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09/05/2020

महिलाओं का आग्रह सरकार से पुुुनः विचार मैखाने खोले जाने के फैसले पर


कानपुर । लाॅक डाउन के चलते घरेलू हिंसा को बढ़ावा देने वाली शराब की दुकानों को खोले जाने को लेकर शहर भर की महिलाओं का गुस्सा योगी सरकार के प्रति फूट पड़ा है, महिलाओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस संबंध में तत्काल कार्यवाही करते हुए शराब की दुकानों को खोले जाने का फैसला वापस लेने की मांग की है।

फोटो - 5a-  प्रसपा महिला सभा कानपुर नगर अध्यक्ष हेमलता शुक्ला ने कहा कि जब देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में कोरोना महामारी को लेकर अदालतें, स्कूल, माॅल, जिम, व्यापार, रेस्तरां मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा, गिरजाघर, सब बन्द है, तो सरकार ने शराब बिक्री की अनुमति देकर साबित कर दिया है कि शराब बिक्री भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्डी है जिसके बल पर सरकार ने 5 टिॢलियन की अर्थव्यवस्था की परिकल्पना की होगी! अब तो कहना पड़ेगा कि शराब पिएगा इंडिया, तभी तो जिएगा इंडिया , सरकार का यह निण॔य भयावह  स्थिति पैदा कर सकता है, रेड जोन में भी शराब बिक्री की अनुमति दी गई है, जो उचित नहीं है, अब लोग सैकड़ो की तादाद में भीड़ लगा कर शराब की खरीद दारी कर रहे हैं खुलकर सोशल डिस्टेंसिंग का मजाक उड़ाया जा रहा है, खरीद दारो के ना तो मुॅह में मास्क है ना ही हाथ में ग्लब्स, ना ही सेनेटाइजर, आगे कहा कि जिसके पास रुपया पैसा वह शराब खरीद लेगा जिसके पास नहीं है  वह अपनी गृहणियों पर प्रताड़ित कर अत्याचार करेगा! जिससे घरेलू हिंसा बढ़ेगी ! उक्त फैसले कोवापस लिया जाए।

     समाजवादी पार्टी कानपुर/नगर ग्रामीण पूर्व महिला सभा अध्यक्ष मनोरमा त्रिवेदी ने कहा कि शराब की दुकानें खोलना उचित नहीं है इससे हिंसा को बल मिलेगा! सरकार का किया धरा सब मिट्टी में मिल गया! शराब की दुकानो में भारी भीड़ देखकर कोरोना महामारी का खतरा और अधिक बढ़ गया! अगर शराब की दुकानें जल्द बन्द नही कराई गई तो सरकार गम्भीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें! उन्होंने कहा कि 45 दिनों से शहर का जन मानस अपने अपने घरों में कैद होकर सरकार की मुहिम का जबर्दस्त पालन कर रहा था! वही सरकार ने शराब की दुकान खोलने की अनुमति देकर महिलाओं पर महा हिंसा की बाढ़ खड़ी कर दी है, जिससे सरकार के प्रति महिलाओं में आक्रोश फूट पड़ा है! नमामि गंगे प्रदेश सहसंयोजक किरन निषाद का कहना है कि सरकार का यह फैसला जल्द बाजी भरा है, इसे तुरंत वापस लेना चाहिए।

 शहर कांग्रेस कमेटी ग्रामीण महिला सभा अध्यक्ष श्री मती उषा रानी कोरी ने कहा कि एक ओर काफी दिनों से लाॅक डाउन के चलते घर के पुरुष वर्ग को शराब छोड़ने का एक अच्छा अवसर मिला था! वही दूसरी ओर शराब की दुकान खुलते ही वह हिंसा करने पर आमादा हो गयें है, लाॅक डाउन के रहते आमदनी तो ठप पड़ी है, और खर्चे चार गुना हो गये हैं, और बचत तो हम महिलाएं नोटबंदी के दौर में ही गंवा चुके हैं।

- कानपुर पूर्व बसपा महापौर प्रत्याशी अर्चना निषाद का कहना है कि राज्य में तम्बाकू तथा निकोटिन युक्त पान मसाला के निर्माण भण्डारण तथा बिक्री पर लगाया गया प्रतिबंध यथावत जारी रखना चाहिए, जब सरकार ने प्रदेश में पान मसाले पर रोक लगाई थी तो कहाँ था कि लोग गुटका और पान मसाला खाकर सरकारी दफ्तरों, बाजारों, और सार्वजनिक स्थानो में थूकते है जिससे कोरोना महामारी का खतरा बढ़ता है, यह सब नशे की दुकानें खोल कर सरकार क्या साबित करना चाहती है! जिन दुकानों को खुलवाना चाहिए वह तो सब बन्द कराये है उन्होंने कहा कि जब से यह सरकार आई हैं तब से जनता को सिर्फ परेशान लाइन में खड़े होने के अलावा कुछ हासिल नहीं हुआ है कभी मोमबत्ती जलवाते है, तो कभी थाली कटोरी शंख बजाने को जन हित में संदेश जारी करते हैं, एक तो नोटबंदी से वैसे ही व्यापार सारा चौपट हो गया है, लाॅक डाउन में शराब की दुकानें खोल कर घरेलू हिंसा को दावत दे दी है।

 

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