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06/02/2021

अब मिलेगा मौका प्राकृतिक विरासत ऐतिहासिकसैकड़ों वर्ष पुराने पेड़ों के इतिहास जानने का




 लखनऊ विश्वविद्यालय के वन्य जीव विज्ञान संस्थान ने जैव विविधता बोर्ड की ओर से दिए गए एक प्रोजेक्ट पर सर्वेक्षण कर यह ब्योरा जुटाया है। कोई 1857 की क्रांति का साक्षी है तो किसी की कहानी दिलचस्प और रोचक है

लखनऊ,  अब छात्र-छात्राओं से लेकर सभी लोग उत्तर प्रदेश के  सबसे पुराने पेड़ों का इतिहास और उससे जुड़ी कहानियां पढ़ सकेंगे। इसके लिए लखनऊ विश्वविद्यालय के वन्य जीव विज्ञान संस्थान ने जैव विविधता बोर्ड की ओर से दिए गए एक प्रोजेक्ट पर सर्वेक्षण कर यह ब्योरा जुटाया है। कोई 1857 की क्रांति का साक्षी है तो किसी की कहानी दिलचस्प और रोचक है। जल्द ही इस पर एक किताब तैयार की जाएगी। साथ ही सरकारी जमीन पर लगे 100 साल पुराने पेड़ों को विरासत भी घोषित किया जाएगा।


लविवि के ओएनजीसी बिल्डिंग में वन्य जीव विज्ञान संस्थान संचालित है। संस्थान की कोआर्डिनेंटर प्रो. अमिता कन्नौजिया ने बताया कि वर्ष सितंबर 2020 में जैव विविधता बोर्ड की ओर से ‘उत्तर प्रदेश विरासत वृक्ष’ के नाम से संस्थान को प्रोजेक्ट मिला था। तीन महीने के इस प्रोजेक्ट में प्रदेश भर के 75 जिलों के डीएफओ ने 100 साल पुराने माने जाने वाले 1090 पेड़ों की सूची भेजी थी।


34 प्रजाति के मिले पेड़, सबकी अपनी कहानी


1090 वृक्षों में से सभी विरासत की गाइडलाइन में नहीं आ रहे। इनमें से 380 वृक्षों का सर्वेक्षण किया गया। इमली, पीपल, बरगद, सेमल, कदम, कुसुम, चितवन, पारिजात, शीशम, बरगत, चिलबिल, महुआ, कदम, नीम सहित 34 प्रजातियां मिलीं। प्रो. कन्नौजिया बताती हैं कि कोई 100 तो कोई 600 साल पुराना वृक्ष है। लखीमपुर खीरी के कतर्निया में काफी पुराने पेड़ मिले हैं।


देवरिया में एक हजार साल पुराना बरगद का पेड़


सर्वेक्षण के मुताबिक देवरिया के सुरौलीगढ़ काली जी स्थान पर एक हजार साल पुराना बरगद का पेड़ है। लखनऊ के मलिहाबाद स्थित मझिया गांव में 100 साल पुराने बरगत के पेड़ को हरीवंश बाबा का नाम दिया गया है। चार-पांच हेक्टेयर में फैले इस पेड़ की कहानी बाबा से जुड़ी बताई गई। यहां मंदिर बना है और मेला भी लगता है। आयोध्या के डीएम आवास में 200 साल पुराना बरगद का पेड़ 1857 की क्रांति का जश्मदीद का गवाह है। प्रयागराज के संगम और किले के अंदर लगा पारिजात वृक्ष भी 600 साल पुराना है। अंबेडकर नगर के बेनीपुर में 500 साल पुराने कुसुम के पेड़ के अलावा बरेली में उस वृक्ष को भी शामिल किया गया है, जिसमें अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों को फांसी पर लटकाया था। सर्वेक्षण में इन पेड़ों की स्थिति, तना, ऊंचाई सहित कई चीजों को देख कर आसपास के लोगों से बात भी की गई, जिससे पता चला कि उनके लिए कितना महत्व है।

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