19 दिन की जेल, समाज में बेइज्जती और करियर पर लगा दाग; प्रॉपर्टी के लालच में ससुर ने दर्ज कराया था POCSO का झूठा मुकदमा!
19 दिन की जेल, समाज में बेइज्जती और करियर पर लगा दाग; प्रॉपर्टी के लालच में ससुर ने दर्ज कराया था POCSO का झूठा मुकदमा!
कानपुर (नौबस्ता): उत्तर प्रदेश के कानपुर से एक ऐसा अनोखा मामला सामने आया है, जिसने कानूनी गलियारों और समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है। एक एयरफोर्स कर्मी, जिसे अपनी ही नाबालिग साली से छेड़छाड़ के आरोप में 7 साल तक कोर्ट के चक्कर काटने पड़े और जेल की हवा खानी पड़ी, उसे विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो कोर्ट) ने बाइज्जत बरी कर दिया है।
क्या था पूरा मामला?
बिठूर निवासी एयरफोर्स कर्मी अनुराग शुक्ला की शादी फरवरी 2019 में हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद, 8 मार्च 2019 की रात उनकी 15 वर्षीय साली ने शोर मचाते हुए आरोप लगाया कि जीजा ने उसके साथ छेड़छाड़ की है। पिता की शिकायत पर नौबस्ता थाने में पॉक्सो एक्ट समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ और अनुराग को 19 दिन जेल में गुजारने पड़े।
7 साल बाद 'सपने' ने पलटा केस:
दिसंबर 2021 में कोर्ट में बयान दर्ज कराते हुए साली ने जो कहा, उसने सबको चौंका दिया। लड़की ने कोर्ट को बताया, "उस रात मैं एंटीबायोटिक दवा खाकर सो रही थी। दवा नशीली थी, इसलिए मैं आधी नींद में थी। मुझे सपने में ऐसा महसूस हुआ कि जीजू ने मुझे पकड़ लिया है, जिसके बाद मैंने शोर मचा दिया। सच में ऐसा कुछ नहीं हुआ था।"
प्रॉपर्टी का लालच और साजिश का खुलासा:
बरी होने के बाद एयरफोर्स कर्मी अनुराग शुक्ला ने अपना दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि उनके ससुर विजय कुमार तिवारी उन पर अपनी प्रॉपर्टी पत्नी और साली के नाम करने का दबाव बना रहे थे। इनकार करने पर ससुर ने छोटी बेटी का इस्तेमाल कर झूठा केस दर्ज करा दिया। इस मुकदमे की वजह से अनुराग न सिर्फ सामाजिक रूप से अपमानित हुए, बल्कि नौकरी में उनका प्रमोशन भी रुक गया।
कोर्ट का फैसला:
पीड़िता, उसके पिता और बड़ी बहन द्वारा कोर्ट में यह स्वीकार करने के बाद कि मुकदमा 'भ्रमवश' दर्ज कराया गया था, कोर्ट ने शनिवार को अनुराग को सभी आरोपों से बरी कर दिया।



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