यादें हुसैन ज़िक्र शाहिदाने कर्बला अजमते सहाबा कॉन्फ्रेंस की गई मुनक्कित - NINE ONE TIMES

निर्भीक आवाज़, निष्पक्ष खबर

Breaking

22/08/2020

यादें हुसैन ज़िक्र शाहिदाने कर्बला अजमते सहाबा कॉन्फ्रेंस की गई मुनक्कित



  • मुहर्रम के मौके पर यादे हुसैन-जिक्र ए शाहिदाने कर्बला मना कर अहले बैत से मोहब्बत का सबूत देना ये सराहनीय है। लेकिन अजमत ए सहाबा को नहीं भुलाया जा सकता और ना ही अहले बैत की मोहब्बत में सहाबा की ताजीम में कमी की जा सकती है


कानपुर : मदरसा तालिमुल कुरान अहले सुन्नत 22 ब्लॉक जुही लाल कॉलोनी कानपुर नगर में कोविड-19 अनलाॅक की गाइड लाईन व सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुए सब को सेनेटाइज करने के बाद तन्जीम बरैलवी ओलमा ए अहले सुन्नत के बैनर तले यादें हुसैन ज़िक्र शाहिदाने कर्बला व अजमते सहाबा कॉन्फ्रेंस मुनक्कित की गई। इस जलसे का आगाज़ हाफ़िज़ हारून साहब ने तिलावत ए रब्बानी से किया। जलसे की अध्यक्षता हाफ़िज़ सय्यद फैसल जाफरी व सरपरस्ती हाफ़िज़ व कारी शब्बीर हुसैन बरकाती साहब ने किया। जलसे में नात रसूल वारिस चिश्ती ने और मनकबत ए हुसैन हाफ़िज़ हारून साहब ने पेश किया। जलसे में तन्जीम के महासचिव हज़रत अल्लामा मौलाना मुफ़्ती #क़ाजिमरज़ाखान_ओवैसी साहब ने कहा कि कत्ल-ए-हुसैन असल में मार्ग-ए-यजीद है, इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद। मुहर्रम के मौके पर यादे हुसैन-जिक्र ए शाहिदाने कर्बला मना कर अहले बैत से मोहब्बत का सबूत देना ये सराहनीय है। लेकिन अजमत ए सहाबा को नहीं भुलाया जा सकता और ना ही अहले बैत की मोहब्बत में सहाबा की ताजीम में कमी की जा सकती है। बल्कि हज़रत ए अमीर माविया (र) एक जलील उर कद्र सहाबी ए रसूल हैं। मरदूद यजीद पलीद नालती जहन्नुमी है। तथा मुफ्ती साहब ने इमामे हुसैन की जिदगी के बारे में लोगों को विस्तार से बताते हुए कहा कि इमामे हुसैन ने इस्लाम को बचाने के लिए कर्बला के मैदान में 10वीं मुहर्रम 61 हिजरी को शहीद हो गए और इस्लाम को यजीदियों के हाथों से बचा लिया।


इमाम हुसैन ने अपने नाना हजरत मोहम्मद (स) की उम्मत को बचाने के लिए यजीद से बैअत करना गवारा नहीं किया और जंग के लिए राजी हो गए। एक तरफ उनके कुनबे के कुल 72 लोग थे और दूसरी तरफ हजारों की तादाद में यजीदी फौज थी। यह जंग सच्चाई, हकपरस्ती और अल्लाह की रजा के लिये लड़ी गई थी। यह जंग यजीद के आतंक, झूठ और मक्कारी के खिलाफ थी। इमाम हुसैन (अ) ने दीने हक को बचाने के लिए अपने कुनबे को कुर्बान कर दिया। मुसलमानों को चाहिए कि वह सिर्फ नारा नहीं लगाएं बल्कि इमाम हुसैन के रास्ते को अपनाएं। अपने बच्चे को भी इसकी शिक्षा दें, ताकि वे इस्लाम की सही शिक्षा लेकर आगे चलकर अपने देश व अपने शहर व इलाकों का नाम रौशन करे और पूरी दुनियां में अमन चैन भाईचारा का पैगाम दे। उवैसी ने कहा कि अल्लाह के रसूल (स) ने इरशाद फरमाया है कि सच्चा मोमिन वो नहीं जो दौलत, रुतबा व शोहरत वाला हो, बल्कि सच्चा मोमिन वो है जो अल्लाह से ज्यादा डरता हो और अहलेबैत से मोहब्बत करता हो सहाबा को मानने वाला हो। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने ये शिक्षा दी है कि कैदियों के साथ अच्छा सुलूक करो, मुसाफिर की मदद करो, यतीमों व जरूरतमंद की मदद करो, भूखे को खाना खिलाओ और हक के साथ खड़े रहो। वहीं उवैसी ने कहा मुसलमान को चाहिऐ कि वो इमामे हुसैन की सीरत को पढ़े, उस पर अमल करे। यजीद जैसा कोई काम न करें, नाच गानों से दूर रहें। प्रोग्राम के आखिर में सलातो सलाम व देश की उन्नति, अमन शांति व भाईचारे की दुआ के साथ कोरोना वायरस से निजात की ख़ास दुआ की गई और हज़रत इमाम हुसैन की मोहब्बत में लंगर/श्रीनी खिलाया गया। इस मौके पर हाफ़िज़ सय्यद फैसल जाफरी, हाफ़िज़ शब्बीर हुसैन बरकाती, मुफ्ती क़ाजिम रज़ा खान ओवैसी, हाफ़िज़ हारून, वारिस चिश्ती अब्दुर्रज्जाक, इजहार आलम बरकाती, अब्दुर्रहमान, जावेद उवैसी, नायाब जाफरी, मोहम्मद इमरान खान छन्गा पठान आदि मात्र 11 लोग कोरोना वायरस के कारण बहुत ही चुनिंदा लोग मौजूद थे।


No comments:

Post a Comment

Featured Post

लखनऊ अग्निकांड में साजिश की बू! बेघर महिलाओं का बड़ा आरोप— "हादसा नहीं, साजिश थी यह आग; खाली कराने के लिए जानबूझकर लगाई गई"

NINE ONE TIMES झूठ फैला रहा मीडिया? झोपड़पट्टी की महिलाओं ने 'सिलेंडर ब्लास्ट' की थ्योरी को नकारा; कहा— "आग लगने के बाद फटे सिल...

खबर को दोस्तों के साथ शेयर करें:

Post Bottom Ad

Responsive Ads Here

Pages