- एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के मुताबिक एसपी साउथ दीपक भूकर ने टीम के साथ बाबूपुरवा कॉलोनी में रिंकू गुप्ता के घर पर छापा मारकर 14 जुआरी पकड़े इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे
कानपुर। बाबूपुरवा कॉलोनी में चल रहे जुआडख़ाने और उसमें हाइटेक ठगी का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। यहां जुआ खिलाकर शातिर चीन , हांगकांग, ताइवान और इंडोनेशिया की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की मदद से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे। पुलिस ने 14 आरोपितों को गिरफ्तार किया। 2.25 लाख रुपये, सेंसरयुक्त डिवाइस, स्कैनर और कैमरा युक्त घडिय़ां-चश्मे आदि उपकरण बरामद किए हैं।
एसएसपी डॉ. प्रीतिंदर सिंह के मुताबिक एसपी साउथ दीपक भूकर ने टीम के साथ बाबूपुरवा कॉलोनी में रिंकू गुप्ता के घर पर छापा मारकर 14 जुआरी पकड़े। नौबस्ता उस्मानपुर निवासी अजमत उर्फ आजम शाह जुआडख़ाना संचालक है। वह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के साथ गुर्गे बैठाता था। लाखों रुपये दांव पर लगवाता था। आरोपित ताश के पत्तों को स्कैनर की मदद से रीड करके दांव लगाते थे और कोई शक भी नहीं कर पाता था। जुआ अधिनियम और धोखाधड़ी की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपितों को जेल भेजा गया है। सरगना अजमत की तलाश जारी है।
आठ इलेक्ट्रॉनिक पैकेट डिवाइस, आठ कैमरे, चार स्कैनर-कैमरे वाली घडिय़ां, छह चार्जर, 13 बैट्री, पॉवरबैंक, फिटनेस बैंड, कार की चाबीनुमा इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, पांच ब्लूटूथ ईयरफोन, दो जोड़ी कैमरा ग्लब्स, बैंड, पर्स, नौ लेंस, केमिकल लगी ताश की गड्डियां, 93 ताश के रैपर, 17 फोन।
बाबूपुरवा का रिंकू गुप्ता, लतीफ, विनीत, विक्की, गोविंदनगर निवासी दुर्गेश सिंह, मनीष, किदवईनगर निवासी कमल यादव, कल्याणपुर का अजय शुक्ला, बारादेवी निवासी रवि पाल, कृष्ण मुरारी, सुरेंद्र पाल, वैभव गुप्ता, श्यामनगर निवासी नीरज गुप्ता, गुजैनी निवासी आलोक।
डिवाइस वन, टू.. कहने पर देती थी पत्ते
स्कैनर, सेंसर व कैमरा युक्त घडिय़ों, की-रिंग, मोबाइल फोन, पर्स, ब्रेसलेट, फिटनेस बैंड व ग्लब्स को मोबाइल फोन से कनेक्ट कर ब्लूटूथ ईयरफोन कान में लगाते थे। ताश की गड्डी फेंटते समय ही डिवाइस स्कैन कर लेती थी। बाकी तीन पत्ते किस तरफ आएंगे, डिवाइस ब्लूटूथ के जरिये वन, टू... बोलकर बताती थी। वन यानी पत्ता अंदर और टू यानी कि पत्ता बाहर। स्कैनर युक्त चश्मे व कांटेक्ट लेंस से सामने वाले के पत्ते देखे जाते हैं। ताश के पत्तों पर केमिकल लगा होता है। बरामद डिवाइस हजारों रुपये कीमत की हैं। ये उपकरण किराये पर भी देते थे।
जिस डिवाइस की मदद से ताश की गड्डियों को स्कैन किया जाता है, उसमें ताश के कुल 450 गेम डाउनलोड हैं। जुआडख़ाने में जाने से पहले आरोपित अपने खेल को सेलेक्ट करके ओपन कर लेते थे। डिवाइस उसी खेल के हिसाब से संदेश भेजने लगती था।

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