मेरठ कैंट में 'पावर वार': No-Entry ज़ोन में घुसी SDM की गाड़ी, सेना के जवानों ने रोका तो मचा बवाल - NINE ONE TIMES

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28/03/2026

मेरठ कैंट में 'पावर वार': No-Entry ज़ोन में घुसी SDM की गाड़ी, सेना के जवानों ने रोका तो मचा बवाल

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मेरठ | Nine One Times Bureau

उत्तर प्रदेश के मेरठ छावनी (Cantonment) क्षेत्र से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ 'नो-एंट्री' ज़ोन में प्रवेश को लेकर जिले के एक एसडीएम (SDM) और भारतीय सेना के जवानों के बीच तीखी झड़प हो गई। नियम और रसूख की इस लड़ाई ने अब प्रशासनिक और सैन्य गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।

क्या है पूरा विवाद?

​मिली जानकारी के अनुसार, मेरठ के एक एसडीएम अपनी सरकारी गाड़ी से कैंट स्थित एक प्रतिबंधित मार्ग से गुजरने की कोशिश कर रहे थे। यह मार्ग सुरक्षा कारणों से 'नो-एंट्री' ज़ोन घोषित है, जहाँ केवल अधिकृत सैन्य वाहनों को ही जाने की अनुमति है।

​ड्यूटी पर तैनात संतरी और सैन्य पुलिस के जवानों ने जब एसडीएम की गाड़ी को रोका, तो विवाद शुरू हो गया। सूत्रों का कहना है कि गाड़ी में मौजूद स्टाफ ने पद की गरिमा और 'ऑन-ड्यूटी' होने का हवाला दिया, लेकिन सेना के जवान अपने प्रोटोकॉल पर अड़े रहे। देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई और प्रशासन बनाम सेना की स्थिति बन गई।

प्रमुख बिंदु: क्यों बढ़ा मामला?

  • सुरक्षा प्रोटोकॉल: सेना का स्पष्ट स्टैंड है कि कैंट के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा नियम सबके लिए बराबर हैं।
  • प्रशासनिक तर्क: एसडीएम पक्ष का मानना है कि एक मजिस्ट्रेट को जिले के किसी भी क्षेत्र में कानून-व्यवस्था और निरीक्षण के लिए जाने का अधिकार है।
  • पुलिस का हस्तक्षेप: विवाद इतना बढ़ा कि स्थानीय पुलिस को बीच-बचाव के लिए आना पड़ा, लेकिन सैन्य क्षेत्र होने के कारण मामला घंटों तक सुलझ नहीं पाया।

Nine One Times की पड़ताल: क्या कहते हैं नियम?

​कैंटोनमेंट क्षेत्रों में 'आर्मी एक्ट' और 'लोकल मिलिट्री अथॉरिटी' (LMA) के नियम प्रभावी होते हैं। यहाँ तक कि नागरिक प्रशासन को भी प्रतिबंधित सड़कों का उपयोग करने के लिए पूर्व अनुमति या पास की आवश्यकता होती है। यह घटना दर्शाती है कि जिले के उच्च अधिकारियों और सैन्य अधिकारियों के बीच समन्वय (Coordination) की कितनी कमी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

​इस घटना का वीडियो और जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोग दो गुटों में बंट गए हैं। एक वर्ग सेना के जवानों की तारीफ कर रहा है कि उन्होंने 'VVIP कल्चर' के आगे झुकने से मना कर दिया, वहीं दूसरा वर्ग इसे प्रशासनिक कार्य में बाधा मान रहा है।

नोट: इस मामले में अभी तक जिला प्रशासन या सैन्य मुख्यालय की ओर से कोई आधिकारिक लिखित बयान जारी नहीं किया गया है। Nine One Times इस खबर पर नजर बनाए हुए है।


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