सांसद राघव चड्ढा ने संसद में उठाया बड़ा मुद्दा, कहा – "न्यूनतम बैलेंस चार्जेस गरीबों की मेहनत की कमाई पर डाका है, इसे तुरंत खत्म किया जाए।"
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"दिहाड़ी मजदूर, छोटे किसान और पेंशनभोगी बैंकों के इन छिपे हुए चार्जेस के सबसे बड़े शिकार हैं। ₹19,000 करोड़ की यह वसूली आम आदमी की मेहनत की कमाई का अपमान है।" — राघव चड्ढा
[विशेष रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क, नाइन वन टाइम्स]
नई दिल्ली/कानपुर। आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता और राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद के भीतर देश के करोड़ों बैंक खाताधारकों की पीड़ा को आवाज दी है। उन्होंने बैंकों द्वारा 'न्यूनतम बैलेंस' (Minimum Balance) न रखने के नाम पर की जा रही ₹19,000 करोड़ की वसूली को 'गरीब की जेब पर डाका' करार दिया है।
अंकों का गणित: कहाँ गया जनता का पैसा?
राघव चड्ढा ने सदन में चौंकाने वाले आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पिछले तीन वित्तीय वर्षों में बैंकों ने पेनल्टी के नाम पर कुल ₹19,000 करोड़ वसूले हैं। इसमें सरकारी बैंकों की हिस्सेदारी ₹8,000 करोड़ है, जबकि निजी (Private) बैंकों ने ₹11,000 करोड़ की भारी-भरकम वसूली की है।
"यह फाइनेंशियल इन्क्लूजन नहीं, शोषण है"
सांसद ने भावुक होते हुए कहा कि यह पैसा किसी बड़े उद्योगपति का नहीं, बल्कि उन दिहाड़ी मजदूरों, छोटे किसानों, बुजुर्ग पेंशनभोगियों और गृहिणियों का है जो पाई-पाई जोड़कर बैंक में रखते हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या 100-200 रुपये बैलेंस कम होने पर 500 रुपये तक की पेनल्टी काटना न्यायसंगत है? चड्ढा ने इसे 'फाइनेंशियल इन्क्लूजन' के बजाय 'गरीबी पर टैक्स' बताया।
प्रमुख मांगें और चेतावनी:
राघव चड्ढा ने केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से पुरजोर मांग की है कि:
- छोटे खातों से सभी प्रकार के 'हिडन चार्जेस' तुरंत बंद किए जाएं।
- मिनिमम बैलेंस पेनल्टी को तत्काल प्रभाव से 'जीरो' किया जाए।
- बैंकों को गरीब का रक्षक बनाया जाए, भक्षक नहीं।
सदन में उनकी इस 'चीख' ने पूरे देश का ध्यान खींचा है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इन 'चुभने वाले' चार्जेस से आम आदमी को राहत दिलाती है या नहीं।


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