कानपुर। इन दिनों चेकिंग अभियान के नाम पर यातायात पुलिस और उनके सहयोगी की तो बल्ले बल्ले सी हो गई है,जिसको चाहा रोक और लगे हड़काने जब डर गया तो 200 रुपया से 500रुपया तक सौदा करके साहब से समझौता हो जाता है,आज तो हद ही हो गई । ट्रैफिक पुलिस लाईन के पास चेकिंग कर रहे यातायात पुलिस जावेद सिद्दकी ने तय मानकों को ताक पर रखकर बिना नेम प्लेट वाली वर्दी पहने हुए दिखाई पड़े और उनके सहयोगी की वर्दी में भी नेम प्लेट नही दिखाई पड़ी और जावेद के आदेश पर दोनों होमगार्ड बिना मास्क के वाहनों के चालकों को दौड़ दौड़ कर पकड़ रहे थे । उसी बीच हमारे पत्रकार की गाड़ी के आगे खड़े हो गये और बोले चलो साहब बुला रहे है जब हमारे पत्रकार ने गाड़ी रोका तो मामला तो मानकों को ताक पर रखकर साहब वसूली के कार्य मे लगें थे । जब अभियान की जानकारी ली तो साहब पत्रकार को गोलमोल धुमाने की कोशिश करने लगे ।यहाँ तक कि ड्यूटी पीरियड में कैप भी नही लगा रखी थी पत्रकार को देखकर तुरन्त कैप तो पहन लिया लेकिन अब नेम प्लेट कहा से लगावे इतनी बड़ी लापरवाही का आखिरी कौन है जिम्मेदार ? अब सवाल यह है,कि ऐसे में बिना नंबर प्लेट के वर्दी वाले सिपाही पर असली नकली की पहचान कौन करेगा ? क्या ऐस लापरवाह ट्रैफिक सिपाहियो पर यातायात पुलिस अधीक्षक महोदय कार्यवाही करेंगे ?

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