कथावाचक या कुकर्मी? श्रवण दास की गिरफ्तारी ने खोला धर्म के नाम पर पाखंड का कच्चा चिट्ठा; सावधान रहने की जरूरत - NINE ONE TIMES

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21/03/2026

कथावाचक या कुकर्मी? श्रवण दास की गिरफ्तारी ने खोला धर्म के नाम पर पाखंड का कच्चा चिट्ठा; सावधान रहने की जरूरत

NINE ONE TIMES

करीब एक माह पूर्व हुई गिरफ्तारी के बाद भी शांत नहीं है लोगों का गुस्सा; आस्था के नाम पर नाबालिगों का शोषण करने वाले 'भेड़ियों' से समाज को आगाह करती विशेष रिपोर्ट।

 


Highlight

"व्यास पीठ पर बैठने वाला हर व्यक्ति संत नहीं होता। श्रवण दास की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि कानून के हाथ लंबे हैं और धर्म की आड़ में किए गए पाप कभी छिपते नहीं हैं।"

[विशेष विश्लेषण: नाइन वन टाइम्स ब्यूरो]

कानपुर/दरभंगा। धर्म आस्था का विषय है, लेकिन जब इसी आस्था का इस्तेमाल किसी की मजबूरी या मासूमियत का शिकार करने के लिए किया जाए, तो वह 'पाखंड' बन जाता है। पिछले दिनों मिथिलांचल के चर्चित कथावाचक श्रवण दास महाराज (श्रवण ठाकुर) की गिरफ्तारी ने एक बार फिर समाज के सामने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि हम अपनी आस्था कहाँ और किस पर लुटा रहे हैं?




क्या था पूरा मामला? (Flashback)

लगभग एक महीने पहले, जनवरी 2026 में दरभंगा पुलिस की एसआईटी ने श्रवण दास को पॉक्सो एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा था। आरोप इतने संगीन थे कि सुनकर रूह कांप जाए—एक नाबालिग लड़की को शादी का झांसा देकर यौन शोषण, दो बार जबरन गर्भपात और सिंदूर भरने का नाटक कर उसे ब्लैकमेल करना। यह सब उस शख्स ने किया जो व्यास पीठ पर बैठकर लोगों को 'मर्यादा' और 'धर्म' का पाठ पढ़ाता था।

अंधविश्वास और पाखंड का शिकार होता समाज:

श्रवण दास जैसे लोग समाज की उन दरारों को पहचानते हैं, जहाँ लोग मानसिक शांति या पारिवारिक समस्याओं के समाधान के लिए बाबाओं के पास जाते हैं। 'सिंदूर वाले बाबा' का वायरल वीडियो यह बताने के लिए काफी है कि कैसे धर्म के चोले में छिपे ये शिकारी मासूमों का मानसिक और शारीरिक शोषण करते हैं।

वक्त है जागने का (सामाजिक संदेश):

आज के दौर में धर्म और पाखंड के बीच की लकीर धुंधली होती जा रही है। श्रवण दास की जेल यात्रा समाज के लिए एक सबक है:

  1. अंधविश्वास से बचें: किसी भी चमत्कार या बाबा के झांसे में आकर अपनी घर की बहू-बेटियों को अकेले उनके पास न भेजें।
  2. सवाल पूछें: धर्म कभी भी गलत काम या शोषण की इजाजत नहीं देता। अगर कोई बाबा मर्यादा की सीमा लांघ रहा है, तो वह 'संत' नहीं 'अपराधी' है।
  3. कानून का सहारा लें: पीड़िता ने हिम्मत दिखाई और वीडियो वायरल होने के बाद मामला दर्ज कराया, तभी यह आरोपी आज सलाखों के पीछे है।

निष्कर्ष:

श्रवण दास आज जेल की हवा खा रहा है, लेकिन समाज में ऐसे कई 'श्रवण' अभी भी घूम रहे हैं। नाइन वन टाइम्स अपने पाठकों से अपील करता है कि धर्म का सम्मान करें, लेकिन पाखंडी और अंधविश्वास फैलाने वाले तत्वों से सावधान रहें। आपकी जागरूकता ही ऐसे कुकृत्यों को रोक सकती है।


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