- बिना मान्यता वाले स्कूलों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक'
यूपी बोर्ड का 'सर्जिकल स्ट्राइक' (Highlights):
- सख्त आदेश: बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने 18 अप्रैल तक अमान्य स्कूलों को चिह्नित कर बंद करने के दिए निर्देश।
- लिस्ट जारी: परिषद की वेबसाइट पर 29,208 मान्य स्कूलों की सूची अपलोड, अभिभावक यहाँ से करें चेक।
- कोचिंग पर शिकंजा: निजी कोचिंग संस्थानों में सेवा देने वाले परिषदीय शिक्षकों पर होगी कठोर कार्रवाई।
- कानूनी कार्रवाई: बिना मान्यता स्कूल चलाने पर भारी अर्थदंड और विधिक कार्यवाही का प्रावधान।
यूपी बोर्ड का बड़ा एक्शन: फर्जी स्कूलों के 'तिलिस्म' को तोड़ने की तैयारी
प्रयागराज।
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने उन अमान्य विद्यालयों के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है जो बिना किसी वैध मान्यता के हजारों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने प्रदेश के सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों (DIOS), बेसिक शिक्षा अधिकारियों (BSA) और खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि 18 अप्रैल 2026 तक सघन अभियान चलाकर ऐसे फर्जी संस्थानों को चिह्नित किया जाए और उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वेबसाइट पर 29,208 विद्यालयों की सूची अपलोड, अभिभावक रहें सावधान
अभिभावकों और छात्रों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए यूपी बोर्ड ने परिषद से संबद्ध सभी 29,208 विद्यालयों की सूची आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर अपलोड कर दी है। इस सूची में 10,295 विद्यालय हाईस्कूल स्तर (कक्षा 9-10) के हैं, जबकि 18,913 विद्यालय इंटरमीडिएट स्तर (कक्षा 9 से 12) तक संचालित करने के लिए अधिकृत हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि इस सूची के बाहर संचालित होने वाला कोई भी विद्यालय अमान्य माना जाएगा। अभिभावकों को सलाह दी गई है कि वे अपने बच्चों का प्रवेश कराने से पहले इस सूची में विद्यालय की मान्यता अवश्य जांच लें।
कोचिंग पढ़ाने वाले शिक्षकों पर भी कसेगा शिकंजा
इस अभियान का दूसरा सबसे बड़ा निशाना वे शिक्षक हैं जो बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत हैं लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए निजी कोचिंग संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश कोचिंग विनियम अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय के शिक्षक का निजी कोचिंग में पढ़ाना पूर्णतः वर्जित है। बोर्ड सचिव ने जांच टीम को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अमान्य स्कूलों की जांच के साथ-साथ निजी कोचिंग संस्थानों में संलग्न शिक्षकों की भी सूची बनाई जाए और उनके विरुद्ध निलंबन एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।
हाईकोर्ट और शासन के निर्देशों का पालन, 30 अप्रैल तक मांगी रिपोर्ट
यूपी बोर्ड का यह कदम माननीय उच्च न्यायालय द्वारा अमान्य संस्थानों को चिह्नित करने के आदेश के अनुपालन में उठाया गया है। शासन के 9 जून 2025 के निर्देशों के तहत हर जिले में DIOS की अध्यक्षता में विशेष समितियां गठित हैं। बोर्ड ने इन समितियों को एक विशेष प्रारूप भी जारी किया है, जिस पर उन्हें 30 अप्रैल तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। इस रिपोर्ट में जिलेवार अमान्य स्कूलों की संख्या, उन पर लगाया गया अर्थदंड, और कोचिंग में संलिप्त शिक्षकों के विरुद्ध की गई कार्रवाई का पूरा विवरण देना होगा।
भारी अर्थदंड और विधिक कार्यवाही का है प्रावधान
बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने चेताया है कि परिषद की विनियमावली और शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत बिना मान्यता स्कूल चलाना एक गंभीर अपराध है। ऐसे स्कूलों के संचालकों के विरुद्ध न केवल भारी जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि उन पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई भी की जा सकती है। बोर्ड का मानना है कि फर्जी स्कूल न केवल राजस्व की हानि करते हैं, बल्कि छात्रों के प्रमाण पत्रों की वैधता पर भी संकट पैदा करते हैं।
निष्कर्ष: शिक्षा के बाजारीकरण को रोकने की मुहिम
यूपी बोर्ड की इस सख़्ती से प्रदेश भर के शिक्षा माफियाओं में हड़कंप मच गया है। निजी कोचिंग और अमान्य स्कूलों के गठजोड़ को तोड़ने की यह मुहिम प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकती है। 'नाइन वन टाइम्स' भी पाठकों से अपील करता है कि केवल मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही शिक्षा प्राप्त करें और किसी भी संदिग्ध स्कूल की सूचना तुरंत शिक्षा विभाग को दें।


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