कानपुर कलेक्ट्रेट में हड़कंप: DM जितेंद्र प्रताप सिंह का बड़ा एक्शन, टाइपिंग टेस्ट में फेल होने पर 3 बाबुओं को डिमोट कर बनाया 'चपरासी' - NINE ONE TIMES

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09/04/2026

कानपुर कलेक्ट्रेट में हड़कंप: DM जितेंद्र प्रताप सिंह का बड़ा एक्शन, टाइपिंग टेस्ट में फेल होने पर 3 बाबुओं को डिमोट कर बनाया 'चपरासी'

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DM जितेंद्र प्रताप सिंह की दो टूक: "कलेक्ट्रेट में टाइपिंग के बिना काम संभव नहीं"

कानपुर डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह कार्रवाई, 3 क्लर्क चपरासी बने, टाइपिंग टेस्ट फेल कानपुर कलेक्ट्रेट न्यूज़, नाइन वन टाइम्स


BIG ACTION प्रशासनिक हंटर के मुख्य बिंदु:

  • बड़ी कार्रवाई: टाइपिंग स्पीड 25 शब्द प्रति मिनट न होने पर 3 जूनियर क्लर्क डिमोट।
  • नया पद: क्लर्क से हटाकर अब चतुर्थ श्रेणी (चपरासी) में भेजे गए कर्मचारी।
  • नाम: प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव पर गिरी गाज।
  • वजह: 2 साल में दो बार मिला मौका, लेकिन दोनों बार टाइपिंग टेस्ट में हुए फेल।
  • वेतन पर रोक: डिमोशन के साथ ही वार्षिक वेतन वृद्धि पर भी लगाई गई रोक।
कानपुर।

कानपुर के जिलाधिकारी (DM) जितेन्द्र प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट की कार्यप्रणाली में सुधार और अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। जिलाधिकारी ने कार्यक्षमता के मानक पूरे न करने पर तीन जूनियर क्लर्कों (बाबुओं) को उनके पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी यानी चपरासी के पद पर डिमोट कर दिया है। ये तीनों कर्मचारी निर्धारित टाइपिंग स्पीड हासिल करने में लगातार दूसरी बार भी असफल रहे थे।

मृतक आश्रित कोटे से मिली थी नौकरी

​जानकारी के अनुसार, प्रेमनाथ यादव, अमित कुमार यादव और नेहा श्रीवास्तव ने करीब दो साल पहले मृतक आश्रित कोटे के तहत कानपुर कलेक्ट्रेट में जूनियर क्लर्क के पद पर जॉइनिंग की थी। सरकारी सेवा नियमावली के मुताबिक, इस कोटे के तहत क्लर्क के पद पर नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के लिए जॉइनिंग के एक साल के भीतर हिंदी टाइपिंग टेस्ट पास करना अनिवार्य होता है। इसमें न्यूनतम 25 शब्द प्रति मिनट की गति होना आवश्यक है।

दो बार मिला मौका, पर नहीं सुधरी टाइपिंग की रफ़्तार

​प्रशासनिक रिकॉर्ड के मुताबिक, साल 2024 में इन तीनों का पहली बार टाइपिंग टेस्ट लिया गया था। उस समय ये तीनों ही 25 शब्द प्रति मिनट का मानक पूरा नहीं कर पाए। जिलाधिकारी ने इन्हें 'सुधार का मौका' देते हुए सेवा में बने रहने दिया और एक साल का अतिरिक्त समय दिया। साल 2025 में जब दोबारा टेस्ट हुआ, तो उम्मीद थी कि ये अपनी दक्षता साबित करेंगे, लेकिन नतीजा फिर वही रहा। तीनों कर्मचारी एक बार फिर टाइपिंग टेस्ट में फेल हो गए।

समीक्षा रिपोर्ट के बाद डीएम ने लिया कड़ा फैसला

​लगातार दूसरी बार विफलता मिलने के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने पूरे मामले की गहन समीक्षा के आदेश दिए थे। मंगलवार को जब अंतिम समीक्षा रिपोर्ट डीएम को सौंपी गई, तो उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए तीनों को कलेक्ट्रेट की प्रशासनिक शाखा से हटाकर चतुर्थ श्रेणी में भेजने का आदेश जारी कर दिया। डीएम ने न केवल उनका डिमोशन किया, बल्कि उनकी वेतन वृद्धि (Increment) पर भी रोक लगा दी है।

"कलेक्ट्रेट में टाइपिंग बुनियादी कौशल है"— डीएम

​कार्रवाई के बाद जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा, "कलेक्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण दफ्तरों में सारा काम फाइलों की नोटिंग, ड्राफ्टिंग और दस्तावेजों की टाइपिंग पर टिका होता है। यदि कोई क्लर्क एक मिनट में 25 शब्द भी टाइप नहीं कर पा रहा है, तो वह व्यवस्था पर बोझ है। फाइलों के निस्तारण में तेजी लाने के लिए यह बुनियादी कौशल अनिवार्य है। ऐसे में मानक पूरे न करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करना जरूरी था।"

कर्मचारियों में हड़कंप, अनुशासन का संदेश

​इस ऐतिहासिक फैसले के बाद कानपुर कलेक्ट्रेट में तैनात अन्य बाबू और कर्मचारियों में हड़कंप की स्थिति है। आमतौर पर सरकारी विभागों में इस तरह का डिमोशन कम ही देखने को मिलता है। इस फैसले ने यह साफ कर दिया है कि अब केवल नौकरी पा लेना काफी नहीं है, बल्कि पद के अनुरूप अपनी दक्षता बनाए रखना भी अनिवार्य है। '9वन टाइम्स' के माध्यम से प्रशासन ने यह संदेश दिया है कि जनहित के कार्यों में शिथिलता बरतने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।


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