सिंगसियापुर में बौद्ध कथा के समापन के बाद कथावाचक और साथियों पर हमला, ग्रामीणों में आक्रोश, पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की
हाइलाइट
"संगीसियापुर गांव में बौद्ध कथा के समापन पर यह विवाद हुआ। दबंग रोहित सिंह सेंगर और उसके दो दर्जन साथियों पर कथावाचक को घेरकर पीटने और फिर बाबा साहब की मूर्ति तोड़ने का गंभीर आरोप है। दलित पैंथर ने कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।"
[विशेष अन्वेषण: न्यूज़ डेस्क, नाइन वन टाइम्स]
कानपुर देहात/अकबरपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात जिले में सामाजिक समरसता को बिगाड़ने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। अकबरपुर कोतवाली क्षेत्र के सिंगसियापुर गांव में अराजक तत्वों ने न केवल डॉ. भीमराव अंबेडकर की मूर्ति को खंडित किया, बल्कि धर्म का पाठ पढ़ाने वाले कथावाचक और उनकी टीम पर भी जानलेवा हमला बोल दिया। इस घटना के बाद से पूरे इलाके में सांप्रदायिक और सामाजिक तनाव की स्थिति बनी हुई है, जिसे देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
कथा समापन के बाद रास्ते में बिछाया 'खूनी जाल'
घटनाक्रम की शुरुआत 24 मार्च की रात उस समय हुई जब गांव सिंगसियापुर में पिछले एक सप्ताह से चल रही बौद्ध कथा का समापन हुआ। कार्यक्रम के आयोजक देवेंद्र कुमार के अनुसार, 18 मार्च से शुरू हुई इस कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे थे। रात करीब 11 बजे जब कथावाचक मिलन प्रसाद बौद्ध और उनकी टीम गांव से विदा होकर अपनी गाड़ी से लौट रही थी, तभी रास्ते में पहले से घात लगाए बैठे दबंगों ने उन्हें घेर लिया।
आरोप है कि गांव का ही रहने वाला दबंग रोहित सिंह सेंगर अपने दो दर्जन से ज्यादा साथियों के साथ लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस होकर रूरा-गौरैयापुर मार्ग पर श्याम भट्टा के पास खड़ा था। हमलावरों ने कथावाचक की गाड़ी रुकवाई और उन पर हमला बोल दिया। इस बर्बर हमले में मिलन प्रसाद बौद्ध, प्रतीक राव, धर्मवीर, प्रियांशु और नितिन को बेरहमी से पीटा गया, जिससे वे लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े।
बाबा साहब की मूर्ति खंडित कर फैलाई दहशत
कथावाचक की टीम को अधमरा करने के बाद हमलावरों का दुस्साहस यहीं नहीं रुका। ग्रामीणों का आरोप है कि हमलावर वापस गांव सिंगसियापुर पहुंचे और वहां सार्वजनिक स्थल पर स्थापित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर हमला कर दिया। अराजक तत्वों ने मूर्ति का सिर और हाथ तोड़ दिया। जैसे ही ग्रामीणों को इसकी भनक लगी, वे सैकड़ों की तादाद में घरों से बाहर निकल आए। ग्रामीणों का आक्रोश देख आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए।
धनीराम पैंथर का कड़ा रुख: "आंदोलन की दी चेतावनी"
घटना की सूचना मिलते ही दलित पैंथर के राष्ट्रीय अध्यक्ष धनीराम पैंथर अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए कहा, "बाबा साहब की मूर्ति को तोड़ना सीधे तौर पर संविधान और दलित समाज की आस्था पर हमला है। मनुवादी मानसिकता के लोग कथावाचकों को निशाना बना रहे हैं और मूर्तियों को खंडित कर रहे हैं। हम पहले आरोपियों की गिरफ्तारी और एफआईआर की मांग करते हैं। अगर पुलिस ने लीपापोती की, तो हम पूरे प्रदेश में उग्र आंदोलन करेंगे।"
प्रशासनिक मुस्तैदी और पुलिस का आश्वासन
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अपर पुलिस अधीक्षक (ASP) राजेश पांडे कई थानों की फोर्स के साथ गांव में डटे हुए हैं। पुलिस ने ग्रामीणों को शांत कराते हुए आश्वासन दिया है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। एएसपी राजेश पांडे ने बताया, "आयोजक देवेंद्र कुमार की तहरीर पर मुख्य आरोपी रोहित सिंह सेंगर और उसके साथियों के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जा रहा है। गांव की सहमति से नई मूर्ति की स्थापना जल्द कराई जाएगी। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और पुलिस की टीमें आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं।"
निष्कर्ष: समाज के लिए गंभीर सवाल
कानपुर देहात की यह घटना समाज में बढ़ रही असहिष्णुता की ओर इशारा करती है। जब धार्मिक आयोजनों और महापुरुषों की मूर्तियों को निशाना बनाया जाने लगे, तो यह कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। नाइन वन टाइम्स अपने पाठकों से अपील करता है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और शांति बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें।
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