कानपुर के किसानों के लिए अलर्ट: फसल नुकसान पर 72 घंटे के भीतर इस नंबर पर दें सूचना, तभी मिलेगा बीमा का लाभ—जानें पूरी प्रक्रिया - NINE ONE TIMES

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09/04/2026

कानपुर के किसानों के लिए अलर्ट: फसल नुकसान पर 72 घंटे के भीतर इस नंबर पर दें सूचना, तभी मिलेगा बीमा का लाभ—जानें पूरी प्रक्रिया

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उप कृषि निदेशक की अपील: देर न करें, तुरंत मिलाएं 14447

​कानपुर किसान फसल बीमा क्लेम 2026, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना टोल फ्री नंबर 14447, ओलावृष्टि मुआवजा कानपुर, 9वन टाइम्स न्यूज़


IMPORTANT किसान ध्यान दें (Claim Guide):

  • टोल फ्री नंबर: फसल नुकसान की सूचना तुरंत 14447 पर दर्ज कराएं।
  • समय सीमा: आपदा आने के मात्र 72 घंटे के भीतर सूचना देना अनिवार्य है।
  • ताजा आंकड़े: अब तक 1,184 शिकायतें दर्ज, 167 का सर्वे पूरा हो चुका है।
  • बीमा कवरेज: जनपद के 24,669 किसानों ने रबी 2025-26 के लिए कराया है बीमा।
कानपुर नगर।

बीते कुछ दिनों में जनपद कानपुर नगर में हुई बेमौसम अतिवृष्टि, भीषण ओलावृष्टि और तेज आंधी-तूफान ने अन्नदाताओं की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में तैयार खड़ी रबी की फसल (गेहूं, सरसों आदि) जमीन पर बिछ गई है। किसानों के इस भारी संकट को देखते हुए कृषि विभाग ने मुआवजे की प्रक्रिया तेज कर दी है। उप कृषि निदेशक आर.एस. वर्मा ने जनपद के समस्त किसानों से अपील की है कि वे अपनी क्षति की सूचना तत्काल निर्धारित माध्यमों से सरकार तक पहुंचाएं।

72 घंटे की डेडलाइन: लापरवाही पड़ सकती है महंगी

​उप कृषि निदेशक आर.एस. वर्मा ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के कड़े प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी प्राकृतिक आपदा से फसल को नुकसान होता है, तो उसकी सूचना घटना के 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य है। यदि किसान इस समयसीमा के बाद सूचना देते हैं, तो तकनीकी कारणों से उनके क्लेम को खारिज किया जा सकता है। इसलिए, जिन किसानों की फसल प्रभावित हुई है, उन्हें बिना देरी किए टोल फ्री नंबर 14447 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए

कानपुर नगर में बीमा का हाल और अब तक की कार्यवाही

​विभागीय आंकड़ों के अनुसार, जनपद कानपुर नगर में रबी सीजन 2025-26 के अंतर्गत कुल 24,669 किसानों ने अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा कराया हुआ है। मौसम के तांडव के बाद अब तक (08 अप्रैल 2026 की रिपोर्ट के अनुसार) टोल फ्री नंबर पर कुल 1,184 शिकायतें प्राप्त हो चुकी हैं। उप कृषि निदेशक ने बताया कि विभाग पूरी मुस्तैदी से काम कर रहा है और अब तक 167 शिकायतों का भौतिक सर्वेक्षण (Survey) पूरा किया जा चुका है। शेष शिकायतों पर संबंधित बीमा एजेंसियों द्वारा तेजी से सर्वे किया जा रहा है।

सर्वेक्षण की प्रक्रिया और मुआवजे का आधार

​किसानों द्वारा टोल फ्री नंबर पर सूचना दर्ज कराने के बाद बीमा कंपनी के प्रतिनिधि और कृषि विभाग की टीम खेत का मौका-मुआयना करती है। इसमें फसल के नुकसान के प्रतिशत का आकलन किया जाता है। वर्मा ने बताया कि समय पर सूचना प्राप्त होने से एजेंसियों को सर्वेक्षण करने में आसानी होती है और मुआवजे की फाइल समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ पाती है। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे सूचना देते समय अपना पॉलिसी नंबर या बैंक खाता विवरण साथ रखें।

ओलावृष्टि और तूफान से अन्नदाता बेहाल

​कानपुर के विभिन्न ब्लॉक क्षेत्रों से आ रही खबरें चिंताजनक हैं। तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसल गिर गई है, जिससे दाने काले पड़ने और वजन कम होने का खतरा बढ़ गया है। वहीं ओलावृष्टि ने दलहन और तिलहन की फसलों को भी भारी चोट पहुंचाई है। प्रशासन का कहना है कि वे किसानों के साथ खड़े हैं और हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि एक भी पात्र किसान मुआवजे से वंचित न रहे।

निष्कर्ष: जागरूक रहें किसान

​यह समय किसानों के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण है। लेकिन जागरूकता ही उन्हें इस आर्थिक संकट से उबार सकती है। '9वन टाइम्स' भी किसानों से अपील करता है कि केवल सरकार या प्रशासन के भरोसे बैठने के बजाय, अपनी फसल क्षति की आधिकारिक रिपोर्ट 14447 पर स्वयं दर्ज कराएं या नजदीकी कृषि केंद्र से संपर्क करें।


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