लखनऊ के आसमान में दिखा 'ब्लड मून' का जादू; नक्षत्रशाला में उमड़ा जनसैलाब, टेलीस्कोप से निहारा नज़ारा! - NINE ONE TIMES

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03/03/2026

लखनऊ के आसमान में दिखा 'ब्लड मून' का जादू; नक्षत्रशाला में उमड़ा जनसैलाब, टेलीस्कोप से निहारा नज़ारा!

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इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला में सजीव आकाश दर्शन: जब बच्चों ने टेलीस्कोप से देखा लाल चाँद और बृहस्पति ग्रह। 


  • लखनऊ नक्षत्रशाला में आयोजित निःशुल्क आकाश दर्शन कार्यक्रम में सैकड़ों लोगों ने टेलीस्कोप के माध्यम से आंशिक चंद्रग्रहण और बृहस्पति ग्रह का दीदार किया।

लखनऊ। वर्ष का पहला पूर्ण चंद्रग्रहण, जिसका लखनऊवासी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे, मंगलवार शाम को एक यादगार अनुभव बन गया। इंदिरा गांधी नक्षत्रशाला परिसर में 'सजीव आकाश दर्शन' कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया, जहाँ शहर के सैकड़ों लोगों ने टेलीस्कोप के माध्यम से खगोलीय घटनाओं को अपनी आँखों से निहारा।

जब 'ब्लड मून' देख रोमांचित हुए बच्चे

​नक्षत्रशाला के एमेच्योर एस्ट्रोनॉमर क्लब के सदस्यों ने उन्नत टेलीस्कोप के माध्यम से आमजन को चंद्रग्रहण का प्रत्यक्ष अवलोकन कराया। जैसे ही चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आया, दर्शकों की लंबी कतारें लग गईं। चंद्रमा की खास लालिमा को देखकर बच्चों और युवाओं में भारी उत्साह दिखा और उन्होंने इसे “ब्लड मून” कहकर पुकारा।

​लखनऊ में यह ग्रहण आंशिक रूप में सायं 6:11 बजे से दिखाई देना शुरू हुआ। दर्शकों ने न केवल आंशिक ग्रहण बल्कि पेनुम्ब्रल (उपछायात्मक) ग्रहण को भी करीब से देखा।

बृहस्पति ग्रह का दीदार और एस्ट्रोफोटोग्राफी




​ग्रहण के साथ-साथ दर्शकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बृहस्पति ग्रह (Jupiter) और उसके गैलीलियन उपग्रहों का दर्शन रहा। नक्षत्रशाला द्वारा तीन विशेष टेलीस्कोप और एक Astrophotography Station स्थापित किया गया था। यहाँ न केवल खगोलीय चित्र लिए गए, बल्कि विद्यार्थियों को निःशुल्क एस्ट्रोफोटोग्राफी के गुर भी सिखाए गए।

विशेषज्ञों ने दूर की भ्रांतियां

​क्लब के वरिष्ठ सदस्यों सुभाशीष, अनुराग, संकल्प मोहन, दीपशिखा और अन्य विशेषज्ञों ने लोगों को ग्रहण के पीछे का विज्ञान समझाया। दीपशिखा और संकल्प ने बच्चों को 'Rayleigh Scattering' के सिद्धांत के बारे में बताया, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि वायुमंडल के कारण ग्रहण के समय चंद्रमा लाल क्यों दिखाई देता है।

​यह कार्यक्रम रात 9:30 बजे तक चला और सभी के लिए पूरी तरह निःशुल्क था। क्लब के सदस्यों ने बताया कि होली के बाद भी वैज्ञानिक जागरूकता के लिए ऐसे आयोजन लगातार जारी रहेंगे।





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