- अध्यादेश के मुताबिक शोधार्थियों को मौखिक परीक्षा के दिन से पीएचडी अवार्ड की तिथि मानी जाएगी। इसके अलावा देश-विदेश के प्रोफेसर भी मौखिक परीक्षा के परीक्षक बनाए जा सकेंगे
लखनऊ। छात्र कल्याण के तहत राजभवन की ओर से पारित किए गए नए अध्यादेश के तहत पीएचडी अवार्ड की व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है। नए अध्यादेश के मुताबिक शोधार्थियों को मौखिक परीक्षा के दिन से पीएचडी अवार्ड की तिथि मानी जाएगी। इसके अलावा देश-विदेश के प्रोफेसर भी मौखिक परीक्षा के परीक्षक बनाए जा सकेंगे। उन्हें यहां बुलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह परीक्षा ऑनलाइन ली जाएगी।
इसके साथ -ही छात्रों को छह महीने की प्रगति रिपोर्ट भी बतानी होगी। हर विभाग में रिसर्च एडवाइजरी कमेटी का गठन किया जाएगा। जहां शोधार्थियों को हर छह महीने में दो बार प्रेजेंटेशन देकर शोध से जुड़ी अपनी प्रगति रिपोर्ट देनी होगी।


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