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14/03/2026

संभल विवाद: 'इस्तीफा दें या तबादला कराएं', नमाज के मुद्दे पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की डीएम-एसपी को दो टूक फटकार

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HC ने कहा- निजी संपत्ति पर नमाज के लिए सरकार की अनुमति जरूरी नहीं, राज्य का काम केवल कानून व्यवस्था बनाए रखना है



  • कोर्ट की टिप्पणी: नमाजियों की संख्या को सीमित करना गलत, राज्य धार्मिक स्थलों पर शांति सुनिश्चित करे।
  • कड़ा निर्देश: अगर प्रशासन कानून व्यवस्था नहीं संभाल सकता, तो अधिकारी पद छोड़ दें।
  • अगली सुनवाई: 16 मार्च को राजस्व रिकॉर्ड और तस्वीरों के साथ होगी पेशी

प्रयागराज/संभल (NineOneTimes Desk):

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल में नमाज के मुद्दे पर सुनवाई करते हुए उत्तर प्रदेश प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने संभल के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) के रवैये पर नाराजगी जताते हुए बेहद सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि राज्य का कर्तव्य हर हाल में 'कानून का राज' कायम रखना है, न कि किसी समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता में बाधा डालना।

"नमाजियों की संख्या सीमित नहीं की जा सकती"

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी मस्जिद या निजी संपत्ति पर नमाज अदा करने वालों की संख्या तय करना राज्य का काम नहीं है। कोर्ट ने कहा, "राज्य का यह कर्तव्य है कि वह सुनिश्चित करे कि हर समुदाय अपने निर्धारित पूजा स्थल पर शांतिपूर्वक इबादत कर सके। यदि वह स्थान निजी संपत्ति है, तो वहां पूजा या नमाज के लिए सरकार से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है।"

प्रशासन को सख्त लहजे में दी चेतावनी

कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों को खारिज करते हुए अधिकारियों से कहा कि प्रशासन का हस्तक्षेप केवल तभी होना चाहिए जब धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक भूमि (Public Land) पर हो रहे हों। कोर्ट ने कड़े शब्दों में कहा कि यदि अधिकारी कानून व्यवस्था बनाए रखने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या अपना तबादला करवा लेना चाहिए।

16 मार्च को पेश होंगे सबूत

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि वे राजस्व रिकॉर्ड और तस्वीरें पेश करके यह साबित करेंगे कि नमाज कहां अदा की जा रही है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश लेने के लिए समय देते हुए अगली सुनवाई 16 मार्च के लिए तय की है। अगली सुनवाई में राजस्व रिकॉर्ड की भूमिका अहम होगी, जिससे यह तय होगा कि विवादित स्थल निजी है या सार्वजनिक।

6. निष्कर्ष (Conclusion)

​इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह रुख धार्मिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक दखल के बीच एक महत्वपूर्ण नजीर पेश कर सकता है। संभल के संवेदनशील माहौल को देखते हुए अब सबकी नज़रें 16 मार्च की सुनवाई पर टिकी हैं। NineOneTimes इस मामले की पल-पल की अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।


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