- देश-विदेश के शोधकर्ताओं के लिए खुलेगा ज्ञान का खजाना: DM जितेंद्र प्रताप सिंह
HERITAGE PRIDE मिशन की मुख्य बातें:
- बड़ी पहल: जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 'ज्ञान भारतम् मिशन' की जिला स्तरीय बैठक संपन्न।
- डिजिटल लाइब्रेरी: आयुर्वेद, ज्योतिष और धर्म से जुड़ी दुर्लभ पांडुलिपियों का होगा दस्तावेजीकरण।
- स्मार्ट तकनीक: 'ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप' के जरिए GPS लोकेशन के साथ दर्ज होगा डेटा।
- स्वामित्व: डिजिटलीकरण के बाद भी मूल पांडुलिपि का मालिकाना हक संग्रहकर्ता के पास ही रहेगा।
कानपुर की सदियों पुरानी ज्ञान परंपरा, जो अब तक मठों, मंदिरों और निजी पुस्तकालयों की अलमारियों में बंद थी, अब पूरी दुनिया के सामने डिजिटल स्वरूप में आएगी। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह की अध्यक्षता में 'ज्ञान भारतम् मिशन' के अंतर्गत जनपद स्तरीय समिति की बैठक में इस महाभियान का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया गया है। इस पहल से न केवल प्राचीन ज्ञान सुरक्षित होगा, बल्कि कानपुर की ऐतिहासिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती मिलेगी।
दुर्लभ ज्ञान का डिजिटल पुनर्जन्म
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने बताया कि हमारे जनपद के प्राचीन मंदिरों, संस्कृत पाठशालाओं और पुराने घरानों में धर्म, दर्शन, आयुर्वेद, ज्योतिष और इतिहास से जुड़ी ऐसी पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनका ज्ञान अमूल्य है। समय की मार और उचित रखरखाव के अभाव में इनके नष्ट होने का खतरा बना रहता है। 'ज्ञान भारतम् मिशन' के तहत इन दुर्लभ दस्तावेजों को आधुनिक तकनीक (Digitization) के जरिए हमेशा के लिए सुरक्षित कर दिया जाएगा।
ऐप आधारित सर्वेक्षण और विशेषज्ञों की टीम
इस अभियान को पारदर्शिता और सटीकता से चलाने के लिए 'ज्ञान भारतम् मोबाइल ऐप' का उपयोग किया जाएगा। सर्वेक्षण दल मौके पर जाकर पांडुलिपियों की पहचान करेगा और ऐप पर उनकी संख्या, वर्तमान स्थिति और जीपीएस लोकेशन के साथ स्थल फोटोग्राफ अपलोड करेगा। इसके बाद, संस्कृति विभाग की विशेषज्ञ टीम इन पांडुलिपियों के स्कैनिंग और डिजिटलीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगी।
शोधकर्ताओं के लिए वरदान साबित होगी यह पहल
डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने जोर देकर कहा कि यह केवल फाइलों का संरक्षण नहीं है, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक पीढ़ी से जोड़ने का एक पुल है। डिजिटल स्वरूप में उपलब्ध होने के बाद, दुनिया भर के विद्यार्थी और शोधकर्ता घर बैठे कानपुर की इस ज्ञान संपदा का अध्ययन कर सकेंगे।
मालिकाना हक पर भ्रम दूर: संग्रहकर्ता ही रहेंगे मालिक
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि डिजिटलीकरण की प्रक्रिया से पांडुलिपि के स्वामित्व (Ownership) पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। जो पांडुलिपि जिस मंदिर, मठ या व्यक्ति के पास है, वह उन्हीं की रहेगी। सरकार का उद्देश्य केवल उस ज्ञान का दस्तावेजीकरण करना है ताकि उसे भविष्य के लिए सुरक्षित किया जा सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी दीक्षा जैन, पर्यटन अधिकारी अर्जिता ओझा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस मिशन को जन-जन तक पहुँचाने की प्रतिबद्धता दोहराई।


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