प्राइवेट लैब की जांच में 22 नए पॉजिटिव
- कानपुर। कोरोना की चपेट में आए लालबंगला के काजीखेड़ा के रहने वाले 52 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई। उनका इलाज हैलट के कोविड-19 हॉस्पिटल में चल रहा था। उधर, प्राइवेट लैब की जांच में 22 नए पॉजिटिव आए हैं। रविवार को 26 मरीज कोरोना से जंग जीतने में सफल हुए हैं, उसमें से चार प्रयागराज एवं लखनऊ के अस्पतालों से डिस्चार्ज हुए। उन्हें तालियों के बीच डॉक्टर एवं पैरामेडिकल स्टाफ ने कोविड हॉस्पिटलों से विदा किया। जिले में अब कोरोना पॉजिटिव 1361 हो गए है, जिसमें से 60 की मौत हो चुकी है, जबकि 967 स्वस्थ होकर जा चुके हैं। एक्टिव केस 336 हो गए हैं। चकेरी के लाल बंगला के काजीखेड़ा निवासी व्यक्ति में प्राइवेट लैब में कोरोना की पुष्टि हुई थी। इस पर स्वजनों ने बीते मंगलवार (30 जून) की दोपहर हैलट अस्पताल लेकर आए थे। डॉक्टरों के मुताबिक उन्हें सांस लेने में दिक्कत थी। साथ ही हार्ट के मरीज भी थे। रविवार दोपहर 3.45 बजे उसने दम तोड़ दिया। सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला की ओर से जारी विज्ञप्ति में एक मौत और 22 कोरोना पॉजिटिव आने की पुष्टि की गई है।
कई मरीजों को स्वस्थ होने के बाद भेजा गया घर
- विष्णुपुरी, नवाबगंज, कल्याणपुर, रतनपुर पनकी, टीपी नगर, नौबस्ता, किदवई नगर, बारादेवी, बर्रा-6, गुजैनी, कछियाना, द्वारिकापुरी, फेथफुलगंज, मीरपुर कैंट, शुक्लागंज, आरके नगर, पीरोड, गांधी नगर, नेहरू नगर, हरबंश मोहाल, सिंधी कॉलोनी, विजय नगर, शास्त्री नगर, लाजपत नगर, फजलगंज, एवं अली निवादा। शहर के चार कोविड हॉस्पिटलों से रविवार को 26 मरीज डिस्चार्ज किए गए। इसमें मंधना के रामा मेडिकल कॉलेज से 10, हैलट अस्पताल से सात, रामादेवी स्थित कांशीराम संयुक्त चिकित्सालय एवं ट्रामा सेंटर से तीन और पनकी के नारायणा मेडिकल कॉलेज से दो मरीज डिस्चार्ज किए गए। इसके अलावा लखनऊ एवं प्रयागराज में भर्ती कानपुर के चार मरीजों को स्वस्थ होने के बाद घर भेज दिया गया। 55 कोरोना संक्रमित आए थे। उस हिसाब से सीएमओ ने रविवार को संक्रमितों के संपर्क में आए स्वजनों और संदिग्ध मरीजों की सैंपलिंग नहीं कराई है। रविवार को स्वास्थ्य महकमे की टीमों ने महज 215 लोगों के ही सैंपल लिए।। 6-परिवार का कोई सदस्य बीमार है, तो घर के अंदर भी मास्क पहनकर रखें-डाॅक्टर एस. के. अवस्थी
प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर देना होगा सेहत व स्वास्थ्य को महत्व
कानपुर। हम अप्रत्याशित दौर में जी रहे हैं तथा वक्त की मांग है कि हम इन अनिश्चितताओं को स्वीकार करें। लेकिन सबसे पहले हमें इसकी शुरुआत करनी होगी और सेहत व स्वास्थ्य को महत्व देना होगा। यह खासकर तब बहुत जरूरी है, जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर है या फिर आपको किसी बीमारी का इतिहास है। अस्थमा बिगड़ने का मुख्य कारण श्वास की नली में वायरल संक्रमण होना है। अस्थमा के जोखिम वाले लोगों या फिर मौजूदा अस्थमा पीड़ितों के लिए सांस की नली में वायरल संक्रमण बहुत घातक हो सकते हैं और बीमारी को अनियंत्रित कर सकते हैं। यह जानना भी आवश्यक है, कि इस समय अस्थमा पीड़ितों में संक्रमण की ज्यादा दर का कोई प्रमाण नहीं है। लेकिन एक अनुमान के अनुसार सामान्य या फिर गंभीर अस्थमा के मरीजों को बीमारी के और ज्यादा गंभीर होने का खतरा ज्यादा होता है, लेकिन इस तथ्य को साबित करने के लिए कोई भी प्रकाशित डेटा नहीं है।
सांस की क्रोनिक बीमारी भारत में स्वास्थ्य के बड़े भार का एक कारण है। भारत में लगभग 93 मिलियन लोग सांस की क्रोनिक समस्या से पीड़ित हैं; इनमें से लगभग 37 मिलियन एस्थमेटिक हैं। अस्थमा के वैश्विक भार में भारत का हिस्सा केवल 11.1 प्रतिशत है, जबकि विश्व में अस्थमा से होने वाली मौतों में भारत का हिस्सा 42 प्रतिशत है, जिस वजह से भारत दुनिया की अस्थमा कैपिटल बन गया है।
डाॅक्टर एस. के. अवस्थी - चेस्ट फिजिशियन, रीजेंसी हॉस्पिटल के अनुसार, ‘‘अस्थमा पर सांस के वायरस के प्रभाव के चलते यह बहुत आवश्यक हो गया है कि मौजूदा समय में अस्थमा पीड़ित बहुत ज्यादा सावधानी बरतें। वायरस निर्मित समस्याओं की रोकथाम के लिए अस्थमा को अच्छी तरह से नियंत्रित करना बहुत आवश्यक है।’’
मौजूदा महामारी के समय में किसी बीमारी के उपचार के लिए आपातकालीन विभाग या अत्यावश्यक इलाज के लिए जाना पड़ता है जहां पर मरीज को किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने का जोखिम भी ज्यादा होता है। इसलिए अस्थमा को नियंत्रित रखकर अस्थमा पीड़ित व्यक्ति वायरल संक्रमण के जोखिम को कम कर सकता है।
डाॅक्टर एस. के. अवस्थी के अनुसार, ‘‘अस्थमा पीड़ितों को अस्थमा नियंत्रित रखने के लिए स्टेराॅयड इन्हेलर्स दिए जाते हैं। मौजूदा महामारी में अस्थमा पीड़ित के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि वह अपने अस्थमा को नियंत्रित रखे। स्टेराॅयड इन्हेलर्स का उपयोग रोकने से व्यक्ति को अस्थमा के बिगड़ने का खतरा होगा।अस्थमा पीड़ितों को कभी भी अपने काॅर्टिकोस्टेराॅयड इन्हेलर तब तक लेना बंद नहीं करना चाहिए, जब तक कोई मेडिकल प्रोफेशनल उनसे ऐसा करने को न कहे। स्टेराॅयड इन्हेलर का प्रयोग बंद करने से मरीज को संक्रमण का ज्यादा खतरा हो जाएगा क्योंकि इससे अस्थमा का नियंत्रण खराब हो जाता है।

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