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21/05/2020

केले के स्वाद,पोषक तत्व और चिकित्सीय गुणों के कारण यह पूरे वर्ष उपलब्ध रहता है- डॉ. सिंह


कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कानपुर के साग -भाजी अनुभाग कल्याणपुर के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. आर. बी. सिंह ने किसान भाइयों को केले की फसल के बारे में सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जनपद कानपुर नगर में केले की खेती लगभग 400 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है जनपद में केले की खेती का सर्वाधिक क्षेत्रफल भीतरगांव विकासखंड में है। केले के स्वाद,पोषक तत्व और चिकित्सीय गुणों के कारण यह लगभग पूरे वर्ष उपलब्ध रहता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट्स और विटामिन विशेष कर विटामिन बी का स्रोत है केला दिल की बीमारियों के खतरे को कम करने में सहायक है इसके अलावा गठिया ,अल्सर और किडनी के विकारों से संबंधित रोगियों के लिए इसकी सिफारिश की जाती है डॉ.सिंह ने बताया कि केले के विभिन्न तरह के उत्पाद बनाए जाते हैं जैसे चिप्स, केला फ्यूरी, जैम जेली, जूस आदि तैयार किए जाते हैं। केले की फसल के प्रबंधन के बारे में डॉक्टर सिंह ने किसान भाइयों को बताया कि इस फसल में कई रोग कवक एवं विषाणु के द्वारा लगते हैं जैसे एंथ्रेक्नोज और तना गलन आदि रोग लगते हैं इन रोगों की रोकथाम के लिए कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 0.3% का छिड़काव करना चाहिए। डॉ सिंह ने बताया कि केले की फसल में  कीड़े भी लगते हैं जैसे तना बीटील, पत्ती बीटल आदि इनका नियंत्रण मिथाइल ओ डिमैटऑन 25 ईसी 1.25 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करना चाहिए केले की फसल में सिंचाई प्रबंधन के लिए उन्होंने बताया कि यह फसल ज्यादा पानी चाहने वाली फसल है केले का एक पूर्ण विकसित पौधा 1 दिन में लगभग 12 से 15 लीटर पानी की आवश्यकता होती है डॉ सिंह ने बताया कि केले की फसल में टपक सिंचाई सर्वोत्तम होती है और टपक सिंचाई से लगभग 56% पानी की बचत होती है तथा 23 से 32% उपज में वृद्धि होती है इस समय किसान भाई केले की फसल में प्रति पौधा लगभग 100 ग्राम नाइट्रोजन का प्रयोग करें जिससे फसल का अच्छा उत्पादन होगा।      


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