स्टेशन के प्लेटफार्म नम्बर नौ पर स्पेशल ट्रेन को रोककर श्रमिकों को उतारते हुए की गई थर्मल स्कैनिंग जांच — आठ काउंटरों बनाकर एक—एक बोगी से उतारते हुए प्रवासियों की जांच के बाद कराया गया भोजन—पानी — सभी के नाम—पते लिखते हुए परिवहन विभाग की 45 बसों से उनके घरों के लिए किया गया रवाना — स्टेशन गाड़ी पहुंचने पर घर पहुंचने और अपनों से मिलने की आस में प्रवासियों की आंखों से छलक पड़े आंसू
कानपुर। देश में लॉक डाउन के चलते जहां जिंदगी ठहर गई है वहीं कामकाज पूरी तरह से ठप है। ऐसे में काम के लिए घर छोड़ परदेश गए श्रमिक जहां के तहां फंस गए। सरकार ऐसे प्रवासी श्रमिकों को घर वापसी का बेड़ा उठाया है। इसी के तहत रविवार को 21 मार्च के बाद कानपुर के फंसे श्रमिकों के लिए चलाई गई पहली प्रवासी स्पेशल ट्रेन 12 श्रमिकों को लेकर गुजरात से चलकर सेन्ट्रल स्टेशन पहुंची।
गाड़ी में बैठे श्रमिकों की जांच के लिए प्लेटफार्म नम्बर नौ पर आठ काउंटर बनाए गए थे और स्वास्थ्य विभाग के साथ जीआरपी, आरपीएफ, रेलवे अफसरों के साथ प्रशासनिक अमला मौजूद रहा। सभी की नाम-पते के साथ जानकारी जुटाते हुए श्रमिकों की थर्मल जांच की और फिर रोडवेज की 45 बसों से एक—एक कर सभी श्रमिकों को घरों के लिए रवाना किया गया।
देश के अलग—अलग प्रांतों में फंसे प्रवासियों के लिए सरकारों द्वारा उनके घर वापसी कराई जा रही है। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर आज कानपुर व आसपास इलाकों में रहने वाले 12 प्रवासी श्रमिकों को लेकर आज ट्रेन सेन्ट्रल स्टेशन पहुंची। यह 21 मार्च के बाद 44वें दिन पहली ऐसे स्पेशल प्रवासी ट्रेन है जो कानपुर के श्रमिकों व आमजन के लिए चलाई गई थी। गाड़ी में बैठे श्रमिकों की जांच से लेकर उनके खानपान की पूरी व्यवस्था रेलवे, आरपीएफ, जीआरपी द्वारा स्टेशन पर की गई थी। एक—एक बोगी को खोलते हुए उसमें सवार श्रमिकों की जांच यहां पर बनाए गए आठ स्वास्थ विभाग के काउंटरों पर की गई। डॉक्टरों ने सभी की फिजिकल डिस्टेंसिंग के साथ क्रमबद्ध थर्मल स्कैनिंग की और उन्हें होम क्वारेंटाइन की मुहर लगाई गई।
भारी संख्या में महिलाएं व बच्चों, छलक पड़े आंसू
गुजरात से चलकर आई पहली कानपुर प्रवासी स्पेशल ट्रेन में श्रमिकों के साथ उनके परिवार भी थी। स्टेशन पर गाड़ी के आते ही एक—एक बोगी खोली गई। जिसके बाद सभी की थर्मल जांच की गई। डॉक्टरों ने महिलाओं व बच्चों की भी थर्मल जांच की और उन्हें होम क्वारेंटाइन रहने की हिदायत देते हुए कोरोना वायरस से बचाव को लेकर जागरूक किया। महिलाओं को समझाया गया कि होम क्वारेंटाइन के दौरान किसी से भी न मिलें। यहां पर सबसे बड़ी खुशी उस वक्त प्रवासियों के चेहरे पर देखने को मिली जब ट्रेन स्टेशन पहुंची और उन्हें कुछ ही समय बाद अपने घर पहुंचने की आस पूरी होती दिखी। इस दौरान कई प्रवासी व महिलाओं के चेहरे पर खुशी के आंसू तक छलक पड़े।
आठ काउंटरों बनाए गए थे जांच के लिए
प्रवासी श्रमिकों को लेकर आ रही स्पेशल ट्रेन में 12 सौ श्रमिक सवार थे। भारी संख्या को देखते हुए घंटाघर की तरफ स्थित नौ नम्बर प्लेटफार्म पर गाड़ी का ठहराव दिया गया, ताकि निकलते हुए श्रमिकों को काफी चलकर न जाने पड़े। इस दौरान प्लेटफार्म पर अलग—अलग जगह आठ मेडिकल जांच काउंटर लगाए गए थे। जहां स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पूरी एहतियात के साथ सभी की थर्मल जांच की और उन्हें क्वारेंटाइन की मुहर लगाई गई।
स्टेशन पर पूर्व से ही व्यवस्था कर ली गई थी दुरुस्त
स्पेशल प्रवासी ट्रेन के सेन्ट्रल आने की जानकारी के चलते रविवार सुबह से ही सुरक्षा व्यवस्था के साथ अन्य सभी आवश्यक जरुरतों को पूरा कर लिया गया था। यहां पर सुरक्षा कर्मी पीपीई किट पहनकर गाड़ी से आने वालों की निगरानी के लिए मुस्तैद खड़े थे। इसके साथ ही रेलवे अफसर व कर्मी, आरपीएफ, जीआरपी के साथ जिला व पुलिस प्रशासन ने उनके आने से लेकर घर तक जाने की व्यवस्था मुकम्मल कर रखी थी। जांच के बाद सभी को उनके घर तक पहुंचाने का बेड़ा योगी सरकार ने उठा रखा था और उसके बखूबी कानपुर के अफसरों व कर्मियों ने पूरा कर दिखाया।
21 मार्च के बाद आम जन के लिए दूसरी व चौथी ट्रेन आई कानपुर
कोरोना वायरस के खतरे को लेकर लॉक डाउन में सभी यातायात सेवाएं बंद हैं। उनमें रेलवे सेवा भी शामिल है। हालांकि मालगाड़ी का संचालन जारी हैं। ऐसे में दूर—दराज फंसे लोगों को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए आपात स्थिति में आम जन के लिए यात्री ट्रेन चलाई जा रही है। इसी के तहत 21 मार्च से अब तक केवल चार ही यात्री ट्रेनें कानपुर के सेन्ट्रल स्टेशन पहुंची हैं। इनमें रविवार को गुजरात से आई स्पेशल प्रवासी ट्रेन ऐसी गाड़ी है जो कानपुर के प्रवासियों को लेकर पहली बार आई है। इससे पूर्व 24 मार्च को दूरंतो गाड़ी उड़ीसा के रेलवे कर्मचारियों को लेकर निकली थी। इसके बाद 26 मार्च को राप्तीसागर दूसरी ऐसे ट्रेन है जो कर्मियों को लेकर गुजरी, लेकिन उसमें भी कोई यात्री नहीं था। इसके बाद दो मई को सेन्ट्रल स्टेशन से तीसरी ट्रेन प्रवासी स्पेशल जयपुर पटना गुजरी। यह पहली गाड़ी थी जो प्रवासियों को लेकर कानपुर सेन्ट्रल स्टेशन पहुंची

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