- लेकिन कुछ वर्षों बाद नजफगढ़ गांव के पुरानी धरोहर को सरकार ने अपने आधीन कर लिया जिससे वह पुरातत्व विभाग ने अपने आधीन कर लिया लेकिन प्राचीन मंदिरों व पुरानी धरोहर को पुरातत्व विभाग की ओर से कोई सहायता नही मिल पा रही है
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से करीब 30 किलो० दूर शहर से सटे मां गंगा के तट पर बसे नजफगढ़ गांव के इतिहास के बारे में जानते है। सन 1766 से पहले नजफगढ़ गांव का कोई अस्तित्व नही था इस दौर के मुगल बादशाह शाह आलम ने अपने सरदार नजफ खान को यह गांव इनाम के रूप में दे दिया था। नजफ खान ने नवाब की उपाधि धारण की और इस गांव के आसपास किले का निर्माण कराया। उसके बाद इस क्षेत्र का नाम नजफगढ़ के रूप में चर्चित हो गया। सन 1803 में नजफगढ़ गांव से जुड़े आसपास के क्षेत्रों में नील और कपास की खेती होती थी यह नजफगढ़ का स्वर्णिम दौर था नील कारखानों के लिए यहां 48 कुआं तथा 330 हौजों का निर्माण कराया गया। नजफगढ़ गांव के दक्षिणी दिशा में आज भी नील कारखाने की कोठी हैं। नजफगढ़ गांव में ही कोर्ट कचहरी है जिसमें ब्रिटिश न्यायधीश बैठकर सत्य और झूठ का फैसला किया करते थे जो पूरी तरह से अब जर्जर व धराशाही कगार पर है।
ब्रिटिश अधिकारी क्लाड मार्टिन का संक्षिप्त परिचय :
नजफगढ़ को एक बड़े व्यापारिक केन्द्र मे तबदील करने वाले क्लाड मार्टिन मूल रूप से फ़्रान्सीसी थे। क्लाड मार्टिन फ़्रान्स के लियोन शहर मे जन्म हुआ था। जब अंग्रेजो और फ़्रान्सिसियो के बीच पान्डुचेरी की संधि हो गयी तो क्लाड मार्टिन ने ब्रिटिश आर्मी भर्ती हो गए और उन्हें मेजर जनरल का पद मिला। महात्वाकाक्षी और बहुमुखी प्रतिभा के धनी क्लॉड मार्टिन इसके बाद अवध के नवाब आसुफुद्दौला के साथ काम करने लगे। उन्होने नवाब की सेना को प्रशिक्षण दिया और उस दौर मे लखनऊ मे बनी इमारतो के वास्तु पर भी उनका असर दिखाई देता है। इस दौरान मार्टिन ने बहुत दौलत कमाया उसने लखनऊज़ कोलकाता और कानपुर मे सम्पति बनाई।
नजफगढ़ गांव में विशिष्ट शैली के मन्दिर स्थापित :
नजफगढ गांव में आज से करीब तीन सौ वर्ष पहले 10 से 20 प्राचीन मंदिर स्थापित हुये थे। इन मंदिरो मे एक शिखर वाली नगर शैली, गुंबद वाली डोम शैली और शंखाकार विमान शैली के दर्शन होते है। दीवारो पर कुछ तस्वीरे मिलती है जिनसे लगता है कि यह प्राचीन मंदिर हैं। लेकिन कुछ वर्षों बाद नजफगढ़ गांव के पुरानी धरोहर को सरकार ने अपने आधीन कर लिया जिससे वह पुरातत्व विभाग ने अपने आधीन कर लिया लेकिन प्राचीन मंदिरों व पुरानी धरोहर को पुरातत्व विभाग की ओर से कोई सहायता नही मिल पा रही है जिससे पुराने व जर्जर हो रहे प्राचीन मंदिरों का फिर से निर्माण हो सके ताकि वह फिर से सुंदर व स्वच्छ दिखाई दे और हम लोग प्राचीन धरोहर को बचा सके।

No comments:
Post a Comment