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10/08/2020

मायावती ने पत्रकार वार्ता में की घोषणा परशुराम’ की भव्य प्रतिमा लगाकर ब्राह्मण समाज को सम्मान












  • समाजवादी सरकार में संतों-महापुरुषों के नाम पर संस्थान और जिलों के जो नाम बदले गए हैं, उसे सत्ता में आते ही उनके नाम पर किया जाएगा


यूपी की राजनीति में ब्राह्मण वोट बैंक को लेकर मचे घमासान के बीच बसपा सुप्रीमो मायावती ने भी सत्ता में आने पर समाजवादी पार्टी से भी अधिक परशुराम की भव्य प्रतिमा लगाने की बात कहकर राजनीतिक पारे को और बढ़ा दिया है। उन्होंने दिल्ली में रविवार को पत्रकारों वार्ता में घोषणा करते ुए कहा कि यूपी में सरकार बनने पर ब्राह्मण समाज के आस्था व स्वाभिमान के प्रतीक ‘श्री परशुराम’ की भव्य प्रतिमा लगाकर ब्राह्मण समाज को सम्मान दिया जाएगा।


संतों-महापुरुषों के नाम पर कम्यूनिटी सेंटर
मायावती ने अन्य जातियों को भी अपने पाले में लाने के लिए कहा कि सभी जातियों व धर्मों में जन्मे महान संतों, गुरुओं व महापुरुषों के नाम पर सत्ता में आने पर आधुनिक अस्पताल और सुविधाओं वाला कम्यूनिटी सेंटर बनाया जाएगा। इससे कोरोना जैसी अन्य भयानक बीमारी आने पर यूपी की जनता को बेहतर सुविधा मिलेगी। मौजूदा समय सुविधाएं न होने की वजह से कोरोना महामारी में यूपी की जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।


बसपा हालांकि प्रार्थना कर रही है कि कोरोना जैसी अन्य और कोई महामारी न फैले। इसके साथ ही समाजवादी सरकार में संतों-महापुरुषों के नाम पर संस्थान और जिलों के जो नाम बदले गए हैं, उसे सत्ता में आते ही उनके नाम पर किया जाएगा। सपा सरकार में लिया गया ऐसा फैसला उनके मुखिया की दलित व अन्य पिछड़ा वर्ग विरोधी मानसिकता होना दर्शाता है।


ब्राह्मण समाज को बसपा पर भरोसा
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अब ब्राह्मण समाज के वोटों की खातिर अपने राजनीतिक स्वार्थ में ‘श्री परशुराम’ की ऊंची प्रतिमा लगाने की बात कर रही है। उसे अपने शासनाकाल में ऐसा करना चाहिए था, लेकिन नहीं किया। सपा चुनाव नजदीक देखकर ऐसी बात कर रही है, इससे साफ है कि सपा की स्थिति प्रदेश में बहुत ज्यादा खराब हो रही है। ऐसे में ब्राह्मण समाज सपा के साथ कतई जाने वाला नही है। वैसे भी सपा सरकार में ब्राह्मणों का उत्पीड़न और शोषण सबसे अधिक हुआ है। ब्राह्मण समाज को बसपा पर पूरा भरोसा है।


राम मंदिर के नाम पर राजनीति ठीक नहीं


उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण के नाम पर राजनीति उचित नही है। राम मंदिर लोगों की धार्मिक आस्था व भावनाओं से ही जुड़ा है। उन्होंने कहा कि 5 अगस्त को भूमि पूजन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ दलित समाज के राष्ट्रपति को भी बुलाया जाता तो दलित समाज में बेहतर संदेश जाता। दलित संत भी चिल्लाते रहे कि उनकी उपेक्षा की गई व उनका तिरस्कार हुआ इसपर भी ध्यान नहीं दिया गया। बसपा का मानना है कि अयोध्या में केवल राम मंदिर निर्माण करने और रामराज्य के कोरे गुणगान से भला होने वाला नही है।


उन्होंने कहा कि बसपा जो कहती है उस पर ईमानदारी से अमल करती है। यूपी में वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में दलितों, पिछड़ों, मुस्लिम व अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ अपरकास्ट में ब्राह्मण समाज के अधिकतर वोट बसपा को मिले थे। क्षत्रिय समाज को भी उचित भागेदारी दी गई थी। हालांकि, उस समय चुनाव में ब्राह्मण समाज को कांग्रेस, सपा और भाजपा ने गुमराह करने की पूरी कोशिश की थी।














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