राकेश टिकैत का प्रयागराज में धमाका: बंगाल हिंसा पर केंद्र को घेरा, बोले- जहां अपनी सरकार नहीं वहां दंगे कराती है बीजेपी
BIG STATEMENT राकेश टिकैत के बयान के मुख्य अंश:
- बड़ा आरोप: बंगाल हिंसा के लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार, विपक्ष शासित राज्यों में कराया जा रहा बवाल।
- अंतरराष्ट्रीय संकट: ईरान-इजराइल युद्ध न रुका तो भारत में बढ़ेगी महंगाई और जमाखोरी।
- किसान राहत: बेमौसम बारिश से बर्बाद हुई फसलों के लिए सरकार तुरंत दे उचित मुआवजा।
- महिला अधिकार: परिवार की तरह राजनीति और सरकार में भी महिलाओं को मिले आधा अधिकार।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने एक बार फिर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को प्रयागराज के नैनी, खरकौनी पहुंचे टिकैत ने मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्र की राजनीति और अंतरराष्ट्रीय हालातों पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में होने वाली हिंसा और दंगों के पीछे केंद्र की सोची-समझी साजिश है।
विपक्ष शासित राज्यों में बवाल का 'केंद्र' कनेक्शन
पत्रकारों से बातचीत के दौरान राकेश टिकैत ने कहा कि केवल बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के उन तमाम राज्यों में केंद्र सरकार जानबूझकर माहौल खराब कराती है जहां उनकी अपनी सरकार नहीं है। टिकैत ने पश्चिम बंगाल के चुनावी और राजनीतिक हालातों का जिक्र करते हुए दावा किया कि वहां फिर से टीएमसी (TMC) ही सरकार बनाने जा रही है और इसी हार की बौखलाहट में वहां अशांति फैलाई जा रही है।
ईरान-इजराइल युद्ध और भारत पर प्रभाव
दुनिया में चल रहे युद्धों पर चिंता जाहिर करते हुए टिकैत ने कहा कि अगर ईरान और इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष जल्द नहीं थमा, तो इसकी भारी कीमत पूरी दुनिया के साथ-साथ भारत को भी चुकानी होगी। उन्होंने कहा कि देश के व्यापारी पहले ही जमाखोरी में जुट गए हैं, जिससे गैस और जरूरी चीजों की किल्लत बढ़ रही है। टिकैत ने सुझाव दिया कि भारत हमेशा शांति का दूत रहा है, ऐसे में भारत को वैश्विक मंच पर 'सरपंच' की भूमिका निभाते हुए इस युद्ध को रुकवाने का प्रयास करना चाहिए।
बेमौसम बारिश: किसानों के लिए मुआवजे की मांग
स्थानीय मुद्दों पर बात करते हुए किसान नेता ने कहा कि बीते दिनों हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में तैयार खड़ी गेहूं और अन्य फसलें पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं। टिकैत ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार से मांग की कि वे तत्काल सर्वे कराकर किसानों के नुकसान की शत-प्रतिशत भरपाई करें। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अन्नदाता को उसका हक नहीं मिला, तो किसान फिर से सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।
महिलाओं को मिले 'आधे का हक'
सामाजिक न्याय की बात करते हुए टिकैत ने महिलाओं के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जब घर और परिवार में महिलाओं को आधे का अधिकार प्राप्त है, तो फिर राजनीति और सरकारी व्यवस्थाओं में उन्हें कम हक क्यों दिया जा रहा है? उन्होंने सरकार से अपील की कि महिलाओं को पुरुषों के समान हर क्षेत्र में 50 प्रतिशत की हिस्सेदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।


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