स्वामी प्रसाद मौर्य का फिर विवादित बोल: रामचरितमानस की तुलना 'पोटेशियम साइनाइड' से की, बोले- 'समाज का अपमान करने वाला ग्रंथ जहर के समान'
रामचरितमानस पर विवादित टिप्पणी करते हुए स्वामी प्रसाद मौर्य ने इसे 'पोटेशियम साइनाइड' बताया है, जिसके बाद यूपी की सियासत में जबरदस्त उबाल आ गया है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपने बयानों से हमेशा चर्चा में रहने वाले वरिष्ठ नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने एक बार फिर हिंदू धर्मग्रंथ 'रामचरितमानस' को लेकर बेहद तीखा और विवादित हमला बोला है। एक निजी कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे मौर्य ने रामचरितमानस की तुलना दुनिया के सबसे खतरनाक जहर 'पोटेशियम साइनाइड' से कर दी। उन्होंने कहा कि जिस तरह पोटेशियम साइनाइड की एक बूंद जान ले लेती है, उसी तरह इस ग्रंथ में लिखी कुछ बातें समाज के एक बड़े वर्ग के लिए जहरीली हैं।
'भेदभाव को बढ़ावा देने का लगाया आरोप'
स्वामी प्रसाद मौर्य ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि वह किसी भी धर्म के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन जो ग्रंथ दलितों, पिछड़ों और महिलाओं को नीचा दिखाते हैं, उनका विरोध करना उनका संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने मानस की कुछ चौपाइयों का जिक्र करते हुए दावा किया कि इसमें लिखी बातें जातिवाद और छुआछूत को बढ़ावा देती हैं। मौर्य ने कहा, "जब तक इस ग्रंथ के विवादित अंशों को संशोधित या प्रतिबंधित नहीं किया जाता, तब तक इसे समाज के लिए हितकारी नहीं माना जा सकता।"
सियासी गलियारों में मचा हड़कंप:
मौर्य के इस बयान के बाद भाजपा ने उन पर चौतरफा हमला शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रियों ने इसे 'विनाशकाले विपरीत बुद्धि' करार देते हुए कहा कि मौर्य अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बचाने के लिए करोड़ों लोगों की आस्था को ठेस पहुंचा रहे हैं। वहीं, अयोध्या के प्रमुख संतों ने भी इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। हनुमानगढ़ी के महंतों ने चेतावनी दी है कि अगर मौर्य ने माफी नहीं मांगी, तो उनके खिलाफ बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।
विपक्ष ने बनाई दूरी:
दिलचस्प बात यह है कि इस बार विपक्षी दलों ने भी स्वामी प्रसाद मौर्य के इस बयान से खुद को अलग कर लिया है। कई नेताओं का मानना है कि इस तरह की धार्मिक बयानबाजी से चुनाव में नुकसान उठाना पड़ सकता है। सोशल मीडिया पर भी 'स्वामी प्रसाद मौर्य' ट्रेंड कर रहा है और बड़ी संख्या में लोग उनकी गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि इस बढ़ते विवाद के बीच प्रशासन क्या कदम उठाता है।


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