मंत्री जी के घर होली की 'मिठाई' बनी अपमान का घूँट; पत्रकारों का गुस्सा सातवें आसमान पर, बोले— "लिफाफा न सही, कम से कम गुझिया तो देते!"
लखनऊ (विशेष संवाददाता): उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आज एक ऐसी घटना घटी जिसने सियासी और पत्रकारिता के गलियारों में सनसनी मचा दी है। कैबिनेट मंत्री संजय निषाद के सरकारी आवास पर 'होली मिलन' के नाम पर जो ड्रामा हुआ, उसकी चर्चा अब पूरे प्रदेश में 'सोनपापड़ी कांड' के नाम से हो रही है। मंत्री जी के आवास पर पत्रकारों के आत्मसम्मान को जो ठेस पहुँची, उसका नतीजा यह हुआ कि पत्रकारों ने अपना गुस्सा सीधे मंत्री जी के पीआरओ (PRO) के मुँह पर मिठाई मारकर निकाला।
दो दिन की मेहनत और हाथ लगी 'सोनपापड़ी':
सूत्रों और वायरल वीडियो के मुताबिक, पिछले दो दिनों से पत्रकारों को मंत्री संजय निषाद के घर होली की मिठाई के लिए बाकायदा न्योता देकर बुलाया जा रहा था। पत्रकार अपनी व्यस्तता के बीच समय निकालकर दो दिनों तक मंत्री जी के आवास के चक्कर काटते रहे। लंबी दौड़-भाग और घंटों इंतज़ार के बाद जब मिठाई बाँटने का वक्त आया, तो पत्रकारों के हाथ में 250 ग्राम सोनपापड़ी का एक छोटा सा डिब्बा थमा दिया गया।
PRO के मुँह पर दे मारा डिब्बा:
जैसे ही पत्रकारों ने उस छोटे से डिब्बे को देखा, उनका धैर्य जवाब दे गया। दो दिन की मेहनत और प्रोटोकॉल के नाम पर 250 ग्राम की 'सूखी सोनपापड़ी' को पत्रकारों ने अपने पेशे का अपमान समझा। गुस्से से तमतमाए पत्रकारों ने आव देखा न ताव, वह डिब्बा सीधे मंत्री जी के पीआरओ के मुँह पर दे मारा। पत्रकारों का साफ़ कहना था कि अगर सम्मान नहीं दे सकते, तो इस तरह बुलाकर अपमानित करने का हक भी किसी को नहीं है।
"लिफाफा न सही, गुझिया तो देते":
मौके पर मौजूद पत्रकारों का दर्द छलक पड़ा। चर्चा यह रही कि होली जैसे बड़े त्योहार पर जहाँ लोग एक-दूसरे का मुँह मीठा कराते हैं, वहाँ एक कैबिनेट मंत्री के यहाँ से 1 किलो गुझिया तक नसीब नहीं हुई। पत्रकारों ने तंज कसते हुए कहा, "अरे भाई, लिफाफा (नकद) की उम्मीद तो छोड़ो, कम से कम होली का असली स्वाद यानी 'गुझिया' तो देते और वो भी सम्मानजनक मात्रा में। 250 ग्राम सोनपापड़ी देकर क्या साबित करना चाहते हैं?"
संजय निषाद का पुराना 'लाइन वाला' इतिहास:
यह पहली बार नहीं है जब संजय निषाद के घर ऐसा कुछ हुआ हो। इससे पहले भी मंत्री जी अपने घर पर पत्रकारों की लंबी लाइनें लगवाकर फोटो खिंचवाने और फिर मामूली उपहार देने के लिए चर्चा में रह चुके हैं। लेकिन इस बार पत्रकारों ने 'ईंट का जवाब पत्थर' से नहीं बल्कि 'सोनपापड़ी के डिब्बे' से देकर यह साफ़ कर दिया है कि स्वाभिमान से समझौता नहीं होगा।


No comments:
Post a Comment