​कानपुर में अलविदा जुमा पर गूंजी फिलीस्तीन के समर्थन में आवाज, शनिवार को पूरे शहर में मनेगी ईद-उल-फितर! - NINE ONE TIMES

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21/03/2026

​कानपुर में अलविदा जुमा पर गूंजी फिलीस्तीन के समर्थन में आवाज, शनिवार को पूरे शहर में मनेगी ईद-उल-फितर!

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मस्जिदों में अमन-चैन और जंग के खात्मे की दुआएं, 'यौम-ए-कुद्स' पर फिलीस्तीन के साथ एकजुटता का इजहार।


 

 

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  • ईदगाह की तैयारी: शनिवार सुबह होने वाली ईद की मुख्य नमाज के लिए ईदगाहों में साफ-सफाई और सुरक्षा के विशेष इंतजाम पूरे कर लिए गए हैं।
  • बाजारों में रौनक: ईद की तारीख तय होते ही नई सड़क, परेड और बेकनगंज के बाजारों में खरीदारों का सैलाब उमड़ पड़ा।
  • सुरक्षा व्यवस्था: महाराजपुर से लेकर जाजमऊ तक पुलिस की सक्रियता और पुख्ता सुरक्षा इंतजामों के बीच जुमे की नमाज सकुशल संपन्न हुई।

[रिपोर्ट: न्यूज़ डेस्क, नाइन वन टाइम्स]

कानपुर। औद्योगिक नगरी कानपुर में शुक्रवार को अलविदा जुमे की नमाज बेहद अकीदत, शांति और भाईचारे के साथ संपन्न हुई। शहर की तमाम बड़ी मस्जिदों में हजारों की संख्या में नमाजियों ने खुदा की बारगाह में सिर झुकाया। शहर काजी मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही ने बताया कि गुरुवार को ईद का चांद नजर न आने के कारण अब शनिवार को पूरे शहर में ईद-उल-फितर का त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

अलविदा जुमे की नमाज के बाद मस्जिदों में दुनिया भर में शांति और चल रही जंग के खात्मे के लिए विशेष दुआएं मांगी गईं। विशेष रूप से युद्ध प्रभावित देशों के निर्दोष लोगों की सलामती और मुल्क में खुशहाली की अपील की गई। मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी ने रोजेदारों को संदेश देते हुए कहा कि रमजान का असली मकसद इंसान के भीतर परहेजगारी पैदा करना और दूसरों की मदद का जज्बा पैदा करना है। उन्होंने संपन्न लोगों से अपील की कि वे अपनी दौलत का इस्तेमाल केवल निजी सुख-सुविधा तक सीमित न रखें, बल्कि कौम की भलाई के लिए स्कूल, कोचिंग सेंटर और अस्पताल स्थापित करें।

(अलविदा जुमा और फिलीस्तीन support -

'यौम-ए-कुद्स' पर फलस्तीन की आजादी के लिए दुआ

कानपुर की मस्जिद बैत-उल-सलात में अलविदा जुमा के मौके पर 'यौम-ए-कुद्स' के तहत फिलीस्तीन के समर्थन में एक विशेष जलसा आयोजित किया गया। जलसे को संबोधित करते हुए उलेमा-ए-किराम ने कहा कि इंसान की ज़िंदगी फ़ानी है और उसे हिदायत के रास्ते पर चलना चाहिए। उन्होंने फिलीस्तीन के मौजूदा हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए बैतुल मुकद्दस की आजादी के लिए दुआ की और कहा कि ज़ुल्म के खिलाफ़ आवाज उठाना हर इंसाफ पसंद इंसान की नैतिक जिम्मेदारी है।

​जलसे के दौरान इजराइल और अमेरिका के खिलाफ नारे लगाए गए, जबकि हिंदुस्तान और ईरान के समर्थन में एकजुटता का इजहार किया गया। कार्यक्रम में हाजी कबीर जैदी, हाजी क़मर आबिदी, ताजदार हुसैन, शौएब जैदी, मोसाम जैदी, मुजिबुल हसन रिजवी, डॉ. ज़ुल्फिकार अली रिजवी व डॉ. अयाज़ हैदर रिजवी आदि गणमान्य लोग मौजूद रहे।


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