क्या है पाइलिंग? मेट्रो की मजबूती के पीछे का 'इंजीनियरिंग विज्ञान'
METRO MILESTONE प्रगति के मुख्य बिंदु:
- बड़ी उपलब्धि: 4.50 किमी लंबे एलिवेटेड सेक्शन में कुल 963 पाइल्स का काम संपन्न।
- स्टेशन कवरेज: कृषि विश्वविद्यालय, विजय नगर, शास्त्री चौक, बर्रा-7 और बर्रा-8 स्टेशन का आधार तैयार।
- अगला चरण: पाइलिंग के बाद अब पाइल कैप्स की कास्टिंग और पिलर खड़े करने का काम होगा तेज।
- अंडरग्राउंड अपडेट: कॉरिडोर-2 के 4.10 किमी लंबे भूमिगत हिस्से का टनल कार्य पहले ही हो चुका है पूरा।
कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के कॉरिडोर-2 (सीएसए - बर्रा-8) के निर्माण में यूपीएमआरसी (UPMRC) ने एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से बर्रा-8 तक के लगभग 4.50 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड सेक्शन के लिए पाइलिंग का कार्य शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है। इस उपलब्धि के साथ ही अब मेट्रो पिलर्स और सुपरस्ट्रक्चर के निर्माण की राह पूरी तरह साफ हो गई है।
963 पाइल्स का बिछा जाल, CSA पर लगा अंतिम 'आधार'
मेट्रो कॉरिडोर के एलिवेटेड सेक्शन को मजबूती देने के लिए जमीन के भीतर लोहे और कंक्रीट का एक विशाल ढांचा तैयार किया जाता है। यूपीएमआरसी के सिविल इंजीनियरों ने सीएसए स्टेशन के पास अंतिम पाइलिंग कर इस चरण को संपन्न किया। पूरे सेक्शन में कुल 963 पाइल्स लगाई गई हैं, जो भविष्य में हजारों टन वजन वाले मेट्रो कोच और यात्रियों का भार वहन करेंगी।
इंजीनियरिंग की बारीकी: क्या होती है पाइलिंग?
अक्सर आम लोग मेट्रो निर्माण में पिलर्स तो देखते हैं, लेकिन उनकी नींव (पाइलिंग) जमीन के काफी नीचे छिपी होती है। मेट्रो अवसंरचना में पाइलिंग कार्य वास्तविक नींव का काम करता है। इसमें जमीन के भीतर गहरी खुदाई कर लोहे का जाल (Cage) डाला जाता है और फिर कंक्रीट की ढलाई होती है। आमतौर पर 3 से 6 पाइल के समूह को एक पाइल कैप से जोड़ा जाता है, जिसके ऊपर मेट्रो का पिलर खड़ा होता है।
कॉरिडोर-2 का स्वरूप: एलिवेटेड और अंडरग्राउंड का संगम
लगभग 8.60 किमी लंबा कॉरिडोर-2 शहर के महत्वपूर्ण हिस्सों को जोड़ेगा:
- एलिवेटेड सेक्शन (4.50 किमी): इसमें कृषि विश्वविद्यालय, विजय नगर चौराहा, शास्त्री चौक, बर्रा-7 और बर्रा-8 जैसे 5 स्टेशन शामिल हैं।
- अंडरग्राउंड सेक्शन (4.10 किमी): इसमें रावतपुर, काकादेव और डबल पुलिया स्टेशन शामिल हैं, जिनका टनल निर्माण कार्य हाल ही में संपन्न हुआ है।
प्रबंध निदेशक ने सराहा इंजीनियरों का जज्बा
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक श्री सुशील कुमार ने इस सफलता पर मेट्रो टीम की पीठ थपथपाई। उन्होंने कहा, "पाइलिंग का काम पूरा होना एक बड़ी राहत है। अब हम जल्द ही पाइल कैप्स की कास्टिंग का कार्य भी पूरा कर लेंगे। हमारी टीम शहरवासियों को तय समय के भीतर मेट्रो का उपहार देने के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है।"
कानपुर मेट्रो का विस्तार: एक नज़र में
वर्तमान में कॉरिडोर-1 (आईआईटी से नौबस्ता) के 16 किमी हिस्से पर यात्री सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं। सेंट्रल से नौबस्ता के बीच टेस्टिंग का काम भी अंतिम चरण में है। कॉरिडोर-2 के इस सिविल निर्माण में आई तेजी से उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही बर्रा और दक्षिण कानपुर के निवासी भी मेट्रो की विश्वस्तरीय सेवाओं का लाभ उठा सकेंगे।


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