कानपुर नगर - कृषक उपहार योजना के अंतर्गत आज शुक्रवार को एक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम नौबस्ता के गल्ला मंडी मे आयोजित हुआ। जिसमे अच्छी फसल के उत्पादन करने वाले किसानों को लकी ड्रा एवं बम्पर ड्रा के माध्यम से विजयी होने वाले किसानों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार मंत्री ने पहुंचकर दीप प्रज्वलित कर किया।इसी क्रम मे नौबस्ता गल्लामंडी का मंत्री जी ने निरीक्षण किया और व्यापारियों को बेहतर सुविधा देने का ऐलान किया।
इस कार्यक्रम मे स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से उत्तर प्रदेश की गल्ला मंडियों के व्यापारियों के राष्ट्रीय अध्यक्ष ज्ञानेश मिश्र ने विभिन्न समस्याओं का प्रस्ताव रखते हुए एक ज्ञापन दिया। जिसमे व्यापारियों ने कहा कि हम आपको उत्तर प्रदेश की गल्ला मंडियों से जुड़े व्यापारियों की कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान हेतु आपका ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं। जो कि इस प्रकार हैं और इन समस्याओं पर हमे आपसे जल्द ही संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही की अपेक्षा है।
1. “एक देश, एक चुनाव” की आवश्यकता: देश व प्रदेश मे अलग-अलग समय पर चुनाव होने से गल्ला मंडियों पर बार-बार अधिग्रहण की स्थिति उत्पन्न होती है साथ ही नकद धनराशि के परिवहन की सीमा मात्र ₹50,000 होने से व्यापार भी बाधित होता है। अतः देश को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने हेतु वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव से “एक देश -एक चुनाव” की नीति लागू की जाए।
2. मंडी लाइसेंस प्रक्रिया का सरलीकरण: पूरे प्रदेश मे मंडी समिति के लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया को सहज एवं सरल किया जाए जिससे अधिक व्यापारियों को लाइसेंस प्राप्त हो सके और मंडी समितियों की आय मे वृद्धि हो।
3. मंडी शुल्क से छूट: उत्तर प्रदेश मे खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की तर्ज पर अन्य राज्यों से आने वाले कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क को पूर्णतया समाप्त किया जाए ताकि व्यापार को प्रोत्साहन मिले।
4. मंडी शुल्क दर मे संशोधन: प्रदेश मे कृषि उत्पादों पर मंडी शुल्क को शेष सहित अधिकतम 0.5% किया जाए इससे किसानों की लागत व व्यापार पर बोझ घटेगा और जिससे शुल्क संग्रहण मे भी वृद्धि संभव है। इसे एक वर्ष की परीक्षण अवधि हेतु लागू किया जा सकता है।
5. नौबस्ता मंडी की किराया विसंगतियाँ: कानपुर की नौबस्ता गल्ला मंडी मे बड़े क्षेत्रफल की ‘A’ श्रेणी की दुकानों का किराया कम है जबकि छोटे क्षेत्रफल की ‘B’ व ‘C’ श्रेणी की दुकानों का किराया अनुपाततः अधिक है। अतः दुकानदारों को राहत देने हेतु उनके किराये मे भी यथोचित कटौती की जाए।
संवाददाता हिमांशु मिश्रा की रिपोर्ट


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