कानपुर: चक्रवात की तबाही के बाद ग्राउंड जीरो पर उतरीं महापौर, काकादेव में गिरे पेड़ों और क्षतिग्रस्त मकानों का लिया जायजा
कानपुर नगर: उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में पिछले 48 घंटों से जारी चक्रवात, तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। शहर के कई इलाकों में विशालकाय पेड़ों के उखड़ने से न केवल रास्ते बाधित हुए हैं, बल्कि रिहायशी मकानों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। इसी गंभीर स्थिति का जायजा लेने के लिए सोमवार, 06 अप्रैल 2026 को कानपुर की महापौर (Mayor) खुद सड़कों पर उतरीं।
काकादेव के नवीन नगर में क्षतिग्रस्त मकानों का निरीक्षण
महापौर ने क्षेत्रीय पार्षद नीरज कुरील और नगर निगम के उद्यान विभाग के अधिकारियों के साथ नवीन नगर, काकादेव का सघन दौरा किया। यहाँ चक्रवात के दौरान एक विशाल पेड़ गिरने से एक रिहायशी मकान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। महापौर ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें ढांढस बंधाया। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिशाषी अभियंता (उद्यान) को निर्देश दिया कि क्षतिग्रस्त मकानों के पास से पेड़ों के मलबे को तुरंत हटाया जाए ताकि आगे कोई दुर्घटना न हो।
LIVE खबर की मुख्य हाईलाइट्स (Highlights)
- • स्थल निरीक्षण: महापौर प्रमिला पांडेय ने काकादेव में पेड़ गिरने से हुए नुकसान को करीब से देखा।
- • राहत कार्य: चक्रवात प्रभावित मुख्य मार्गों से पेड़ों को हटाकर रास्ता पूरी तरह बाधा मुक्त किया गया।
- • 22 टीमें सक्रिय: नगर निगम प्रशासन ने शहर भर में मलबे की सफाई के लिए 22 विशेष टीमें तैनात कीं।
- • पर्यावरण संकल्प: महापौर के निर्देश- जहाँ से पेड़ उखड़ा है, वहाँ प्राथमिकता पर नया पौधा लगाया जाए।
22 टीमों के साथ युद्धस्तर पर राहत कार्य
शहर में 04 अप्रैल 2026 से आए चक्रवात के कारण उखड़े पेड़ों की स्थिति पर महापौर ने उद्यान विभाग से जवाब तलब किया। अधिशाषी अभियंता दिवाकर भास्कर ने महापौर को विस्तृत रिपोर्ट सौंपते हुए बताया कि:
- निजी और सरकारी समन्वय: राहत कार्यों के लिए नगर निगम के स्थायी कर्मियों के अलावा निजी स्तर पर कुल 22 विशेष टीमें तैनात की गई हैं।
- मुख्य मार्गों की सफाई: रामादेवी से कल्याणपुर और फूलबाग से बर्रा बाईपास तक के सभी मुख्य मार्गों से पेड़ों को हटाकर रास्ता पूरी तरह से आवागमन के लिए खोल दिया गया है।
- बाधा मुक्त शहर: शहर के चारों कोनों में जहाँ भी पेड़ गिरने से बिजली के तार टूटे या रास्ते बंद हुए थे, वहाँ टीमें रात-दिन काम कर रही हैं।
पर्यावरण और जवाबदेही पर कड़े निर्देश
निरीक्षण के दौरान महापौर ने केवल राहत कार्य ही नहीं, बल्कि भविष्य की योजना और जवाबदेही पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निम्नलिखित सख्त निर्देश दिए:
- लकड़ी का भंडारण: आंधी में गिरे सभी पेड़ों की लकड़ियों को विधिवत नगर निगम मुख्यालय में जमा किया जाए। इसकी एक-एक इंच लकड़ी का हिसाब सरकारी रिकॉर्ड में होना चाहिए।
- पुनः वृक्षारोपण (Re-plantation): महापौर ने एक दूरदर्शी निर्देश देते हुए कहा कि जिस सटीक स्थान से पेड़ उखड़ा है, उसी गड्ढे को सुरक्षित कर वहां तुरंत नया और मजबूत पौधा लगाया जाए। इससे शहर का ग्रीन कवर प्रभावित नहीं होगा।
- अतिरिक्त श्रम शक्ति: यदि आवश्यकता पड़े, तो आउटसोर्सिंग के जरिए और अधिक कर्मियों को लगाकर शहर के भीतरी रास्तों (गली-मोहल्लों) की सफाई सुनिश्चित की जाए।
चक्रवात का कहर और प्रशासन की सतर्कता
कानपुर में 4 अप्रैल से शुरू हुए चक्रवात ने भारी तबाही मचाई है। कई इलाकों में पुरानी दीवारें गिरने और पेड़ उखड़ने की खबरें लगातार कंट्रोल रूम को मिल रही हैं। महापौर के इस औचक निरीक्षण से नगर निगम प्रशासन में हड़कंप मच गया है और राहत कार्यों में तेजी आई है। महापौर ने जनता से भी अपील की है कि वे जर्जर भवनों और पुराने पेड़ों के पास जाने से बचें और किसी भी आपात स्थिति में नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर पर सूचित करें।


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