कानपुर: ई-रिक्शा में सवारी बनकर महिलाओं को लूटने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश - NINE ONE TIMES

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27/03/2026

कानपुर: ई-रिक्शा में सवारी बनकर महिलाओं को लूटने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का पर्दाफाश

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बादशाही नाका पुलिस ने तीन शातिर लुटेरों को गिरफ्तार किया, ₹5500 नकद और सोने-चांदी के आभूषण बरामद



हाइलाइट्स
- ₹5500 नकद बरामद  
- सोने की अंगूठी, नाक की कील, चांदी की बिछिया जब्त  
- गिरोह में महिलाएं भी सक्रिय  
- ई-रिक्शा में सवारी बनकर वारदात को अंजाम देते थे  
- पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को जेल भेजा  


[कानपुर से विशेष रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क, नाइन वन टाइम्स]

कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर महानगर में अपराध और अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत बादशाही नाका थाना पुलिस को एक बड़ी और महत्वपूर्ण सफलता हाथ लगी है। पुलिस टीम ने एक ऐसे शातिर अंतर्राज्यीय स्तर के गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो ई-रिक्शा में सवारी बनकर मासूम महिलाओं के आभूषण और नकदी पर हाथ साफ कर देता था। इस गिरोह की खास बात यह थी कि इसमें पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी सक्रिय रूप से शामिल थीं, जो भीड़भाड़ वाले इलाकों में पुलिस की नजरों से बचकर वारदातों को अंजाम दे रही थीं।



कैसे काम करता था यह शातिर गिरोह? (Modus Operandi)

​पुलिस की सघन जांच और एसीपी (ACP) द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद प्रोफेशनल और चौंकाने वाला था। गिरोह का एक सदस्य, जिसका नाम शारिक है, ई-रिक्शा चालक बनकर शहर की सड़कों पर निकलता था। उसके साथ सवारी के रूप में गिरोह की दो महिला सदस्य—राधिका और संजना (दोनों निवासी जूही थाना क्षेत्र, कानपुर)—पहले से ही रिक्शे में बैठी होती थीं।

​जब भी कोई मध्यमवर्गीय या बुजुर्ग महिला ई-रिक्शा में सवारी के तौर पर बैठती, तो ये दोनों महिलाएं उसे अपनी बातों में उलझा लेती थीं। मौका पाकर ये महिलाएं बड़ी ही सफाई से पीड़िता के गले की चैन, कान के कुंडल या बैग में रखे रुपयों को पार कर देती थीं। चूंकि साथ में महिलाएं होती थीं, इसलिए शिकार को शक भी नहीं होता था। वारदात को अंजाम देने के बाद चालक शारिक किसी बहाने से रिक्शा रोकता और ये महिलाएं वहां से गायब हो जाती थीं।

घंटाघर चौराहे पर रंगे हाथ दबोचे गए अपराधी

​बादशाही नाका पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि यह गिरोह 26 मार्च की सुबह घंटाघर चौराहे के पास किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की फिराक में खड़ा है। सूचना मिलते ही पुलिस की एक विशेष टीम ने जाल बिछाया। जैसे ही संदिग्ध ई-रिक्शा वहां पहुँचा, पुलिस ने उसे घेर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने पहले पुलिस को गुमराह करने की कोशिश की, लेकिन जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। गिरोह का एक अन्य सदस्य अभी भी पुलिस की पकड़ से बाहर है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं।

बरामदगी का पूरा विवरण

​पुलिस ने गिरफ्तार अभियुक्तों के पास से चोरी का निम्नलिखित सामान बरामद किया है:

  • नकदी: लगभग ₹5500 की नकद राशि (जो हाल ही में की गई वारदातों से जुटाई गई थी)।
  • आभूषण: सफेद धातु (चांदी) की दो जोड़ी बिछिया, पीली धातु (सोना) की एक बेशकीमती अंगूठी और एक सोने की नाक की कील।

​एसीपी ने बताया कि बरामद सामान उन पीड़ितों का है जिन्होंने पिछले कुछ दिनों में चोरी की शिकायतें दर्ज कराई थीं।

क्षेत्र में राहत और पुलिस की अपील

​बादशाही नाका पुलिस की इस कार्रवाई से कानपुर के व्यापारिक केंद्रों और आम जनता के बीच सुरक्षा का भाव बढ़ा है। पुलिस अधिकारियों ने आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं से अपील की है कि वे ई-रिक्शा या ऑटो में सफर करते समय अपने सामान के प्रति सतर्क रहें। यदि कोई सवारी संदिग्ध लगे या उनके व्यवहार में कुछ अजीब दिखे, तो तुरंत शोर मचाएं या नजदीकी पुलिस चौकी को सूचित करें।

निष्कर्ष और कार्रवाई

​पुलिस कमिश्नरेट कानपुर ने बादशाही नाका पुलिस टीम के इस सराहनीय कार्य की प्रशंसा की है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों—शारिक, राधिका और संजना—के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि इनसे पूछताछ में और भी कई वारदातों के खुलासे होने की पूरी संभावना है।

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