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16/02/2020

दादा साहब फाल्के के नाम पर दिया जाता है भारतीय सिनेमा का सबसे बड़ा सम्मान


पुण्यतिथि विशेष: 
दादा साहेब फाल्के:-‌
 भारतीय सिनेमा के जनक दादासाहेब फाल्के स्पेशल


 जब भी हम भारतीय सिनेमा में इतिहास के पन्नों को पलटते हैं तो सुनहरे अक्षरों में लिखा एक नाम हमारे सामने जरूर आता है जी हां भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाले धुंडिराज गोविंद फाल्के जिन्हें दुनिया दादा साहब फाल्के के नाम से जानती हैं दादा साहब का योगदान भारतीय सिनेमा में अतुलनीय था उन्हें फादर ऑफ इंडियन सिनेमा कहा जाता है अपने जीवन की पहली फिल्म देखने के दौरान ही फाल्के ने निर्णय कर लिया था कि उनकी ज़िंदगी का मकसद फिल्मकार बनना है 16 फरवरी को दादा साहब फाल्के की आज 76 वीं पुण्यतिथि है ऐसे में इस मौके पर जानते हैं कि उनके जीवन के बारे में कुछ दिलचस्प बातें हैं


बचपन से ही कला में रूचि थी:-
भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को नासिक जिले के त्र्यम्बकेश्वर गांव  में हुआ था फाल्के बचपन से ही पेंटिंग नाट्य अभिनय में काफ़ी दिलचस्पी रखते थे उन्होंने स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 1885 में मुंबई के सर जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट में एडमिशन लिया कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद दादा साहब फाल्के बड़ौदा पहुंचे वहां उन्होंने कला भवन से केवी, पेंटिंग और फोटोग्राफी का हुनर ​​सीखा


बनी फिल्मकार को देखकर लाइफ ऑफ क्राइस्ट:-
दादा साहब फाल्के ने अपने कैटर के पत्रों के दिनों में फोटोग्राफी की फोटोग्राफर के तौर पर काम करने के दौरान उन्हें प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा के साथ काम करने का मौका भी मिला आखिरकार सिनेमा के लिए उनकी ललक उन्हें वर्ष 1909 में वहाँ ले गई जिसके लिए वे जन्मे थे। उन्होंने जर्मनी से सिनेमा की शुरूआत की। वर्ष 1910 में दादा साहब ने लाइफ ऑफ क्राइस्ट फिल्म देखी थी उसके बाद फालके ने उसी लाइन में आगे काम करने का मन बन लिया


वर्ष 1912 में दादा साहब फाल्के ने पहली मूक फिल्म राजा हरिश्चंद्र बनाई जिसे भारत की पहली फिल्म भी माना जाता है उस समय इस फिल्म को बनाने का कुल खर्चा 15 हजार रुपए आया था दादा साहब को सिनेमा में महिलाओं को आगे लाने के लिए भी जाना जाता है कहा जाता है कि महिलाओं को मौका देने में दादा साहब हमेशा आगे रहते थे दो औरतों दुर्गा और कमला को काम दिया इससे पहले सिनेमा में औरतों का रोल पुरुष ही प्लेय करते थे


25 साल के कैटरर ने सौ से ज्यादा फिल्में बनाईं:-
दादा साहब फालके ने अपने लगभग 25 साल के फिल्मी कॅरियर में 100 से ज्यादा फिल्में बनाईं 16 फरवरी, 1944 को 73 साल की उम्र में दादा साहब ने आखिरी सांस ली भारत सरकार का सूचना और प्रसारण मंत्रालय राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार' समारोह के मौके पर सिनेमा जगत में उनकी याद में सबसे बड़ा सम्मान  दादा साहब फाल्के अवॉर्ड देता है, जिसकी शुरुआत वर्ष 1969 में फालके की 100 वीं जयंती की गई थी


भारतीय सिनेमा में लाइफटाइम उल्लेखनीय योगदान के लिए यह पुरस्कार दिया जाता है इसमें पुरस्कार विजेता को भारत के राष्ट्रपति द्वारा एक स्वर्ण कमल पदक, एक शॉल और 10 लाख रुपए नकद दिए जाते हैं


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