आपने *स्वर्ग और नरक*, ये दो शब्द बहुत बार सुने होंगे। कुछ लोगों ने स्वर्ग और नरक की कल्पनाएँ भी की हैं। हमने अपने बचपन में ऐसे चार्ट भी देखे हैं, जिनमें स्वर्ग और नरक के काल्पनिक चित्र दिखाए गए हैं।
शायद आपने भी अपने बचपन में देखे होंगे। वह सब तो काल्पनिक है।
परंतु वास्तविक स्वर्ग और नरक क्या है?
*जब व्यक्ति सुख विशेष और उसके साधनों को प्राप्त करता है, तो इस स्थिति का नाम स्वर्ग है. और जब दुख विशेष और दुख के साधनों को प्राप्त करता है, तो इसका नाम नरक है। अर्थात सुख विशेष का नाम स्वर्ग और दुख विशेष का नाम नरक है।*
यह सुख रूपी स्वर्ग और दुख रूपी नरक यहीं संसार में है। आपके अंदर भी है।
*जब आप दूसरों की सेवा परोपकार दान दया प्राणियों की रक्षा आदि आदि उत्तम कार्य करते हैं, तब ईश्वर आपको आपके अंदर से ही (मन से ही) बहुत अच्छा सुख देता है, इसी का नाम स्वर्ग है। और जब कोई व्यक्ति झूठ छल कपट धोखा बेईमानी अन्याय अत्याचार शोषण आदि पाप कर्म करता है, तब ईश्वर उसे अंदर से ही (मन से ही) अनेक प्रकार की चिंताएं दुख परेशानी भय आदि उत्पन्न करता है, इसी का नाम नरक है।*
तो स्वर्ग और नरक यहीं है, इसी धरती पर, आपके अंदर ही है। *इसलिए अच्छे काम करें, स्वर्ग (सुख) का आनंद लें, तथा बुरे कामों से बचें, ताकि नरक (दुख) न भोगना पड़े।* - *स्वामी विवेकानंद परिव्राजक*
07/02/2020
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