लखनऊ: गुरुकुल में मासूम दिव्यांश की 'बलि'! मामा ही निकला कातिल; शैतानी के नाम पर दी रूह कंपा देने वाली यातनाएं - NINE ONE TIMES

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25/04/2026

लखनऊ: गुरुकुल में मासूम दिव्यांश की 'बलि'! मामा ही निकला कातिल; शैतानी के नाम पर दी रूह कंपा देने वाली यातनाएं

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6 दिन पहले एडमिशन, फिर मौत की सजा; 'अनुशासन' के नाम पर नंगे पांव धूप में खड़ा रखा, रातभर लात-घूंसों से पीटा

मासूम दिव्यांश का सपना न्यूज़ बैनर, गुरुकुल क्लासरूम बैकग्राउंड में एक बच्चा पीली धोती और नीली टी-शर्ट पहनकर मुस्कुराते हुए डांस करता हुआ, 9वन टाइम्स लोगो के साथ।



क्रूरता की हदें मुख्य बिंदु:

  • वजह: बच्चा गुरुकुल के नियमों में नहीं ढल रहा था, डांस और गाना गाता था।
  • यातना: चिलचिलाती धूप में घंटों नंगे पांव और नग्न खड़ा रखा गया।
  • भूख की सजा: सब बच्चे खाना खाते थे, दिव्यांश को भूखा रखकर पीटा जाता था।
  • साक्ष्य मिटाना: गर्लफ्रेंड ने CCTV कैमरे तोड़े और शव ठिकाने लगाने में मदद की।
  • अंतिम प्रहार: सिर दीवार पर पटका और मुंह दबाकर पीटते रहे जब तक वह मर नहीं गया।

  • लखनऊ न्यूज़, क्राइम रिपोर्ट, गुरुकुल हत्या कांड, दिव्यांश मर्डर केस

कानपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और 'गुरुकुल' जैसी पवित्र संस्थाओं पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। यहाँ रामानुज भागवत वेद विद्या पीठ के संचालक और महंत सौरभ मिश्रा उर्फ कन्हैया ने अपने ही सगे भांजे, 11 वर्षीय दिव्यांश की ऐसी बर्बरता से हत्या कर दी, जिसे सुनकर पत्थर दिल इंसान की भी रूह कांप जाए।

पवित्र परंपरा के नाम पर कत्लगाह बना गुरुकुल

​दिव्यांश के पिता नरेंद्र कुमार द्विवेदी ने बड़े अरमानों के साथ 15 अप्रैल को अपने बेटे का दाखिला इस गुरुकुल में कराया था। उन्हें लगा था कि उनका बेटा वेद और संस्कारों की शिक्षा लेगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि जिस 'मामा' के भरोसे उन्होंने बेटे को छोड़ा है, वही उसका काल बन जाएगा। महज 6 दिन बाद यानी 21 अप्रैल को दिव्यांश की लाश उसके घर के बाहर मिली।

आरोपी महंत का रूह कंपा देने वाला कबूलनामा

कानपुर-दिव्यांश-हत्याकांड-परिजनों-का-रो-रोकर-बुरा-हाल-फोटो


​पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद आरोपी महंत सौरभ मिश्रा ने जो बातें बताईं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक हैं। सौरभ ने कबूला कि दिव्यांश गुरुकुल की परंपराओं में ढल नहीं पा रहा था। वह बच्चा था, उसे डांस करना, गाना गाना और अन्य बच्चों के साथ मस्ती करना पसंद था। लेकिन यह मासूमियत उस 'महंत' को चुभने लगी।

​सौरभ ने पुलिस को बताया, "दिव्यांश दिनभर शैतानी करता था, जिससे मुझे चिढ़ होने लगी थी। मैंने उसे सुधारने के नाम पर घंटों नंगे पांव चिलचिलाती धूप में खड़ा रखा। जब वह छाया की तरफ भागता, तो मैं उसे डंडों से पीटता था।"

भूख की तड़प और बाल पकड़कर घसीटना

​पुलिस को जो सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, वे हैवानियत की गवाही दे रहे हैं। एडीसीपी अंजली विश्वकर्मा ने बताया कि फुटेज में साफ दिख रहा है कि मेस में सभी बच्चे खाना खा रहे हैं, लेकिन दिव्यांश को एक कोने में भूखा बैठाकर रोने के लिए मजबूर किया गया। जब भूख से बेहाल दिव्यांश ने चोरी-छिपे दूसरे बच्चों का खाना खाने की कोशिश की, तो आरोपी मामा ने उसके बाल पकड़कर उसे जमीन पर घसीटा और बेरहमी से थप्पड़-घूंसे जड़े।

वो काली रात: जब अनुशासन 'हैवानियत' में बदल गया


​21 अप्रैल की रात को क्रूरता की सारी हदें पार हो गईं। आरोपी ने बताया कि उसने दिव्यांश को रातभर पीटने की ठान ली थी। उसने बच्चे को थप्पड़, चप्पल, बेल्ट और लात-घूंसों से तब तक मारा जब तक वह बेसुध नहीं हो गया। पिटाई के दौरान उसने दिव्यांश की पीठ पर ऐसी लात मारी कि वह दूर जाकर गिरा और उसका सिर दीवार से टकरा गया। लहूलुहान दिव्यांश जब दर्द से चिल्लाया, तो आरोपी ने उसका मुंह दबा दिया और पीठ पर कई घूंसे जड़े। सुबह जब देखा, तो दिव्यांश की मौत हो चुकी थी।

गर्लफ्रेंड के साथ मिलकर साक्ष्य मिटाने की साजिश

​हत्या के बाद आरोपी ने अपनी गर्लफ्रेंड हर्षिता सोनी को बुलाया। हर्षिता ने इस जघन्य अपराध में उसका पूरा साथ दिया। उसने गुरुकुल के सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए और डीवीआर के साथ छेड़छाड़ की। उसने बच्चों को घर भेज दिया और एक कार बुक की, जिससे आरोपी दिव्यांश के शव को कानपुर के महाराजपुर इलाके में उसके घर के पास फेंक कर फरार हो गया।

पिता की यातनाओं का 'ट्रॉमा' बना कातिल

​पूछताछ में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। आरोपी सौरभ ने बताया कि उसके पिता भी एक महंत थे और छोटी गलती पर उसे और उसके भाई को बहुत बेरहमी से पीटते थे। इसी 'बचपन के टॉर्चर' ने सौरभ के भीतर एक हिंसक प्रवृत्ति पैदा कर दी थी, जिसका शिकार मासूम दिव्यांश हो गया।

राजनीतिक गलियारों में उबाल: बुलडोजर की मांग

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​इस घटना ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय का भरोसा दिया है। वहीं, समाजवादी पार्टी का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें विधायक अमिताभ बाजपेई और नसीम सोलंकी शामिल थे, पीड़ित परिवार से मिला। नसीम सोलंकी ने सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इस हैवान के घर पर भी बुलडोजर चलेगा?

​नाइन वन टाइम्स का सवाल: संस्कार या अत्याचार?

​यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि शिक्षा और संस्कारों के नाम पर बच्चों को किस तरह की यातनाएं दी जा रही हैं। क्या किसी बच्चे का डांस करना या गाना गाना इतना बड़ा अपराध है कि उसकी जान ले ली जाए? '9वन टाइम्स' इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों को फांसी की सजा की मांग करता है।


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