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10/10/2022

संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन से कानपुर भी दुखी


संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन से कानपुर भी दुखी

कुछ नेताओं पर मुलायम सिंह यादव का दिखा विशेष स्नेह 

कानपुर। पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के निधन से कानपुर भी दुखी है. समाजवादी पार्टी की स्थापना से लेकर उसके शिखर तक पहुंचने तक कानपुर ही एक ऐसा शहर रहा, जिससे नेताजी को कभी शिकायत भी रही, तो कभी मुस्कुराती आंखों से इस शहर की ​फिजा को समझते हुए स्थानीय कार्यकर्ताओं को सीख दी. यहां के कुछ नेताओं पर मुलायम सिंह यादव का विशेष स्नेह दिखा.

मुलायम सिंह यादव के निधन से न केवल समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता निराश दिखे, बल्कि हर वह शख्स उदास नजर आया, जो नेताजी से किसी न किसी बहाने मिला जरूर. समाजवादी पार्टी के कई नेता बताते हैं कि मुलायम सिंह यादव, कार्यकर्ता को सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण मानते थे, अगर किसी बात पर नाराजगी जताते थे तो अगले ही पल प्यार का एहसास भी जता जाते थे. यही वजह है कि कार्यकर्ता नेताजी की एक बात पर सड़क पर आ जाता था.

जब तक जिताओगे नहीं, तब तक देता रहूंगा टिकट

बात अगर चुनावों में टिकट देने की हो, तो नेताजी का सबसे ज्यादा स्नेह सुरेंद्र मोहन अग्रवाल पर दिखा. समाजवादी पार्टी ने सुरेंद्र मोहन अग्रवाल को विधानसभा से लेकर लोकसभा और स्थानीय निकाय चुनावों में मेयर का टिकट तक दिया. हालांकि, हर बार सुरेंद्र मोहन अग्रवाल के हाथों शिकस्त ही लगती. इसके बावजूद सुरेंद्र मोहन पर मुलायम सिंह यादव का भरोसा बना रहा. एक बार तो बाबूपुरवा में आयोजित जनसभा में मुलायम सिंह यादव ने यहां की जनता से दो टूक कह दिया कि जब तक वह सुरेंद्र मोहन को जिताएंगे नहीं, तब तक वह उन्हें टिकट देते रहेंगे. सपा सरकार में सुरेंद्र मोहन को दर्जा प्राप्त मंत्री भी बनाया. सुरेंद्र मोहन अग्रवाल बताते हैं कि वह नेताजी से 30 साल से जुड़े थे और बड़े-छोटे भाई जैसे संबंध थे. पहली बार 25 जुलाई 1993 में लाजपत भवन में व्यापारियों के सम्मेलन में नेताजी ने कहा था कि जैसे ही सरकार बनेगी सभी समस्याएं निस्तारित होंगी. उनकी बातों टेप कर ली थीं और सरकार बनते ही सबसे पहले नेताजी ने आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त कर दिया था

यही नहीं, मुलायम सिंह यादव ने मेहरबान सिंह का पुरवा को काफी मजबूत बनाया. शौर्य चक्र प्राप्त पूर्व सांसद चौधरी हरमोहन सिंह यादव और मुलायम सिंह यादव में हमेशा रायशुमारी होती रहती थी. सपा शासनकाल में स्व. हरमोहन सिंह यादव को मिनी मुख्यमंत्री तक कहा जाता था. मुलायम सिंह यादव अनेक बार मेहरबान सिंह का पुरवा आए. स्व. चौधरी हरमोहन सिंह यादव के पुत्र सुखराम सिंह यादव को विधान परिषद का सभापति बनाया. सपा से सुखराम राज्यसभा सदस्य भी बने.

यही नहीं, मुलायमत सिंह यादव की शिव कुमार बेरिया से काफी नजदीकी थी. वह अक्सर शिव कुमार बेरिया से संगठनात्मक चर्चा करते थे. खासतौर पर कानपुर देहात के इलाकों में उन्होंने बेरिया को काफी सक्रिय रखा.

चुनावों में कानपुर से समाजवादी पार्टी को पर्याप्त न मिलने की ​टीस भी मुलायम सिंह यादव के जुबां पर रही. एक बार जब सर्किट हाउस में उन्होंने छोटी से जनसभा की, तो इस बात पर नाराजगी जताई ​थी कि कानपुर ने उन्हें काफी ताकत प्रदान नहीं की. इस सभा में उन्होंने यहां तक कहा था कि चुनावों में कानपुर, समाजवादी पार्टी को नहीं जिताता है और तत्कालीन विधायक हाजी मुश्ताक सोलंकी की तरफ इशारा करते हुए उन्होंने कहा था कि जो एक विधायक जीतता है, वह भी दावा करता है कि वह अपने दम पर चुनाव जीतता है. मुलायम सिंह यादव का स्व. हाजी मुश्ताक सोलंकी से विशेष स्नेह कई बार दिखा. 

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