
- 15 अगस्त पर पुलिस सेवा में उत्कृष्ट कार्य करने पर दिए जाने वाले गैलेंट्री अवार्ड्स का ऐलान कर दिया गया है
बता दें कि इसी के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस महकमे के तेजतर्रार और बेहद जाबांज अधिकारी माने जाने वाले विजय भूषण पांचवी बार गैलेंट्री अवार्ड या वीरता पुरस्कार से नवाजे जा रहे हैं। अपराधियों में खौफ का पर्याय माने जाने वाले आईपीएस अधिकारी विजय भूषण ने अपने अब तक के कार्यकाल के दौरान कई ऐसे उत्कृष्ट कार्य किए हैं जिनकी वजह से वे अक्सर सम्मानित किए जाते रहे हैं।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा प्रेसिडेंट गैलंट्री अवॉर्ड पाने वाले सभी आईपीएस अधिकारियों में से विजय भूषण चुने गए 2002 बैच के प्रमोटी आईपीएस अधिकारी विजय भूषण उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा बार प्रेसिडेंट गैलंट्री अवॉर्ड पाने वाले पुलिस अधिकारी चुने गए यह पांचवीं बार होगा जब विजय भूषण को प्रेसिडेंट दिल्ली अवार्ड दिया जा रहा है
वही उत्तर प्रदेश में वर्ष 1990 बैच के आईपीएस दलजीत चौधरी व 2003 के प्रमोटी आईपीएस राजेश पांडे को चार बार प्रेसिडेंट गैलंट्री अवॉर्ड मिला वहीं यूपी के 23 जवानों को वीरता का पदक भी दिया गया है इनमें पुलिस के कई उच्च अधिकारी भी शामिल है वीरता पदक पाने वाले जवानों में एडीजी लॉ एंड आर्डर प्रशांत कुमार, एडीजी 112 असीम अरुण ,डीआईजी विजय भूषण ,आईपीएस अरविंद चतुर्वेदी ,अभिषेक यादव एटीएस के पूर्व एडिशनल एसपी राजेश शाहनी सहित कांस्टेबल एकांत यादव आई जी एस के भगत डीआईजी विजय भूषण सहित 23 जवान शामिल है गृह मंत्रालय की ओर से जारी लिस्ट के अनुसार आंध्र प्रदेश पुलिस को (16) अरुणाचल प्रदेश पुलिस को (4)असम पुलिस को (2)छत्तीसगढ़ पुलिस को (14) गोवा पुलिस को (1) गुजरात पुलिस को (19) हरियाणा पुलिस को (12) हिमाचल प्रदेश पुलिस को (4) झारखंड पुलिस को (24) कर्नाटक पुलिस को (18 )गैलंट्री और सर्विस अवार्ड मिले हैं
वही यूपी पुलिस के अधिकारियों सहित 23 जवानों को वीरता का राष्ट्रपति पुलिस पदक मिला है यह पदक जवानों के सौर्य का प्रतीक होता है पदक से नवाजे जाने वाले पुलिस अधिकारियों में आईपीएस अरविंद चतुर्वेदी व अभिषेक यादव को गैलंट्री मेडल मिला है जबकि एटीएस में एडिशनल एसपी राजेश शाहनी को मरणोपरांत गैलंट्री मेडल से नवाजा गया है इसके अलावा कृष्णानंद राय हत्याकांड में शामिल शूटर फिरदोस को मार गिराने वाले दो अफसरों को भी गैलंट्री मेडल से नवाजा गया है पदक पाने वालों में एसएसपी एसटीएफ रहे एस के भगत और विजय भूषण ने शूटर फिरदोस को मुंबई में मार गिराया था इसके अलावा डीआईजी पुलिस भर्ती बोर्ड विजय भूषण को पांचवीं बार गैलंट्री मेडल मिला है बताते चले कि गृह मंत्रालय ने वीरता और सर्विस पुरस्कारों का ऐलान हो गया है जिसमें गैलंट्री पुरस्कारों की लिस्ट में पहले नंबर पर जम्मू कश्मीर पुलिस है इसके बाद दूसरे नंबर पर सीआरपीएफ 55 मेडल और तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश पुलिस23 मेडल है
- आईपीएस विजय भूषण से अपराधी खौफ खाते हैं
उत्तर प्रदेश पुलिस में PPS रैंक पर 1986 में भर्ती हुए विजय भूषण मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले हैं। अपने शुरुआती कार्यकाल के दौरान ही विजय भूषण उत्तर प्रदेश के आपराधिक गढ़ माने जाने वाले इलाकों में तैनात रहे। जिसमें बुलंदशहर,नोएडा, गाजियाबाद मुरादाबाद बनारस और लखनऊ शामिल है। इनमें से अधिकांश जिलों में विजय भूषण पुलिस अधीक्षक नगर के पद पर रहे. विजय भूषण का हर जिले में लंबे समय तक रहने का रिकार्ड रहा है। अपने कार्यकाल के दौरान इन जिलों में रहते हुए उन्होने अपराधियों की ऐसी लगाम कसी कि वे जनपद छोड़कर ही भाग गए। प्रमोशन पाकर 2002 बैच के आईपीएस अधिकारी बने विजय भूषण को महाकुंभ 2012 का SP बनाया गया था। यहां उन्होने अपने काम से काफी तारीफें बटोरी। विजय भूषण को उसके बाद SP नक्सल ऑपरेशन एटीएस में SP और एसटीएफ में SP भी बनाया गया। जिस समय में शामली में पलायन का मुद्दा काफी जोरों पर था उस समय विजय भूषण को शामली में पुलिस अधीक्षक का पद दिया गया था। लेकिन प्रमोशन पाने के बाद विजय भूषण को शामली से डीआईजी बनारस बना दिया गया। बनारस में लंबे समय तक रहते हुए उन्होने अपराधियों को नाकों चने चबवा दिए. जनता के दिल में जगह बनाने वाले विजय भूषण को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सिक्योरिटी का भी डीआईजी बनाए गया. जिसके बाद उनको डीआईजी आजमगढ़ का चार्ज दिया गया
- एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के नाम से मशहूर हैं IPS विजय
विजयभूषण को एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भी माना जाता है...बदमाशों से टक्कर लेने और उनकी गोली का जवाब गोली से देने का तरीका विजय भूषण अपने शुरुआती कार्यकाल के दौरान ही समझ चुके थे, यही वजह थी कि गाजियाबाद में पुलिस अधीक्षक नगर रहने के दौरान उन्होने कई मुठभेड़ों को अंजाम दिया। इनमे आईसीआईसीआई बैंक की बड़ी मुठभेड़ के अलावा नोएडा के सेक्टर 16 में हुई एक मुठभेड़ शामिल है। उनकी इस उपलब्धि पर तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने उनको सम्मानित भी किया था। अपने कार्यकाल के दौरान विजय भूषण 2010 में बनारस पहुंचे और वहां के पुलिस अधीक्षक नगर रहते हुए डेढ़ लाख के इनामी बदमाश किट्टू और 50000 के इनामी विनोद का एनकाउंटर किया। आपको बता दें कि विजय भूषण बनारस में करीब 2 साल 5 महीने रहे। इस दौरान विजय भूषण ने हर बड़ी घटना का जल्द से जल्द खुलासा करने का रिकार्ड बनाया।
- विदेशों में भी यूपी पुलिस का परचम किया बुलंद
विजय भूषण ने अपनी कार्यशैली से सरकार को काफी प्रभावित किया। जिसका नतीजा ये था कि उन्हे सरकार ने कई बार विदेशी दौरे पर भेजा। देश के बाहर जब-जब यूपी पुलिस का परचम बुलंद हुआ उसमें भूषण भी सहभागी रहे। चाहे बात फ्रांस की हो या ऑस्ट्रेलिया की हो। विजय भूषण ही वो पुलिस अधिकारी थे जो उत्तर प्रदेश पुलिस की तरफ से हर दौरे पर गए।
- कई अवार्ड से किए जा चुके हैं सम्मानित
आजमगढ़ के पुलिस उप महानिरीक्षक विजय भूषण को अपने कार्यकाल के दौरान काफी अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है.... उनको 5 बार राष्ट्रपति से पुलिस पदक मिल चुका है जो कि प्रदेश में गिने चुने अधिकारियों के पास ही है ....इसके साथ-साथ डीआईजी विजय भूषण को पुलिस महानिदेशक का गोल्ड और सिल्वर दोनों कमेंडेशन डिस्क का भी सम्मान भी हासिल है
एक बार पुलिस मुठभेड़ के दौरान विजय भूषण बाल-बाल बचे थे। दरअसल बदमाशों से हो रही मुठभेड़ के दौरान विजय भूषण को आंख के पास गोली लगी थी जिसका इलाज काफी दिनों तक चला। लेकिन विजय भूषण ने इलाज के दौरान भी कभी भी खुद को काम से अलग नहीं किया. घायल होते हुए भी वे हमेशा जनता की सेवा के लिए तैयार रहे। मूल रूप से इलाहाबाद के रहने वाले विजय भूषण ने अपनी शिक्षा दिल्ली के साथ-साथ कई जगहों से ली है. डीआईजी विजय भूषण को जहां किताबें पढ़ने का काफी शौक है. वही अपराध से जुड़ी हुई फिल्में भी वे चाव से देखते हैं. विजय भूषण अपने कार्यकाल के दौरान घर की बजाय क्षेत्र में घूमना ज्यादा पसंद करते हैं.
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