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26/05/2020

टिड्डी कीट से किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा: डॉ अभिमन्यु यादव


चौबेपुर ! दिलीपनगर कृषि विज्ञान केंद्र दिलीपनगर की ओर से फसलों को लगातार सुरक्षित रखने एवं किसानों को उनकी फसलों के प्रति जागरूक करने के लिए समय समय पर आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए जा रहे हैं ! इसी क्रम में इस समय मौसम के हालात को देखते हुए यहां के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ अभिमन्यु यादव ने किसानों को टिड्डी नामक कीट से आगाह किया और किसानों को बताया कि इस कीट दल के फैलने से फसलों को भारी मात्रा में नुकसान होने की संभावना है एवं इससे बचने के लिए कुछ उपाय हैं , जिनके माध्यम से किसान अपनी फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं।सभी किसान भाइयों को सूचित किया जाता है कि जनपद कानपुर व आसपास के जनपदों में भी  टिड्डी दल के आक्रमण का खतरा मंडरा रहा है।  टिड्डी दल राजस्थान से मध्य प्रदेश होते हुए उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में प्रवेश हो चुका है। फिर हाल झांसी में इनके आक्रमण की सूचना प्राप्त हुई है। टिड्डी दल में करोड़ों की संख्या में लगभग दो ढाई इंच लंबे कीट होते हैं। जो फसलों को कुछ ही घंटों में चट कर जाते हैं।  यह सभी प्रकार के हरे पत्तों पर आक्रमण करते हैं। ये टिड्डी दल किसी क्षेत्र में शाम 6 से 8 बजे के आसपास पहुँचकर जमीन पर बैठ जाते हैं। वहीं पर रात भर फसलों को नुकसान पहुँचाते हैं। और फिर सुबह 8 -9 बजे के करीब उड़ान भरते हैं। टिड्डी दल फसलों एवं समस्त वनस्पति को खा कर चट कर देता है। इनको उस क्षेत्र से हटाने या भगाने के लिए ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से भोर का समय उपयुक्त होता है। 

 किसान भाइयों को सलाह है कि ध्वनि विस्तारक यंत्रों के माध्यम से आवाज कर उनकों अपने खेत पर बैठने न दें ।  अपने खेतों में आग जलाकर, पटाखे फोड़ कर, थाली बजाकर, ढोल नगाड़े बजाकर आवाज करें, ट्रैक्टर के साइलेसंर को निकाल कर भी तेज ध्वनि कर सकते हैं। इसके अलावा खेतों में कल्टीवेटर या रोटावेटर चलाकर के टिड्डी को तथा उनके अंडों को नष्ट किया जा सकता है। इन्हें रात्रि में प्रकाश प्रपंच के माध्यम से एकत्रित करके प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।

 यह टिड्डी दल शाम को 6 से 7 बजे के आसपास जमीन पर बैठ जाता है और फिर सुबह 8 -9 बजे के करीब उड़ान भरता है। अतः इसी अवधि में इनके ऊपर कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव करके इनको मारा जा सकता है। टिड्डी की नियंत्रण हेतु बेन्डियोकार्ब 80 % 125 ग्राम या क्लोरपाइरीफास 20 % ईसी 1200 मिली या क्लोरपाइरीफास 50 % ईसी 480 मिली या डेल्टामेथरिन 2.8 % ईसी 625 मिली या डेल्टामेथरिन 1.25 % एस. सी. 1400 मिली या डाईफ्लूबेनज्यूरॉन 25 % डब्ल्यूपी 120 ग्राम या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 5 % ईसी 400 मिली या लैम्ब्डा-साईहेलोथ्रिन 10 % डब्ल्यूपी 200 ग्राम प्रति हैक्टेयर कीटनाकों का उपयोग किया जा सकता है। या मेलाथियान 5 % डिपी की 25 किलो मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें। अथवा कृषि विभाग की कृषि रक्षा इकाइयों में उपलब्ध उचित रसायन या साधन का उपयोग करें। यदि आपके क्षेत्र में टिड्डी दल दिखाई देता है तो उपरोक्त उपाय को अपनाते हुए तत्काल अपने क्षेत्र के कृषि विभाग के अधिकारियों व प्राविधिक सहायकों / सलाहकारों अथवा कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों से संपर्क करें।   

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