मिशन 2025: कानपुर मेट्रो का कॉरिडोर-2 जल्द भरेगा रफ्तार, 'NINE ONE TIMES' की खास रिपोर्ट।
- कानपुर में मेट्रो कॉरिडोर-2 का काम युद्ध स्तर पर जारी है, जिसमें टनल और एलिवेटेड ट्रैक का 70% निर्माण पूरा हो चुका है।
कानपुर। शहर की यातायात व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए कानपुर मेट्रो रेल परियोजना के दोनों कॉरिडोर पर काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (UPMRC) ने लक्ष्य रखा है कि निर्धारित समय सीमा के भीतर शहरवासियों को दूसरे रूट की सौगात भी मिल जाए।
1. कॉरिडोर-1 (IIT से नौबस्ता) की स्थिति
कॉरिडोर-1 का प्राथमिक खंड (IIT से मोतीझील) पहले से ही संचालित है। वर्तमान में चुन्नीगंज से नयागंज और कानपुर सेंट्रल से टाटमिल के बीच भूमिगत (Underground) सुरंगों और स्टेशनों का काम लगभग पूरा होने की कगार पर है। झकरकटी और नौबस्ता के बीच एलिवेटेड ट्रैक का काम भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।
2. कॉरिडोर-2 (कृषि विश्वविद्यालय से बर्रा-8) का अपडेट
- भूमिगत कार्य: सीएसए (कृषि विश्वविद्यालय) से रावतपुर के बीच टनल बोरिंग मशीनों (TBM) द्वारा सुरंग बनाने का काम सफलतापूर्वक आगे बढ़ रहा है।
- स्टेशन निर्माण: रावतपुर एक इंटरचेंज स्टेशन होगा, जहाँ दोनों कॉरिडोर आपस में जुड़ेंगे। यहाँ का ढांचागत काम 70% से अधिक पूरा हो चुका है।
- एलिवेटेड खंड: काकादेव और डबल पुलिया के पास पिलर खड़े करने और गर्डर लॉन्चिंग का काम दिन-रात जारी है।
3. आगामी लक्ष्य और तकनीक
UPMRC के अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो की निर्माण गति को बनाए रखने के लिए 'प्री-कास्ट' तकनीक का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जा रहा है, जिससे सड़क पर ट्रैफिक जाम कम होता है और काम जल्दी पूरा होता है। उम्मीद जताई जा रही है कि 2025 के अंत तक कॉरिडोर-2 के कुछ हिस्सों पर ट्रायल रन शुरू हो सकता है।
मुख्य बिंदु:
- सुरक्षा: निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन।
- पर्यावरण: डिपो और स्टेशनों पर सौर ऊर्जा (Solar Energy) पैनल लगाने की योजना।
- कनेक्टिविटी: रेलवे स्टेशन और बस अड्डों को मेट्रो स्टेशनों से सीधे जोड़ा जा रहा है।


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