- 15 सितंबर तक धर्मगुरु व धार्मिक स्थलों के प्रबंधन द्वारा क्षेत्रीय थाने पर जमा किया जाएगा। इसके बाद डीएम व एसएसपी द्वारा उनके साथ बैठक की जाएगी
कानपुर। कोरोना संक्रमण के कारण बंद चल रहे धार्मिक स्थलों को खोलने पर 15 सितंबर के बाद फैसला होगा। गुरुवार को कलेक्ट्रेट में हुई बैठक में धर्मगुरुओं ने फिलहाल धर्मस्थल न खोलने की बात कही। एडीएम सिटी ने उन्हें एक प्रोफार्मा देकर कोरोना संक्रमण से बचाव से जुड़ीं तैयारियां करने के लिए कहा। यह प्रोफार्मा 15 सितंबर तक धर्मगुरु व धार्मिक स्थलों के प्रबंधन द्वारा क्षेत्रीय थाने पर जमा किया जाएगा। इसके बाद डीएम व एसएसपी द्वारा उनके साथ बैठक की जाएगी। इसमें तय होगा कि आमजन के लिए धर्मस्थल कब से खुलेंगे।
पूर्व में हुई बैठक में धर्मगुरुओं ने 31 अगस्त तक धर्मस्थल न खोलने के लिए प्रशासन को आश्वस्त किया था। तब तत्कालीन डीएम ने कहा था कि पांच- पांच लोग एक साथ धर्मस्थल में प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन वहां कोरोना संक्रमण से बचाव का उपाय करना होगा, लेकिन सभी ने सर्वसम्मति से धर्मस्थल आमजन के लिए न खोलने का प्रस्ताव पास किया गया था। तभी से धर्मस्थल बंद हैं।
बैठक में एडीएम सिटी अतुल कुमार ने धर्मगुरुओं व प्रबंधन कमेटी से जुड़े लोगों से कहा कि पांच- पांच लोग धर्मस्थल में प्रवेश कर सकते हैं, लेकिन सभी ने एकमत से कहा कि पूर्व में उन्होंने धर्मस्थल को बंद रखने का फैसला लिया था उसे ही आगे बढ़ाएंगे। एडीएम सिटी ने उन्हें बताया कि किसी तरह का जल किसी के ऊपर न छिड़का जाएगा। 15 सितंबर तक प्रोफार्मा जमा कर दें इसके बाद बैठक होगी और उसमें व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी फिर धर्मस्थलों के खुलने पर वहां कितनी भीड़ होगी आदि पर चर्चा की जाएगी।
बैठक में पुलिस अधीक्षक पूर्वी राजकुमार अग्रवाल , पनकी हनुमान मंदिर के महंत जितेंद्र दास, महंत श्रीकृष्ण दास, स्वामी अरुणपुरी चैतन्य, मौलाना अली अब्बास, मो. हासिम अशर्फी, पादरी डायमंड यूसुफ, जितेन्द्र सिंह, अवध बिहारी मिश्रा, शेष नारायण त्रिवेदी, शहरकाजी हाफिज अब्दुल कुद्दुस हादी, हाजी मोहम्मद सलीस आदि रहे।

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