपनाएं ताकि स्वस्थ बीज उत्पादन की प्रक्रिया संभव हो सके। कार्यक्रम में प्रख्यात वैज्ञानिक का स्वागत करते हुए निदेशक शोध डॉ एचजी प्रकाश द्वारा कहा गया कि इस कार्यक्रम में के माध्यम से संरक्षित ढांचों के अंतर्गत गुणवत्ता युक्त बीज उत्पादन की तकनीकों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाया जाएगा। ताकि बीज प्रतिस्थापन दर को बढ़ाया जा सके। कार्यक्रम के आयोजक डॉ डीपी सिंह द्वारा धन्यवाद ज्ञापित किया गया तथा बताया कि ऑनलाइन के माध्यम से कार्यक्रम के में 312 शोध छात्रों शिक्षकों एवं वैज्ञानिकों द्वारा भाग लिया गया। कार्यक्रम में डॉ. राजीव, संजीव त्रिपाठी, सौरभ तोमर, विवेक कनौजिया, डॉ. आनंद श्रीवास्तव आदि लोगों ने भाग लिया कार्यक्रम का संचालन डॉक्टर राजीव  द्वारा किया गया।

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