- पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता ने मुठभेड़ स्थल पर कैसे चली गोली इसके बारे में सिलसिलेवार पूछा आधे घंटे का समय बताया कि घटना स्थल पर पुलिस ने क्राइम सीन क्रिएट किया था
कानपुर। चौबेपुर में बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे के सहयोगी रहे बउआ दुबे उर्फ प्रवीण दुबे के एनकाउंटर में मारे जाने की जांच के लिए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित न्यायिक आयोग के सदस्य मौके पर पहुंच गए। आयोग के सदस्यों ने पुलिस से कई सवाल दागे और क्राइम सीन को भी दोहराते हुए वस्तुस्थिति जानने का प्रयास किया। एनकाउंटर के समय पुलिस ने चार लोगों के घेरने की बात कही। इसपर आयोग के सदस्य ने बउआ दुबे मारा गया तो बाकी के तीन लोग कहां गए.. सवाल किया तो पुलिस बगले झाकने लगी।
सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस बीएस चौहान, हाईकोर्ट के पूर्व न्यायधीश शशिकांत अग्रवाल, पूर्व डीजीपी केएल गुप्ता ने मुठभेड़ स्थल पर कैसे चली गोली इसके बारे में सिलसिलेवार पूछा।आयोग ने घटना स्थल पर करीब आधे घंटे का समय बताया कि घटना स्थल पर पुलिस ने क्राइम सीन क्रिएट किया था। आयोग ने पूछा कि महेवा में लूट की घटना करके भाग रहे थे तो कैसे उन्हें यहां पर घेरा गया। सवाल यह भी उठा कि एक बदमाश बउआ दुबे मारा गया तो बाकी के तीन बदमाश कहां गए, क्या उनमें से कोई पकड़ा गया, उनकी कोई पहचान हुई। इन सवालों पर एसओजी प्रभारी सतेंद्र यादव ने बताया कि उनकी अबतक कोई पहचान नहीं हो सकी है। आयोग के सदस्यों ने पूछा क्या बदमाशों की कोई हिस्ट्री भी थी, जिस पर पुलिस ने बउआ पर 50 हजार का इनाम और बिकरू कांड में वांछित होने की जानकारी दी।
- कैसे हुई बउआ दुबे की पहचान
आयोग के सदस्यों ने पूछा कि पुलिस को यह कैसे जानकारी मिली कि एनकाउंटर में मारा जाने वाले बदमाश ही बउआ दुबे है और विकास दुबे का साथी है। इस पर पुलिस ने बताया कि महेवा में 9 जुलाई की रात एक कार में जा रहे झारखंड के परिवार के साथ लूट की सूचना मिली थी। इस पर वायरलैस से सूचना होने पर कि बदमाश दो कारों में हैं इसपर एसओजी प्रभारी सतेंद्र यादव व एसओ सिविल लाइन जेपी सिंह ने घेराबंदी की थी। बदमाशों ने पुलिस पार्टी पर फायर किया था, जिसमें एक फायर एसओजी प्रभारी सतेंद्र यादव की बुलट प्रूफ जैकेट पर लगा था।
इसके बाद जवाबी कार्रवाई में बउआ दुबे को चार गोली 9 एमएम पिस्टल से मारी गईं, जिसमें वह घायल हो गया और अस्पताल ले जाने पर उसे मृत घोषित किया गया। एसएसपी ने बताया कि इंस्पेक्टर जेपी सिंह कानपुर देहात में तैनात रहे हैं, इसलिए उन्हें विकास दुबे के गुर्गों के बारे में जानकारी थीं। उन्होंने पहचान की और चौबेपुर थाने से आई पुलिस टीम ने बउआ दुबे की शिनाख्त की थी। पुलिस ने बताया कि एक कार में बउआ दुबे और उसका साथी था, जो सामने मंदिर की ओर भाग गया, जबकि दूसरी कार में दो साथी थे सड़क से सीधे आगे निकल गए थे।
- ग्रामीणों के बयानोंनुसार
आयोग के सदस्यों ने विक्रमपुर गांव में रहने वाले ग्रामीणों के बयान भी लिए। मनोज कुमार चौहान, जितेंद्र कुमार, दुर्गेश के मकान मुठभेड़ स्थल के पास हैं। उन्होंने बताया कि सुबह गोली चलने की आवाज सुनी और एक आदमी मंदिर की तरफ भागता हुआ दिखाई दिया, जबकि दूसरा सड़क के किनारे खून से लथपथ पड़ा था। बहुत सारे पुलिस वाले भी खड़े थे। ग्रामीणों के बयानों को रिकार्ड भी किया गया। आयोग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वीडियोग्राफी, फोटो ग्राफी के बारे में भी पूछताछ की।

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