झूठ फैला रहा मीडिया? झोपड़पट्टी की महिलाओं ने 'सिलेंडर ब्लास्ट' की थ्योरी को नकारा; कहा— "आग लगने के बाद फटे सिलेंडर, पहले दी गई थी जलाने की धमकी"
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट
पीड़ितों के बड़े खुलासे:
- साजिश का आरोप: महिलाओं का दावा— 2-3 दिन पहले मड़ैया हटाने की धमकी मिली थी, न हटाने पर आग लगाने की बात कही गई थी।
- मीडिया पर गुस्सा: "सिलेंडर फटने से आग नहीं लगी, बल्कि आग लगने के बाद सिलेंडर फटे। मीडिया आधी-अधूरी और झूठी खबर दिखा रहा है।"
- नुकसान का आंकड़ा: स्थानीय लोगों के अनुसार 100-200 नहीं, बल्कि करीब 1500 झोपड़ियां जलकर खाक हुई हैं।
- गंभीर स्थिति: आग में कई लोगों के झुलसने और बच्चों के लापता होने की बात कही जा रही है।
ग्राउंड जीरो रिपोर्ट पीड़ितों के बड़े खुलासे:
- साजिश का आरोप: महिलाओं का दावा— 2-3 दिन पहले मड़ैया हटाने की धमकी मिली थी, न हटाने पर आग लगाने की बात कही गई थी।
- मीडिया पर गुस्सा: "सिलेंडर फटने से आग नहीं लगी, बल्कि आग लगने के बाद सिलेंडर फटे। मीडिया आधी-अधूरी और झूठी खबर दिखा रहा है।"
- नुकसान का आंकड़ा: स्थानीय लोगों के अनुसार 100-200 नहीं, बल्कि करीब 1500 झोपड़ियां जलकर खाक हुई हैं।
- गंभीर स्थिति: आग में कई लोगों के झुलसने और बच्चों के लापता होने की बात कही जा रही है।
विस्तृत खबर: ग्राउंड रिपोर्ट
लखनऊ। विकास नगर सेक्टर-12 में बुधवार शाम जो आग लगी, उसे लेकर अब सवालों का धुआं उठने लगा है। जहाँ कल से यह खबर चल रही है कि 100 सिलेंडर फटने से 1200 झोपड़ियां खाक हो गईं, वहीं आज '9वन टाइम्स' की टीम जब मौके पर पहुंची, तो पीड़ितों का गुस्सा सातवें आसमान पर था। यहाँ की महिलाओं ने जो आरोप लगाए हैं, वे प्रशासन और मुख्यधारा के मीडिया की थ्योरी को सीधे तौर पर चुनौती दे रहे हैं।
"हमें मड़ैया हटाने की धमकी मिली थी"
मौके पर मौजूद एक महिला ने कैमरे पर सुबकते हुए बताया, "यह आग लगी नहीं है, लगाई गई है। दो-तीन दिन पहले यहाँ लोग आए थे और कह रहे थे कि अपनी मड़ैया (झोपड़ी) यहाँ से हटा लो, नहीं तो हम आग लगा देंगे। हमने नहीं हटाई और देखिए कल आग लग गई।" महिला का दावा है कि जमीन खाली कराने का यह सबसे खौफनाक तरीका अपनाया गया है।
सिलेंडर ब्लास्ट पर बड़ा स्पष्टीकरण
मीडिया में चल रही 'सिलेंडर ब्लास्ट' की खबरों पर नाराजगी जताते हुए स्थानीय लोगों ने कहा, "मीडिया वाले झूठी खबर दिखा रहे हैं कि सिलेंडर फटने से आग लगी। भाई, जब आग लगेगी तो सिलेंडर तो फटेगा ही! इंसान अपनी जान बचाकर भागेगा या सामान देखेगा? आग पहले लगी, सिलेंडर बाद में फटे हैं।" लोगों का आरोप है कि घटना को 'हादसा' दिखाने के लिए सिलेंडर ब्लास्ट का बहाना बनाया जा रहा है।
1500 झोपड़ियां जलने का दावा
प्रशासनिक आंकड़ों में भले ही 50 या 1200 झोपड़ियों की बात कही जा रही हो, लेकिन ग्राउंड पर मौजूद महिलाओं का कहना है कि यहाँ कम से कम 1500 झोपड़ियां थीं, जिनमें से अब कुछ भी नहीं बचा। "सब कुछ जल गया, लोग झुलस गए, कइयों के हाथ-पैर जल गए हैं। कई बच्चे अभी तक नहीं मिल रहे हैं, उन्हें पुलिस और एम्बुलेंस लेकर गई है पर हमें कुछ पता नहीं चल रहा।"
यह मंजर दिल्ली के उत्तम नगर जैसे हादसों की याद दिला रहा है, जहाँ गरीबों की बस्तियों को उजाड़ने के लिए ऐसे 'अज्ञात' कारणों का सहारा लिया जाता है। फिलहाल, पीड़ितों के इन बयानों ने पुलिस और प्रशासन की जांच पर सवालिया निशान लगा दिया है।


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