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14/05/2020

पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए करें उचित देखभाल


कानपुर। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय मौसम में आए बदलाव से पशु दबाव की स्थिति में आ जाते हैं। इस दबाव की स्थिति में पशुओं की पाचन प्रणाली और दुग्ध उत्पादन क्षमता पर उल्टा प्रभाव पड़ता है। इससे पशुओं की उत्पादन तथा प्रजनन क्षमता में भी गिरावट आ जाती है। ऐसे में पशुओं की उचित देखभाल बहुत ही आवश्यक हो जाती है। पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर रामजी गुप्ता ने पशुपालक भाइयों को बताया मौसम में अचानक बदलाव हो रहा है मौसम में अचानक परिवर्तन होने से पशु अपने आप को बदलते मौसम के अनुरूप ढाल नहीं पाता, जिसके कारण उनका दूध उत्पादन कम हो जाता है, साथ ही पशु के  प्रजनन एवं स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। डॉ गुप्ता ने पशुपालक को बताया की भैंसो में प्रजनन का कार्य सुचारू रूप से करना है, तो उनको रात में चराई के लिए भेजना सर्वाधिक उपयुक्त रहेगा। साथ ही दिन में चराई करने पर उनके नहाने के लिए तालाबो में नहलाये। उन्होंने कहा कि पशुओं को किसी बाड़े में रखते हैं तो उन पर जूट  के पुराने बोरों  के परदे अवश्य लगाएं एवं उन पर पानी का छिड़काव करते  रहे, जिससे उस  बाड़े का तापमान कम बना रहे और ठंडक बनी रहे। इन गर्मी के दिनों में हरे चारे की कमी नहीं  होनी चाहिए। संकर नस्ल के पशुओं पर पानी का फुहारा अथवा पंखा चलाना लाभदायक रहेगा, क्योंकि गर्मी बढ़ने के साथ ही उनमें  दूध उत्पादन कम होने की समस्या देखने को मिलती है। इसके साथ  इसके लिए आवश्यक है कि पशुपालक भाई अपने खेतों पर  चारे की हरी फसलों के लिए एमपी चरी, मक्का एवं बाजरा आदि अदलहनी चारे के साथ ही साथ लोबिया जैसे दलहनी चारों का भी उत्पादन करें। दुधारू पशुओं को यह दलहनी और अदलहनी चारा मिला करके देते हैं, तो उन में दूध की मात्रा बढ़ती है। यदि हरे चारे की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध नहीं हो पा रही है, तो किसान भाई ऐसे समय में भूसे में शीरा अथवा गुड़ का घोल  छिड़ककर पशुओं को दें, जिससे दुग्ध उत्पादन मे कमी  देखने को नही मिलती है। दुधारू पशुओं को दाना देने के लिए भैंसों को शरीर रक्षा अर्थात जीवन निर्वाह के लिए 1.5 किलोग्राम दाना एवं  दुग्ध उत्पादन के लिए प्रति लीटर दुग्ध पर 500 ग्राम दाना देना चाहिए। इसके अतिरिक्त  दुधारू पशुओं को दाने के साथ 50 से 60 ग्राम खनिज लवण एवं 40 ग्राम नमक प्रतिदिन अवश्य दें। पशुपालन एवं दुग्ध विज्ञान के विभागाध्यक्ष डॉ पीके उपाध्याय ने बताया कि अपने दुधारू पशुओं को अंतः परजीवी एवं बाह्य परजीवीयों से बचाने के लिए समय-समय पर अंतः कृमिनाशी दवा पशु चिकित्सक की सलाह से अवश्य दें। पशुशाला की खिड़कियां, दरवाजे तथा अन्य खुली जगहों पर जहां से तेज गरम हवा आती हो बोरी या टाट आदि टांगकर पानी का छिड़काव कर देना चाहिए। यह जानकारी मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने दी।

 

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